भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारत और यूनाइटेड किंगडम ने आज घोषणा की कि व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से लागू होगा, जो देश की आर्थिक कूटनीति में एक नए दौर की शुरुआत करेगा। साथ ही, सामाजिक सुरक्षा समझौता-जिसे डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) भी कहा जाता है-वह भी 15 जुलाई 2026 से लागू होगा, जिससे यूनाइटेड किंगडम में भारतीय पेशेवरों की आवाजाही और प्रतिस्पर्धात्मता को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, डीसीसी के तहत छूट की अवधि को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है, जिससे भारत के अस्थायी कर्मचारियों को बड़ा फ़ायदा होगा।
दोनों सरकारों द्वारा आंतरिक प्रक्रियाओं और मंजूरी की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद, ये समझौते 15 जुलाई 2026 से औपचारिक रूप से लागू हो जाएंगे। “विकसित भारत 2047” के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप, यह अहम कदम एक बहुत ही आधुनिक और संतुलित आर्थिक ढांचा तैयार करेगा, जो एक बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ नीति को रोजमर्रा के सक्रिय व्यापार में बदल देगा।
इस ऐतिहासिक समझौते की नींव मई 2021 में ‘ बेहतर व्यापार साझेदारी’ (एनहैंस्ड ट्रेड पार्टनरशिप) और ‘भारत-यूके रोडमैप 2030’ को अपनाकर रखी गई थी। इस रोडमैप का लक्ष्य द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाना और 2030 तक व्यापार को दोगुना करके 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना था।
बातचीत के 14 गहन चरणों के बाद, 6 मई 2025 को सीईटीए को अंतिम रूप दिया गया। इस समझौते पर आधिकारिक रूप से 24 जुलाई 2025 को लंदन में भारत के केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और यूके के व्यापार और उद्योग मंत्री श्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए। इस ढांचे को पूरा करने के लिए, बाद में 10 फरवरी 2026 को इससे जुड़े ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (डीसीसी) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते को आर्थिक कूटनीति की जीत बताते हुए, भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा:
“15 जुलाई 2026 को सीईटीए और ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ के एक साथ लागू होने से भारत के एक्सपोर्ट के लिए नए और बड़े मौके खुलेंगे। हमारे 99% टैरिफ लाइनों पर तुरंत ड्यूटी-फ्री एक्सेस हासिल करके, हमने लंबे समय से चली आ रही टैरिफ की बाधाओं को व्यवस्थित रूप से खत्म कर दिया है। इससे प्रतिस्पर्धा करने का माहौल बराबरी का हो जाएगा, जिससे हमारे वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र बिना किसी नुकसान के मुकाबला कर सकेंगे और अपने विश्व स्तरीय उप्तादों की आपूर्ति कर सकेंगे।
सबसे अहम बात यह है कि यह ढांचा पूरी तरह से आर्थिक सुरक्षा पर टिका है; आयात में होने वाले उतार-चढ़ाव से हमारी संवेदनशील कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बचाने के लिए सख्त बहिष्करण/एक्सक्लूजन सूची (बाहर रखने वाली सूची) का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही, अपने पेशेवरों को दोहरे बीमा योगदान से छूट देकर हम अपने टैलेंट पूल के वित्तीय हितों की रक्षा कर रहे हैं। यह दोहरी कामयाबी घरेलू संवेदनशीलता की मजबूती से रक्षा करते हुए हमारे वैश्विक व्यापारिक दायरे को तेजी से बढ़ाती है।”
अगली पीढ़ी का व्यापार ढांचा
30 अध्यायों वाला सीईटीए, अगली पीढ़ी के व्यापार समझौतों के लिए एक नया मॉडल बनाता है, जो सीधे तौर पर भारत के “विकसित भारत 2047” के विजन का समर्थन करता है। पारंपरिक रूप से टैरिफ कम करने के अलावा, यह समझौता पारंपरिक सामान और सेवाओं को डिजिटल व्यापार, दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं, बौद्धिक संपदा और-पहली बार द्विपक्षीय स्तर पर-सरकारी खरीद जैसे आधुनिक क्षेत्रों के साथ जोड़कर आपसी सहयोग को आधुनिक बनाता है। इसमें समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए नवाचार, एसएमई, स्थायित्व और पारदर्शिता पर भविष्य-उन्मुख अध्याय भी शामिल हैं। कुल मिलाकर, इस ढांचे को महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने, तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने और भारत की भविष्य की आर्थिक कूटनीति के लिए एक पारदर्शी और नियमों पर आधारित मानक स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
मुख्य आर्थिक लाभ
व्यापक आर्थिक व्यापार समझौता (सीईटीए) और साथ ही डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) के लागू होने से भारत के वैश्विक व्यापार ढांचे में एक बड़ा बदलाव आएगा। यह व्यापक ढांचा भारत की विनिर्माण क्षमता, सेवा क्षमता और जमीनी स्तर के उत्पादन का इस्तेमाल सीधे दुनिया के प्रमुख उपभोक्ता बाजार में से एक में करेगा।
- भारतीय निर्यात के लिए बाजार तक परिवर्तनकारी पहुंच
