नन्द के आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की पार्ट 2 -धर्म में दया नहीं है तो धर्म आपकी रक्षा नहीं करेगा , रावण के पास धर्म था, लेकिन दया नहीं थी-इंद्रेशजी के प्रवचन से 

 

अब सनसाईन फिल्ड में श्रीमद्भागवत कथा महापुराण यज्ञ अपनी फूल फोर्म में आगया है। दिनों दिन भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।भीड़ इतनी जबरदस्त है कि इसका आकलन करना सहज नहीं है।पूरी सनसाईन फिल्ड का अंदरूनी भाग एकदम भक्ति मय होरखा है,भक्ति रस में डूबा हुआ है।

भीतर -बाहर देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि क्या कोई बालियात्रा यहां चल रहा है।अंदर पंडाल में तो मानो पग रखने की जगह भी नहीं है।सारे भक्त गण पूरी तरह से कान्हा की भक्ति रस में डूबे हुए हैं।कल जब नन्द के आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की जोरदार भजन चल रहा था ,उस समय का नजारा देखने लायक था । अनेक भक्तों की आंखों में ख़ुशी के मारे अश्रु धारा बह गयी।सभी भक्त कभी पंडाल में विराजमान जगन्नाथ जी को निहारते थे तो कभी आस पास में घूम रहे रंग बिरंगे लडुगोपालों को निहार रहे थे।

 

कथा प्रसंग में इंद्रेश जी महाराज ने बोला कि धर्म में अगर दया नहीं है तो धर्म आपकी रक्षा नहीं करेगा।धर्मो रक्षति रक्षित:। रावण के पास धर्म था, लेकिन दया नहीं थी। ठाकुरजी दयालु लोगों को पसंद करते हैं।

राम के बल में दया है,रावण के बल में दया नहीं है।पांडव पुत्रों के पंच गुणों में दया थी,दया धर्म का मूल है।अपने अंदर के गुण में दया का संपुट लगाओ। परीक्षित बहुत कम उम्र में राजा बन गये थे। धर्म के चार चरण हैं। पवित्रता,दान ,दया ,इन तीनों के पैर कट चुके हैं कलयुग में। विचारों की , बौद्धिक अपवित्रता बहुत खराब है।पर निंदा सुनते ही कान बंद कर लें।

पवित्रता कलयुग में नहीं है, केवल दिखावा है।धर्म का एक पैर कटा हुआ है। आजकल गिने-चुने लोग दान धर्म करते हैं।दान कभी देकर अपनों का नाम कहीं दिखाना ,लिखाना नहीं चाहिए।दान में गुप्त दान सर्वोत्तम है। कलयुग में केवल सत्य बचा है और धीरे-धीरे यह भी कट रहा है।

कलयुग पांच स्थानों पर है। कलयुग का प्रथम स्थान जुआ है।जुआ का मतलब धनलक्ष्मी को कहीं दांव पर लगाना। इससे लक्ष्मी पति नारायण नाराज हो जाते हैं। दूसरा स्थान कलयुग का है मदिरा।बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू इसी श्रेणी में आते हैं। महादेव ने विष पीया था,कोई लेकर देखना चाहते हो तो,देख लो। तामसिक वस्तु देवता को अर्पण नहीं होती।

तीसरा स्थान कलयुग का है परस्त्री गमन,पर स्त्री ,पर पुरुष के प्रति झुकाव।सभी को पति व्रत , पत्नी व्रत धारण करना चाहिए। चौथा स्थान है नजर।आदमी को अपनी नज़र में अच्छा रहना चाहिए, दूसरों की नजर में नहीं। पांचवां स्थान है कलयुग का बिना मेहनत के कमाया हुआ धन। दूसरों की कमायी पर कभी बुरी नजर नहीं डालनी चाहिए।आदमी को अपनी कमाई पर ही आस रखनी चाहिए।

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