भारत,जापान,यूएई, इजरायल बना रहे अपना क्वाड , दुनिया का सबसे ज्यादा ताकतवर मिलिट्री गठबंधन होगा
नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर
क्रांति ओडिशा मीडिया
आज दुनिया में सब जगह बड़ी उथल-पुथल हो रही है। ऐसे में युद्ध की चर्चा पूरे विश्व में छायी हुई है। दुनिया में दूसरा विश्वयुद्ध केवल 4 साल चला था।रुस -यूक्रेन युद्ध 4 साल से ज्यादा चल गया है।रुस -यूक्रेन युद्ध में एक तरफ रुस है और दूसरी तरफ अमेरिका के नेतृत्व में पूरा पश्चिमी यूरोप रुस के खिलाफ यह युद्ध लड़ रहा है।
अगर अमेरिका,पूरा पश्चिमी यूरोप यूक्रेन को सब तरह से मदद नहीं करते तो अकेला रुस यूक्रेन को 3-4 दिन में ही हरा देता और पूरे यूक्रेन को अपनी सीमा के अंदर शामिल कर लेता। चूंकि अमेरिका, यूरोप के नेतृत्व में नाटो मिलिट्री गठबंधन की पूरी ताकत लगी हुई है, इसलिए रुस को युद्ध जीतने में बड़ी कठिनाई हो रही है। पिछले चार साल के अंदर रुस ने यूक्रेन के करीब 40% हिस्सों में कब्जा कर लिया है और वह जीता हुआ एरिया कभी-भी यूक्रेन को लौटायेगा नहीं। जैसे भारत ने 1965 और 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के जीते हुए हिस्सों को लौटा दिया था।
अब मैं मुख्य विषय पर आरहा हूं।भारत,जापान ,यूएई, इजरायल क्वाड पर यानि मिलिट्री गठबंधन विषय पर।इसी अगस्त महीने में तथाकथित मुस्लिम नाटो बना तीन मुस्लिम देशों में।इस मुस्लिम नाटो में शामिल हुए हैं सउदीअरब , पाकिस्तान और तुर्की।
इसमें सउदी अरब में काफी पैसा है। यहां के मूल वाशिंदे पैसे की अधिकता होने के कारण अय्याश हो गये हैं।ऐसे में युद्ध लड़ने की क्षमता इनमें है ही नहीं। इसलिए पिछले 40-50 सालों से साऊदी अरब में पाकिस्तान के करीब 15 हजार सैनिक भाड़े पर गये हुए हैं, वहां मुफ्त की रोटी तोड रहे हैं और पडे हुए हैं।यह एक सुन्नी मुस्लिम देश है।
तुर्की भी एक सुन्नी मुस्लिम देश है। तुर्की अपने आपको संसार में सभी सुन्नी मुस्लिम देशों का खलीफा मानता है। तुर्की अकेला मुस्लिम देश है ,जो नाटो मिलिट्री गठबंधन का सदस्य है।आज के तुर्की की एक खास बात यह है कि इसके पास ड्रोन टेक्नोलॉजी वर्ल्ड क्लास है। इन्हीं तुर्की के ड्रोनों के सहारे ओप्रेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ चार दिवसीय विफल युद्ध लडा था।
अब मैं पाकिस्तान की बात कर रहा हूं।सारी दुनिया में आतंकवादियों को पाकिस्तान एक्सपोर्ट करता है।आज दुनिया में सभी जानते हैं कि पाकिस्तान अपने मुल्क में अनगिनत आतंकवादियों के ट्रेनिंग कैंप चलाता है।
पाकिस्तान दुनिया में सबसे बड़ा भिखारी मुल्क भी है। यहां से हर साल हज के बहाने हजारों भिखारी साऊदी अरब में हवाई जहाज में भर भर कर जाते हैं और वहां दुनिया के कोने कोने से आये लाखों मुसलमानों से भीख मांगते हैं। साउदी अरब बड़ा परेशान रहता है। इसलिए उसने पाकिस्तान को सख्त आदेश दिया है कि हमारे यहां भिखारियों को मत भेजो ,वरना हम उन्हें जेलों में बंद कर देंगे और तुम्हारा हज का सालाना कोटा काफी कम कर देंगे।
कुल मिलाकर बात यह है कि अय्याश साऊदी अरब,खुद को खलीफा समझने वाला तुर्की तथा भिखारी पाकिस्तान का मुस्लिम नाटो सैन्य संगठन कोई काम का नहीं है, जमीन पर इकठ्ठा लड़ने वाले नहीं हैं।लड़ने का इनमें मादा नहीं है।
वहीं दूसरी तरफ भारत,जापान ,यूएई, इजरायल वाला क्वाड मिलिट्री गठबंधन समय की मांग है , सैद्धांतिक है और एक दूसरे की जरुरत पड़ने पर मददगार साबित होने वाले हैं सभी दृष्टिकोण से आज की विश्व राजनीति के परिप्रेक्ष्य में।
जापान के पास आधुनिक टेक्नोलॉजी है और पैसा भी है।उसे चीन बीच-बीच में आंखें दिखाता है, उत्तर कोरिया आंखें दिखाता है। जापान को इनसे बीच-बीच में पंगा लेना पडता है। दोनों कम्युनिस्ट देश हैं। अमेरिका की विश्वसनीयता खत्म हो गयी है, अतः भारत के साथ आना जापान की जरूरत और मजबूरी दोनों है।
यूएई के पास अपार धन-संपदा है,उसको भिखारी पाकिस्तान पसंद नहीं है तथा इरान अमेरिका युद्ध में यूएई ने अमेरिकी की औकात को अच्छी तरह से परख लिया है। अमेरिका की सैन्य घाटियां साउदी अरब में,यूएई में मौजूद रहने के बावजूद इरान अक्सर यहां की अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बराबर बमबारी करता रहता है और ये बेबस, लाचार होकर मूक दर्शक बने हुए हैं। इसलिए यूएई ने भारत के साथ मिलिट्री गठबंधन में शामिल होने का मन बना लिया है। ऐसे में यूएई का पैसा,जापान का पैसा और टेक्नोलॉजी तथा इजरायल की एडवांस टेक्नोलॉजी सभी एक साथ काम आयेगी भारत में।
भारत में पिछले 10-12 सालों में मिलिट्री साजो सामान की बड़ी बड़ी फैक्ट्री लगी हैं।भारत में भी टेक्नोलॉजी है। इसके अलावा भारत में युद्ध सामान बनाने की टेक्नोलॉजी भी है।भारत में प्रचुर लौह , इस्पात, एलुमिनियम इत्यादि है। स्किल्ड इंजीनियर,लेबर हैं।भारत में सस्ते मजदूर हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।
मतलब मिलिट्री साजो सामान, मिलिट्री गठबंधन को जो चाहिए वर्ल्ड क्लास सब चीजें भारत में मौजूद हैं। इसलिए इन चारों देशों में संभावित होने वाला मिलिट्री गठबंधन दुनिया में समयानुसार एक दूसरे के काम आने वाला विश्वसनीय, टिकाऊ गठबंधन होने की संभावना दिखाई देरही है।भारत को भी वर्तमान समय में इसकी काफी जरुरत है। समयानुसार भारत सेंट्रिक क्वाड सारी दुनिया के लिए भी जरूरी है।


