करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है
मेरा राम की कृपा से सब काम हो रहा है
आज इंद्रेश जी द्वारा बोली गई रुक्मिणी विवाह प्रसंग में भक्तों ने खूब गाया, खूब नाचा
कटक सनसाईन फिल्ड में गुप्ता परिवार, एसजिबिएल ग्रुप द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा यज्ञ में आज छठा दिवस रहा।आज भयंकर गर्मी रहने के बावजूद पंडाल में भयंकर भीड़ भक्तों की देखने को मिली। भक्तों में एक और खास बात यह रही कि पंडाल में उपस्थित सारे भक्त रुक्मिणी विवाह उपलक्ष्य में सज-धज कर आये थे।
भक्तों का उत्साह, उमंग सातवें आसमान पर था। विवाह उपलक्ष्य में जैसे खुशी से नाच गाना होता है यहां प्रभु श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह उपलक्ष्य में उससे कहीं ज्यादा देखने को मिला।क्या बूढ़े ,क्या जवान और क्या आजकल की जेन जी सभी जैसे एक लय से ,एक धुन में मस्त होकर,मगन होकर प्रभु की रुक्मिणी संग विवाह उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में शामिल हुए,ऐसे भक्तिमय अंदाज में नाच कूद रहे थे।
आज व्यासपीठ पर विराजमान महाप्रभु जगन्नाथ,बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा, सुदर्शन जी दर्शन दिए सोना वेश में।आज जजमान सज्जन गुप्ता दंपती ने श्रीमद्भागवत महापुराण की पूजा अर्चना की हर दिन की तरह सपरिवार।आज विशिष्ट जनों में पंडाल में पधारे थे श्री नृसिंह महापात्र जी ,सेवायत श्री जगन्नाथ मंदिर, प्रोफेसर श्रीमती रजिता कुलकर्णीण, प्रेसिडेंट श्रीश्री यूनिवर्सिटी, वैष्णोदेवी मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुदर्शन जी।
इनके अलावा मंच पर गौरवमय उपस्थिति रही श्रीकृष्ण चंद्र जी शास्त्री (ठाकुरजी) की। ठाकुरजी आज के व्यासपीठ पर विराजमान इंद्रेश जी महाराज के गुरु भी हैं और पिता भी हैं।
आज ही के दिन श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी में रुक्मिणी विवाह था , ठीक उसी समय कटक सनसाईन फिल्ड में भी रुक्मिणी विवाह प्रसंग था। दोनों जगह एक ही दिन एक ही समय , अद्भुत, विलक्षण, बेमिसाल संजोग रहा सभी सनातनियों के लिए।
व्यासपीठ पर विराजमान इंद्रेश जी महाराज बोले कि अपनी वाणी को,कंठ को जगन्नाथ जी की सेवा में लगाओ।आप मेहनत करें और ठाकुरजी पर छोड़ दें सब अच्छा ही होगा। प्रसन्नता होना आवश्यक है जीवनभर। श्रीमद्भागवत कथा में आने से जीवन में बदलाव अवश्य ही आयेगा।
आज रुक्मिणी विवाह उपलक्ष्य में सारे भक्तों ने एक सुर में पूरे जोश से गाया कि करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है,मेरा राम की कृपा से सब काम हो रहा है। इसके अलावा रोज का एवरग्रीन सोंग जगन्नाथ, जगन्नाथ,चकानयन नीलांचल वाले,तू न संभाले तो हमें कौन संभाले की जबरदस्त धूम रही।

