सततता के क्षेत्र में सहयोग पर भारत–कोरिया गणराज्य का संयुक्त वक्तव्य

भारत गणराज्य और कोरिया गणराज्य, जिन्हें आगे “दोनों पक्ष” कहा गया है, ने जलवायु परिवर्तन, समुद्री तथा आर्कटिक मुद्दों में व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से वैश्विक सततता संबंधी चुनौतियों से निपटने हेतु द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की।

पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी राष्ट्रों के रूप में, दोनों पक्षों ने पर्यावरण से संबंधित सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा को समग्र रूप से प्राप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु, दोनों पक्षों ने भूमि, वायु, जल, जैव विविधता तथा अपशिष्ट सहित प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन के साथ-साथ पर्यावरणीय मुद्दों एवं जलवायु परिवर्तन पर सहयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया।

जलवायु परिवर्तन पर सहयोग

नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपने समर्थन और पेरिस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, दोनों पक्षों ने इस बात को स्वीकार किया कि मानवता और प्रकृति की सततता को खतरे में डालने वाले अभूतपूर्व जलवायु संकट से निपटने के लिए जलवायु कार्रवाई को सुदृढ़ करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस संदर्भ में, दोनों पक्षों ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत एक सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के संपन्न होने का स्वागत किया, जो निवेश-आधारित शमन परियोजनाओं के लिए एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करता है, उनके-अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसीज़) की प्राप्ति को आगे बढ़ाता है तथा जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में उनकी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है। दोनों पक्ष कार्बन बाजार, अनुच्छेद 6.2 सहयोगात्मक दृष्टिकोण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों सहित जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देंगे।

पर्यावरणीय सहयोग और सतत विकास

पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी राष्ट्रों के रूप में, भारत और कोरिया गणराज्य ने जलवायु और पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। भारतीय पक्ष ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) में कोरिया गणराज्य के सदस्य के रूप में शामिल होने का स्वागत किया। कोरियाई पक्ष ने वैश्विक हरित विकास संस्थान (जीजीजीआई) में भारत के सदस्य बनने का स्वागत किया।

महासागर और समुद्री सततता

आर्थिक विकास, पारिस्थितिक संतुलन और खाद्य सुरक्षा के लिए महासागरों के महत्व को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्षों ने समुद्री विज्ञान, सतत मत्स्य पालन, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण तथा समुद्री प्रदूषण की रोकथाम में सहयोग के विस्तार पर सहमति व्यक्त की।

दोनों पक्ष ब्लू इकोनॉमी में सहयोग को सुदृढ़ करेंगे तथा दोनों देशों के वैज्ञानिक संस्थानों और समुद्री एजेंसियों के बीच निकट आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे।

आर्कटिक अनुसंधान और ध्रुवीय सहयोग

भारत और कोरिया गणराज्य ने आर्कटिक अनुसंधान और वैज्ञानिक सहयोग में अपनी बढ़ती भागीदारी का उल्लेख किया। दोनों पक्षों ने जलवायु परिवर्तन की समझ को आगे बढ़ाने में आर्कटिक के महत्व को स्वीकार किया तथा आर्कटिक विज्ञान और आर्कटिक नौवहन सहित इस क्षेत्र में सहयोग के विस्तार पर सहमति व्यक्त की।

दोनों पक्ष अपने-अपने आर्कटिक अनुसंधान संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग को बढ़ावा देंगे और संयुक्त अनुसंधान पहल, वैज्ञानिक आदान-प्रदान तथा अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय अनुसंधान कार्यक्रमों में भागीदारी के अवसरों का अन्वेषण करेंगे।

भावी दिशा

दोनों पक्षों ने सतत विकास और जलवायु कार्रवाई में योगदान देने वाले व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत और कोरिया गणराज्य ने विश्वास व्यक्त किया कि इस संयुक्त वक्तव्य में उल्लिखित विस्तारित सहयोग नवाचारी एवं विस्तार योग्य समाधानों के विकास में योगदान देगा, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र तथा उससे आगे सतत विकास को समर्थन प्रदान कर सकते हैं।

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