भारत के अनेक बड़े मीडिया हाउस अनेक वर्षों से हिन्दू विरोधी, सनातन विरोधी होरखे हैं
तीसरी कड़ी
नन्द किशोर जोशी
एक्जिक्यूटिव एडिटर
क्रांति ओडिशा मीडिया
मैंने पिछली कड़ियों में टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, हिन्दू मुख्यतः बडे अखबारी मीडिया हाउस के बारे में लिखा है।आज मैं इस कड़ी में कोलकाता के प्रतिष्ठित मीडिया हाउस आनंद बाजार पत्रिका के बारे में लिख रहा हूं।
आनन्द बाजार पत्रिका कोलकाता से प्रकाशित होने वाला प्रतिष्ठित बंग्ला भाषा का दैनिक अखबार है।यह अखबार सैंकड़ों साल पुराना अंग्रेजों के जमाने का अखबार है। अंग्रेजों के जमाने में आनंद बाजार पत्रिका ने भारत के स्वाधीनता आंदोलन को अपनी लेखनी के माध्यम से भरपूर समर्थन दिया था।
इसी मीडिया हाउस का इंग्लिश दैनिक अखबार है टेलिग्राफ। टेलिग्राफ अखबार अनेक शहरों से प्रकाशित होता है। आनन्द बाजार पत्रिका मीडिया हाउस के हिंदी न्यूज टिवि चैनल का नाम है एबिपि।
आज से करीब 35-40 साल पहले लगातार आनन्द बाजार पत्रिका भारत में सभी भाषाओं में एक नंबर का दैनिक अखबार हुआ करता था।इसकी सर्कुलेशन भारत में किसी भी भारतीय भाषा, यहां तक कि अंग्रेजी भाषा में भी सर्वाधिक हुआ करती थी। मतलब लगातार अनेक सालों तक यह अखबार भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला अखबार हुआ करता था।
बात उन दिनों की है करीब चालीस साल पहले जब भारत के सरकारी न्यूज चैनल दूरदर्शन पर आधी घंटे का प्राइवेट न्यूज प्रोग्राम आजतक के नाम से रोजाना रात 9 से साढ़े 9 बजे तक आता था।इस न्यूज प्रोग्राम के न्यूज एंकर थे पत्रकार एस पि सिंह।यह आधे घंटे का न्यूज कार्यक्रम दूरदर्शन में काफी लोकप्रिय हुआ था। इसके संयोजक एस पि सिंह काफी लोकप्रिय हुए अपनी मधुर, मनमोहक वाणी से और आकर्षक उपस्थापना शैली से। इसके पहले भारत में कोई प्राइवेट न्यूज चैनल नहीं था।
एस पि सिंह आनन्द बाजार पत्रिका मीडिया हाउस के रविवार नामक हिंदी साप्ताहिक पत्रिका के संपादक थे। रविवार में भी एस पि सिंह की श्रेष्ठ लेखनी छपती थी।कम समय में रविवार काफी लोकप्रिय पत्रिका होगयी थी।
इसी ग्रुप की ही इंग्लिश साप्ताहिक पत्रिका संडे नाम से छपती थी ।संडे भी काफी लोकप्रिय होगयी थी कम समय में ही। भारत में न्यूज को लेकर तेजी से बदलते हालात में उपरोक्त दोनों ही लोकप्रिय साप्ताहिक पत्रिकाएं बंद हो गयी।
अब मैं आनन्द बाजार पत्रिका मीडिया हाउस के न्यूज के मामले में गिरावट पर लिख रहा हूं। ममता बनर्जी को लेकर खासतौर पर लिख रहा हूं। ममता बनर्जी प्रथम बार लोकसभा चुनाव जीती 1984 में यादवपुर लोकसभा चुनाव क्षेत्र से।
तब से लेकर आजतक ममता बनर्जी इस आनंद बजार पत्रिका बंग्ला दैनिक अखबार की आंखों का तारा बनी हुई है।आंदोलनी ममता बनर्जी को सड़क से उठाकर सिंहासन पर बैठाने में आनंद बजार पत्रिका का सर्वाधिक योगदान है।1984 से लेकर 2011 तक यानी वाममोर्चा सरकार शासन में आनंद बजार पत्रिका ने ममता बनर्जी को बेहिसाब बढ़ावा दिया।ममता पर खूब ममता बरसाई।ममता को फर्श से अर्श पर पहुंचाया।
आज ममता अर्श से वापस फर्श पर पहुंच गयी है। लेकिन ममता पर आनन्द बजार पत्रिका की ममता में कोई कमी नहीं आयी है ,अभी भी जस की तस बरकरार है। ममता हजार देशद्रोही एक्टिविटी करती रही , जिहादियों को खुलेआम बराबर समर्थन, सहयोग करती रही । भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी रही,भतीजा अभिषेक डूबा रहा भ्रष्टाचार में, कानून व्यवस्था राज्य में बद से बदतर होती रही , लेकिन आनंद बजार पत्रिका आंखें बंद कर ममता को लेखनी में समर्थन करती रही।
इससे इस बड़े मीडिया हाउस की गिरावट साफ दिखाई देरही है। ठीक इसी तरह आज भारत के अनेक प्रतिष्ठित मीडिया हाउस और खास तौर पर अखबारी मीडिया हाउस अपना वजूद खबरों की दुनिया में दिन प्रतिदिन खोते जा रहे हैं। क्रमशः


