कटक, श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, कटक के तत्वावधान में *तेरापंथ धर्मसंघ का 267 वां स्थापना दिवस तेरापंथ भवन, कटक में मुनि मोहजीत कुमार* के सान्निध्य में विशाल उपस्थिति के बीच मनाया गया।
मुनि मोहजीत कुमार ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने त्रिपदी क्रान्ति की जिसमें आचार, विचार अनुशासन के आधार पर इस धर्मसंघ को प्रस्थापित किया। उन्होंने कहा शुद्ध साधन से शुद्ध साध्य की प्रप्ति होती है।
तेरापंथ धर्मसंघ समर्पण, सेवा, वैचारिक उदारता और समन्वयशीलता का साकार रूप है। यह संघ एक आचार्य के नेतृत्व में संचालित है। इस धर्म संघ की गौरवशाली परम्परा में गुरु निष्ठा, आचार निष्ठा, मर्यादा निष्ठा, अनुशासन निष्ठा का अतीव महत्व है ।
तेरापंथ स्थापना दिवस पर अपनी प्रस्तुति देते हुए मुनि जयेश कुमार ने कहा कि आचार्य भिक्षु बॉस नहीं एक लीडर थे। वे सिर्फ आदेश नही देते थे स्वयं आदर्श स्थापित करते थे। वे आत्म जागरण, आत्म नियमन, प्रेरणा, सहानुभूति और नेतृत्व कौशल जैसे गुणों से सम्पन्न थे। उनकी मर्यादित अनुशासन शैली से ही इस धर्मसंघ में श्रद्धा, विनय और वात्सल्य की त्रिवेणी प्रवाहमान है।
तेरापंथ स्थापना दिवस का दिन गुरु पूर्णिमा के साथ भी जुड़ा हुआ है। इस संदर्भ में गुरु की महत्ता को मुनि भव्य कुमार ने प्रकट किया।
कार्यक्रम में तेरापन्थ महिला मंडल की बहनों द्वारा भिक्षु अभ्यर्थना स्वर प्रस्तुत किया गया। यह खबर हमे पुष्पा सिंघी, कटक से प्राप्त हुई।