इसके लागू होने से, भारतीय निर्यातकों को कई प्रमुख क्षेत्रों में यूके के टैरिफ पूरी तरह खत्म होने का फायदा मिलेगा। प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर 70% तक, समुद्री उत्पादों पर 21.5% तक, इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स पर 18% तक, चमड़े और फुटवियर उत्पादों पर 16% तक, टेक्सटाइल और कपड़ों पर 12% तक, और केमिकल और फार्मास्युटिकल उत्पादों पर 8% तक के टैरिफ़ को घटाकर जीरो कर दिया जाएगा। सीईटीए के तहत मिली तुरंत ड्यूटी-फ़्री पहुंच से यूके के बाजार में भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता काफी बढ़ने की उम्मीद है। इससे किसानों, मछुआरों, मजदूरों, एमएसएमई और विनिर्माताओं के लिए नए मौके पैदा होंगे और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भागीदारी मजबूत होगी।
ड्यूटी-फ्री सुविधा का यह तुरंत मिलने वाला लाभ भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को कीमतों के मामले में बहुत मजबूत बनाता है। इससे पारंपरिक कारीगर, बड़े कारखाने और क्षेत्रीय औद्योगिक केंद्र, लागू होने के पहले दिन से ही पूरी तरह से अपनी काबिलियत के दम पर मुकाबला कर पाते हैं।
साथ ही, भारत ने डेयरी उत्पादों, अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), खाद्य तेल, तिलहन, सेब और कई तरह की सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है।
- अहम सेवा पैकेज और आवाजाही (मोबिलिटी) से जुड़े प्रावधान
यूके ने अब तक का अपनी सबसे व्यापक सेवाओं की प्रतिबद्धता जाहिर की है, जिसमें भारत के लिए निर्यात के लिहाज से अहम सभी बड़े सेवा क्षेत्र और 137 उप-क्षेत्र शामिल हैं।
आईटी और आईटी-सक्षम सेवा, वित्तीय सेवा, पेशेवर सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा, इंजीनियरिंग, दूरसंचार और परामर्श सेवा देने वाले भारतीय सेवा प्रदाताओं को बेहतर बाजार पहुंच और ज्यादा नियामकीय निश्चितता का फायदा मिलेगा।
यह समझौता इनके लिए आवाजाही के निश्चित रास्ते भी उपलब्ध कराता है:
- बिजनेस विजिटर
- इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफरी
- कॉन्ट्रैक्टुअल सेवा आपूर्तिकर्ता
- स्वतंत्र पेशेवर
- निवेशक
अपनी तरह की पहली व्यवस्था के तहत, इस समझौते के अंतर्गत हर साल 1,800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक और शास्त्रीय संगीतकार आवाजाही के खास मौकों का लाभ उठा सकेंगे।
- सामाजिक सुरक्षा पर समझौता: एक बड़ी कामयाबी
सामाजिक सुरक्षा पर समझौता, जो मुख्य समझौते के साथ ही लागू हो रहा है, भारतीय कर्मचारियों और नियोक्ताओं को यूनाइटेड किंगडम में अस्थायी काम के दौरान दोहरी सामाजिक सुरक्षा का योगदान करने से छूट देता है। छूट की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है।
इससे 75,000 से ज्यादा भारतीय पेशेवरों और 900 से ज्यादा कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है। यह समझौता अस्थायी रूप से विदेश में काम करने वाले कर्मचारियों की आवाजाही और उन्हें लगातार सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिलने में मदद करेगा। इससे सेवा क्षेत्र में भारत-यूके की साझेदारी मजबूत होगी और दोनों देशों के उच्च कौशल और इनोवेटिव सेवा क्षेत्र का लाभ उठाया जा सकेगा।
- इस्पात निर्यातकों के हितों की सुरक्षा
भारत-यूके व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईटीए) के तहत आपसी सहयोग की ताकत दिखाते हुए, भारत और यूनाइटेड किंगडम ने द्विपक्षीय इस्पात/स्टील व्यापार को सुरक्षित करने और उसे बढ़ावा देने के लिए एक अहम सहमति बनाई है। 1 जुलाई, 2026 से लागू होने वाले यूके के आगामी इस्पात उपायों पर रचनात्मक बातचीत के बाद, दोनों पक्ष व्यावसायिक हितों की रक्षा करने, बाज़ार में रुकावटों को कम करने और निर्यातकों के लिए कुल मिलाकर संतुलित और स्थिर व्यापारिक माहौल सुनिश्चित करने पर सहमत हुए।
भारत का 85% निर्यात इस्पात उपायों के दायरे से बाहर है। इस्पात उपायों के तहत, सीएसक्यू, बचा हुआ कोटा और अधिकृत उपयोग योजना/ऑथराइज्ड यूज स्कीम (एयूएस) के तहत पहुंच के मिश्रण के जरिए भारत के हितों की रक्षा की गई है।
लोगों पर केंद्रित व्यापार समझौता
भारत-यूके सीईटीए को लोगों पर केंद्रित समझौते के तौर पर तैयार किया गया है, जिससे समाज के सभी वर्गों को फायदा होगा।
किसानों को प्रीमियम निर्यात बाजार तक पहुंच मिलेगी। मछुआरों को सीफूड के बढ़ते निर्यात से फायदा होगा। मजदूरों को ज्यादा श्रम वाले क्षेत्र में रोजगार के नए मौके मिलेंगे। महिला उद्यमियों, युवाओं, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखला तक बेहतर पहुंच मिलेगी। पेशेवरों को ज्यादा आवाजाही और पहचान के मौकों का फायदा होगा।
15 जुलाई 2026 से भारत-यूके सीईटीए और डीसीसी को लागू करना, भारत के लिए एक वैश्विक स्तर पर जुड़ी, मजबूत और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह भारत और यूनाइटेड किंगडम की अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और अपने लोगों के लिए समृद्धि लाने की साझा प्रतिबद्धता को भी दिखाता है।
यह ऐतिहासिक आर्थिक ढांचा दोनों देशों को आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य की जटिलताओं से निपटने के लिए प्रभावी ढंग से तैयार करता है, साथ ही भारत की समावेशी, समृद्ध और आत्मनिर्भर “विकसित भारत 2047” की ओर बढ़ने की गति को हमेशा के लिए तेज करता है।

