कतरास (धनबाद) – विजयादशमी का दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी के दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी, तो प्रभु श्रीरामचंद्र ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था। इसी दिन पांडवों ने अपना अज्ञातवास समाप्त कर पुनः शस्त्र धारण किए थे। इसी उद्देश्य से हिंदुओं के मन में शौर्य की भावना को पुनः जागृत करने हेतु हिंदू जनजागृति समिति की ओर से देशभर में 150 से अधिक स्थानों पर ‘सामूहिक शस्त्रपूजन’ का आयोजन किया गया।

धनबाद जिले के कतरास में भी यह पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रकाश सिंघानिया, अधिवक्ता सुदीप गुप्ता, अभिषेक अगरवाल, अशोक चौधरी, प्रकाश अगरवाल, नरेश शर्मा, माहेश्वर नापित, सागर कश्यप, सौरभ पासवान, रितु कुमारी, समिति के अमोल पालेकर एवं समिति के पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत राज्य समन्वयक शंभू गवारे सहित अन्य धर्माभिमानी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम श्री शंभू गवारे द्वारा ‘शस्त्रपूजन के उद्देश्य एवं महत्त्व’ की जानकारी दी गई। इसके उपरांत शस्त्रपूजन विधि संपन्न की गई तथा माँ दुर्गा की आरती की गई। ‘श्री दुर्गादेव्यै नमः’ इस सामूहिक नामजप के उपरांत ‘हिंदू राष्ट्र की प्रतिज्ञा’ ली गई। इस अवसर पर माँ दुर्गा के चरणों में प्रार्थना की गई, ‘‘इस शस्त्रपूजन के माध्यम से हम सभी के भीतर शौर्य जागृत हो तथा हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए समर्पित होने की प्रेरणा प्राप्त हो।’’

