कटक : मुनिश्री मोहजीतकुमारजी के सान्निध्य तथा तेरापंथी सभा,कटक के तत्वावधान में Think Different Workshop के प्रथम चरण में ‘विकास की सौगात, प्रकटे नव प्रभात’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ भवन में किया गया।
नमस्कार महामंत्र समुच्चारण से शुभारम्भ कार्यशाला में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री मोहजीतकुमारजी ने कहा कि विकास के लिए संवेगों पर अंकुश, सहिष्णुता- सामंजस्य को बढ़ाना, करुणा की चेतना को जागृत कर ही सत्य के सत्व को प्राप्त किया जा सकता है।
मुनिप्रवर ने आगे कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्यों ने समय के साथ परिवर्तन करते हुए संघ को नवीन विकास के पायदानों पर बनाये रखा है।
विषय पर विशेष प्रस्तुति देते हुए
*मुनिश्री जयेशकुमार जी* ने विकास शब्द का विश्लेषण करते हुए कहा कि _वि यानि विवेक हमारे हर कार्य के साथ विवेक जुडा हो। हमारा सहयोगी, सहभागी, मित्र विवेकशील होना ही चाहिए।_ _उसकी कुछेक बाते हमे कटु लग सकती है, पर वह हमें प्रेरणा देती हैं, सद्बुद्धि देती हैं, संबोध देती हैं।_
_का यानि काल- भगवान महावीर ने कहा ‘काले कालं समायरे’ अर्थात जिस कार्य का जो समय निर्धारित है, उसी समय में वो कार्य करने पर हम निष्पत्ति को प्राप्त कर सकते हैं। काल सबसे मूल्यवान है, अतः हर क्षण का प्रायोरिटी के साथ में उपयोग करना चाहिए।_
_स यानि सकारात्मक दृष्टिकोण- हमारी एनर्जी को सही जगह संरक्षित रखना चाहिए। दूसरों को खुश करने की अपेक्षा, स्वयं अपने आप को पॉजिटिवनेस.में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। अपनी शक्ति, शांति को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाएं।_
_व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत विकास के साथ पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक व आध्यात्मिक विकास के लिए नई सोच, नये चिन्तन की अवधारणाओं को बढ़ना चाहिए। नवीनता के लिए अतीत की स्मृतियों को साथ लेकर ग्रोथ को पाया जा सकता है।_
कार्यक्रम में *तेरापंथ कन्या मंडल, कटक* की सदस्याओं ने राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रदर्शित प्ले _“ ज़िद – जो ज़हर बन गयी ”_ को कटक श्रावक समाज के सम्मुख प्रस्तुत किया।
प्रवचन में तपस्वी शुभम बांठिया ने 9 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया।

