नामकुम सैन्य अस्पताल में चार दिवसीय शल्य चिकित्सा अभियान के माध्यम से 320 से अधिक नागरिकों की आंखों की रोशनी लौटी

भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की एक विशेष नेत्र चिकित्सा टीम ने 15 से 19 जून 2026 के बीच रांची के नामकुम स्थित सैन्य अस्पताल में  ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के तहत 9वें मेगा मेगा नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया।

इस शिविर के दौरान 2,500 से अधिक मरीजों की जांच की गई और आंखों की रोशनी लौटाने वाली 300 से अधिक सर्जिकल प्रक्रियाएं की गईं, जिनमें 260 से अधिक मोतियाबिंद के ऑपरेशन शामिल थे। इनमें से 100 से अधिक वंचित आदिवासी मरीजों को लाभ मिला। इस शिविर में एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी (एमआईजीएस), डायबिटिक रेटिनोपैथी का शल्य उपचार और आंखों की रोशनी बचाने वाले एंटी-वीईजीएफ इंजेक्शन भी प्रदान किए गए।

समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने ऑपरेशन दृष्टि की टीम के समर्पण और पेशेवर दक्षता की सराहना की। उन्होंने इस पहल को “सेवा परमो धर्मः” के संकल्प का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का माध्यम नहीं है, बल्कि सेना चिकित्सा कोर की असाधारण दक्षता, प्रतिबद्धता और विशेषज्ञता का भी प्रदर्शन है। ऑपरेशन दृष्टि की शुरुआत से अब तक के प्रभाव का उल्लेख करते हुए रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि देशभर में 75,000 से अधिक मरीजों की जांच की जा चुकी है और 3,000 से अधिक दृष्टि बहाल करने वाली सर्जरी की जा चुकी हैं।

बिहार रेजिमेंट के दिवंगत पूर्व हवलदार जॉन ऑगस्टस एक्का की 68 वर्षीय विधवा श्रीमती एक्का अपनी दाहिनी आंख में मोतियाबिंद की समस्या के साथ कैंप में आई थीं, जिसकी वजह से उनकी आंखों की रोशनी काफी कम हो गई थी। एक सफल फेकोइमल्सीफिकेशन और इंट्राओकुलर लेंस प्रत्यारोपण प्रक्रिया के माध्यम से उनकी आंखों की रोशनी वापस आ गई, जिससे पूर्व सैनिकों के परिवारों के कल्याण के प्रति सेना की प्रतिबद्धता एक बार फिर सिद्ध हुई।

एक अन्य लाभार्थी, रांची की रहने वाली 63 वर्षीय एलिजा बेथ, जो एक आदिवासी निवासी हैं और जिनका कोई सैन्य संबंध नहीं है, उनकी भी दाहिनी आंख के मोतियाबिंद का फेकोइमल्सीफिकेशन प्रक्रिया के माध्यम से सफल इलाज किया गया। उनके लिए उन्नत नेत्र चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच ऑपरेशन दृष्टि के माध्यम से संभव हो सकी।

इसी तरह, झारखंड के एक 50 वर्षीय आदिवासी निवासी अशोक देशमुख का भी इस कार्यक्रम के तहत सफल मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ। कोई सैन्य पात्रता न होने के बावजूद, उन्हें सेवारत कर्मियों और पूर्व सैनिकों के समान ही उन्नत चिकित्सा देखभाल का स्तर प्राप्त हुआ, जो इस पहल की समावेशी भावना को दर्शाता है।

इस कैंप का उद्घाटन 15 जून, 2026 को महानिदेशक सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (DGAFMS) वाइस एडमिरल आरती सरीन द्वारा किया गया था, जिनकी दूरदृष्टि ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के देशव्यापी आउटरीच प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहायक रही है। समापन समारोह में 17 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल यश सिंह अहलावत, पूर्वी कमान मुख्यालय के एमजी मेड मेजर जनरल ज्योतिंदु देवनाथ और अन्य वरिष्ठ गणमान्य लोग शामिल हुए। शल्य चिकित्सा अभियान का नेतृत्व दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा ने किया।

दिसंबर 2024 में देहरादून में अपने पहले संस्करण के बाद से, ‘ऑपरेशन दृष्टि’ का विस्तार देश भर में जयपुर, बागडोगरा, उधमपुर, लक्षद्वीप, भुज, गोरखपुर और लेह-लद्दाख में कैंपों के माध्यम से हुआ है। रांची इसके नौवें आयोजन स्थल के रूप में जुड़ गया है और यह पहल भारत के सबसे बड़े सतत सैन्य चिकित्सा जन-सेवा कार्यक्रमों में से एक के रूप में स्थापित हो चुकी है।

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