मणिपुरी मनोविज्ञान शोधार्थी मोइरांगथेम नेतालियो ने काठमांडू में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सांस्कृतिक पहचान और अंतर-सांस्कृतिक संबंधों पर शोध प्रस्तुत किया

दिल्ली,  मणिपुरी मनोविज्ञान शोधार्थी मोइरांगथेम नेतालियो (टोयाई) ने 6 से 8 अगस्त 2026 तक नेपाल के काठमांडू स्थित नेशनल कॉलेज में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान सम्मेलन 2026 में मणिपुर के कुकी/कुकी-ज़ो और मैतेई समुदायों के बीच सांस्कृतिक पहचान, अनुकूलन और अंतर-सांस्कृतिक संबंधों पर अपना शोध प्रस्तुत किया।

नेतालियो ने “मणिपुर में कुकी/कुकी-ज़ो और मैतेई समुदायों की सांस्कृतिक पहचान एवं अनुकूलन: पारस्परिक अंतर-सांस्कृतिक संबंध” शीर्षक से अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। सम्मेलन का मुख्य विषय “व्यवहार विज्ञान की प्रगति: एक बहुविषयक एवं अंतर-सांस्कृतिक दृष्टिकोण” था। सम्मेलन में विभिन्न विषयों एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से जुड़े शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

 

अपने शोध में नेतालियो ने मणिपुर के दोनों समुदायों के बीच सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक अनुकूलन तथा अंतर-सांस्कृतिक संबंधों के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया। शोध यह समझने का प्रयास करता है कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों में सांस्कृतिक पहचान किस प्रकार कायम रहती है तथा किस प्रकार व्यक्ति और समुदाय नई परिस्थितियों के साथ अपना सामाजिक एवं सांस्कृतिक अनुकूलन करते हैं। अध्ययन में मणिपुर के समुदायों के अनुभवों को व्यापक अंतर-सांस्कृतिक एवं अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया है।

 

काठमांडू में नेतालियो की प्रस्तुति से पहले उन्होंने अंतर-सांस्कृतिक मनोविज्ञान के अंतरराष्ट्रीय संघ के 2026 सम्मेलन में भी भाग लिया था। यह सम्मेलन 14 से 18 जुलाई 2026 तक बेल्जियम के केयू ल्यूवेन विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ था। बेल्जियम सम्मेलन में उन्होंने “एकीकरण पर पुनर्विचार: मणिपुर में मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के जातीय संघर्ष के संदर्भ में पहचान, सांस्कृतिक आत्मसातीकरण और अनुकूलन” शीर्षक से अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया था।

बेल्जियम में प्रस्तुत अध्ययन में मणिपुर में जारी संघर्ष के संदर्भ में पहचान, सांस्कृतिक आत्मसातीकरण तथा मनोवैज्ञानिक अनुकूलन के विभिन्न आयामों का अध्ययन किया गया। यह शोध बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में डॉ. शबाना बानो और डॉ. चिन्नगैहकिम गुइते के मार्गदर्शन में किया गया।

 

बीएचयू से मनोविज्ञान में हाल ही में स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी करने वाले नेतालियो वर्तमान में विश्वविद्यालय के डॉक्टरेट कार्यक्रम में प्रवेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बेल्जियम और नेपाल में अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों पर उनकी प्रस्तुतियों ने मणिपुर में पहचान, संघर्ष, अनुकूलन और अंतर-सामुदायिक संबंधों से संबंधित उनके शोध को व्यापक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विद्वत समाज के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया है।

 

नेतालियो, लोकगीतकार एवं ‘सना हेराचंद्र 2025 पुरस्कार’ से सम्मानित मोइरांगथेम इंद्रजीत मोइरांग (एम.एम. मेराबा)(राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन )और खुराजाम सुंदरी लीमा के दूसरे पुत्र हैं। उनका मूल निवास इथिग सेंद्रा चिंगखोंग, बिष्णुपुर जिला, मणिपुर है। वर्तमान में उनका परिवार उरीपोक सोरबोन थिंगेल, इम्फाल पश्चिम में निवास करता है।

अपने शोध के माध्यम से नेतालियो का उद्देश्य मणिपुर के संदर्भ में सांस्कृतिक पहचान, अंतर-सांस्कृतिक संबंधों और मनोवैज्ञानिक अनुकूलन की अकादमिक समझ को समृद्ध करना है। साथ ही, वे मणिपुर के विभिन्न समुदायों के अनुभवों को व्यापक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक विमर्श में स्थान दिलाने तथा उनके सामाजिक एवं सांस्कृतिक अनुभवों की बेहतर समझ विकसित करने की दिशा में योगदान देना चाहते हैं।

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