इ -20पेट्रोल से जनता को गुस्सा आया
मोदी ने बड़बोले गडकरी को निपटाया
नन्द किशोर जोशी
एक्जिक्यूटिव एडिटर
क्रांति ओडिशा मीडिया
आजकल पूरे भारत में बड़ी चर्चा है इ-20 पेट्रोल को लेकर। जनता भ्रमित है इ-20 पेट्रोल को लेकर। दरअसल इथानोल पेट्रोल भारत में आरंभ हुआ 2001 में वाजपेई के जमाने में।उस समय केवल 1.5% इथानोल पेट्रोल में मिलाया जाता था। आजकल 20% इथानोल पेट्रोल में मिलाया जाता है,जिसे कहते हैं इ-20 पेट्रोल।
1.5% से लेकर 20% इथानोल पेट्रोल अचानक नहीं आया। पहले इ-5% आया, फिर इ-10% आया , तत्पश्चात इ-15% आया और अब इ-20% आया है। लेकिन जब से इ20% पेट्रोल आया है,तब से भारत में इसे लेकर ग्राहकों में काफी असंतोष फैला है। असंतोष फैलाने में विरोधियों के साथ साथ मीडिया की भी काफी बड़ी भूमिका रही है।
सर्वोपरि इ-20% पेट्रोल को लेकर भारत सरकार की सफाई अब आयी है। इसमें सरकार की तरफ से स्वीकारा गया है कि इ-20 पेट्रोल के व्यवहार से गाड़ियों में 5% तक माइलेज कम होता है। इ-20 पेट्रोल के अनेक फायदे सरकार ने गिनाए हैं, इंजिन की लाइफ को लेकर इत्यादि। सरकार का इ-20 पेट्रोल को लेकर स्पष्टीकरण बहुत देर से आया है,जब गंगा में बहुत पानी बह गया है।
मोदी सरकार 2014 में आयी थी।नोट बंदी मोदी 2016 में लाये थे। मोदी शासन में आते ही पूरे भारत में सभी आम लोगों के बैंकों में 0 बेलेंस जन-धन एकाउंट खुल वाये।मोदी ने नोट बंदी के दो साल पहले आम लोगों के 0 बेलेंस जन-धन एकाउंट खुलवाये , इसलिए कि नोट बंदी में आम लोगों को कोई दिक्कत नहीं हो। उपरोक्त नोट बंदी कार्यक्रम योजना बद्ध तरीके से किया गया था। इसके सुखद परिणाम भारत को ,भारत के आम लोगों को मिला।
अब सवाल यह उठता है कि इ-20 पेट्रोल के समय सरकार योजना बद्ध तरीके से काम क्यों नहीं की। क्यों नहीं सरकार ने एक दो साल पहले से ही इ-20 पेट्रोल के फायदे लोगों को बताये,जो आज बताये हैं।
यहां साफ साफ मालूम होता है कि मोदी ने जानबूझकर इ-20 पेट्रोल पर चुप्पी बनाए रखी। बड़बोले गडकरी ने बढ़-चढ़कर इ-20 पेट्रोल पर भाषण बाजी जारी रखी। मोदी की विश्वसनीयता लोगों में गहरी है,जो गडकरी की नहीं है।
यहां साफ करना चाहता हूं कि इथानोल , पेट्रोल दोनों ही गडकरी के मंत्रालय के अंतर्गत नहीं आते हैं। पेट्रोल मंत्री हैं हरदीप सिंह पुरी और कृषि मंत्री हैं शिवराज सिंह चौहान। गडकरी परिवहन,सड़क विभाग के मंत्री हैं, लेकिन बयान बहादुर गडकरी रोज इस पर लोगों के लिए मीडिया में बयान जारी करते थे ,इधर उधर की बातें करते थे । मजेदार बात यह है कि दोनों संबंधित विभाग के मंत्री प्रायः इसपर मौन ही साधे हुए थे।
बीच-बीच में पिछले कई सालों से मीडिया में खबरें आ रही थी कि गडकरी मोदी को हटाकर खुद प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।एक तो गडकरी का बड़बोलापन और दूसरा गुपचुप तरीके से मोदी हटाओ अभियान में सक्रिय भूमिका रहने के कारण मोदी भी गडकरी से पिछले कई महीनों से नाराज़ चल रहे थे। इसलिए इ-20 पेट्रोल मोदी के लिए अच्छा मौका था , गडकरी को औकात दिखाने का ,उसे राजनीतिक तौर तरीके से निपटाने का ,सो मोदी ने किया और बड़बोले गडकरी की भारत की जनता के बीच किरकिरी हुई।


