भारत-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030

17 फरवरी 2026 को, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किया था। उन्होंने संयुक्त रूप से ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ का उद्घाटन किया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक व साइबर स्पेस, स्वास्थ्य, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, शैक्षिक संबंधों और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव जैसे क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक और विविधतापूर्ण बनाने का आह्वान किया।

‘होराइजन 2047 रोडमैप’ और दोनों देशों की साझा नवाचार यात्रा को आधार बनाते हुए, भारत और फ्रांस ने नवाचार को आर्थिक मजबूती, सतत विकास, रणनीतिक स्वायत्तता तथा तकनीकी और औद्योगिक संप्रभुता के प्रमुख आधार के रूप में मान्यता दी है। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि एक मजबूत नवाचार साझेदारी दोनों देशों की पूर्ण नवाचार क्षमताओं का लाभ उठाने में मदद करेगी और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में योगदान देगी।

दोनों पक्षों ने इस बात को रेखांकित किया है कि भारत का ‘विकसित भारत 2047’ का दृष्टिकोण और ‘फ्रांस 2030’ के अंतर्गत फ्रांस की महत्वाकांक्षाएँ भविष्योन्मुखी नवाचार साझेदारी के निर्माण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं, जो अग्रणी नवाचारों में निवेश के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इसलिए, भारत और फ्रांस ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030’ को एक ऐसे फ्रेमवर्क के रूप में अपना रहे हैं जो महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में मिलकर विकास को आगे बढ़ाने, विश्वसनीय टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने, अकादमिक और अनुसंधान आदान-प्रदान को बढ़ाने तथा लोगों, विश्व और साझा समृद्धि के लिए ठोस परिणाम देने की दिशा में उनके सहयोगात्मक प्रयासों का मार्गदर्शन करेगा।

इस रोडमैप में निम्नलिखित मुख्य तत्व शामिल हैं:

I. ‘विश्वसनीय एआई’ के लिए साझेदारी, नवाचार साझेदारी का एक मुख्य स्तंभ: फरवरी 2025 की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारत-फ्रांस घोषणा और क्रमशः 2025 तथा 2026 में फ्रांस और भारत द्वारा आयोजित ‘एआई एक्शन एंड इम्पैक्ट समिट्स’ को आधार बनाते हुए, दोनों देश ‘विश्वसनीय एआई’ को अपनी नवाचार साझेदारी का एक मुख्य स्तंभ बनाने पर सहमत हुए हैं।

  • सुरक्षित, संरक्षित और विश्वसनीय एआई प्रणाली: दोनों पक्ष ऐसी सुरक्षित, संरक्षित और विश्वसनीय एआई प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के अनुरूप हों, भेदभाव तथा दुष्प्रचार के प्रसार को रोकें, और ‘सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा’ का समर्थन करें। वे एआई गवर्नेंस के लिए इंटरऑपरेबल और जोखिम-आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने हेतु नियामकों, मानक निकायों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करेंगे—जिसमें फ्रंटियर और जनरेटिव मॉडल भी शामिल हैं—साथ ही यह सुनिश्चित करेंगे कि नवाचार और राष्ट्रीय विकास बाधित न हो।
  • एआई साझेदारी की प्राथमिकता के रूप में ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर सहयोग: डिजिटल परिवेश में एआई-सक्षम सेवाओं से संवेदनशील वर्गों, विशेषकर बच्चों के लिए उत्पन्न होने वाले गंभीर जोखिमों को स्वीकार करते हुए, भारत और फ्रांस अपनी एआई साझेदारी की प्राथमिकता के रूप में ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर सहयोग को और गहरा करने पर सहमत हैं। ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में गठित एआई और बाल सुरक्षा पर विशेषज्ञ सहभागिता समूह तथा ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर भारत के उभरते टेक्नो-लीगल फ्रेमवर्क को आधार बनाते हुए, दोनों पक्ष अपनी चल रही पहलों के बीच ठोस तालमेल विकसित करेंगे। इसमें प्राइवेसी-प्रिजर्विंग एज एश्योरेंस (उम्र की पुष्टि करते समय प्राइवेसी का ध्यान रखना), सेफ्टी-बाय-डिजाइन आर्किटेक्चर और उन एआई प्रणालियों के लिए परिणाम-आधारित सुरक्षा मानक शामिल होंगे जो बच्चों के साथ प्रत्यक्ष रूप से इंटरैक्ट करती हैं।
  • प्राइवेसी का ध्यान रखने वाले डेटा शेयरिंग फ्रेमवर्क की अहमियत: भारत और फ्रांस मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हुए एआई और डेटा-संचालित नवाचार की पूर्ण क्षमता को अनलॉक करने के लिए प्राइवेसी का ध्यान रखने वाले डेटा शेयरिंग फ्रेमवर्क की अहमियत को मान्यता देते हैं। भारत का ‘डेटा एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर’ (डीईपीए) और विश्वसनीय डेटा स्पेस तथा भरोसेमंद डेटा प्लेटफॉर्म पर फ्रांस का कार्य, पूरक शक्तियाँ प्रदान करते हैं, जो अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक सेवाओं के लिए सुरक्षित तथा सहमति-आधारित डेटा के आदान-प्रदान में मदद कर सकते हैं।

II. अकादमिक आदान-प्रदान के माध्यम से जन-संपर्क सहयोग को बढ़ावा देना: ‘होराइजन 2047’ फ्रेमवर्क के तहत साझा उद्देश्यों के अनुरूप, दोनों पक्ष इस बात को स्वीकार करते हैं कि एसटीईएम शिक्षा, अनुसंधान साझेदारी, प्रतिभाओं का आदान-प्रदान और संस्थागत सहयोग, भविष्य की पीढ़ियों को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस संबंध में, दोनों पक्ष 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों का स्वागत करने के फ्रांस के लक्ष्य के महत्व को स्वीकार करते हैं और द्विपक्षीय साझेदारी की नींव के रूप में लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। इस संदर्भ में, दोनों पक्ष निम्नलिखित पहलों का स्वागत करते हैं:

  • शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (एमआरक्यू): दीर्घकालिक नवाचार साझेदारी को बनाए रखने में लोगों की आवाजाही और एकेडमिक इंटीग्रेशन की केंद्रीय भूमिका को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्ष उच्च शिक्षा और पेशेवर योग्यताओं के लिए पारस्परिक मान्यता व्यवस्था को मजबूत करने के महत्व को दोहराते हैं। यह स्मरण करते हुए कि फ्रांस 2018 में भारत के साथ शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (एमआरक्यू) समझौते को संपन्न करने वाला पहला देश बना था, दोनों पक्ष एक विस्तारित और अपडेटेड फ्रेमवर्क की दिशा में काम करने के अपने इरादे को व्यक्त करते हैं, जिसमें एकेडमिक विषयों, रेगुलेटेड प्रोफेशन और उभरते टेक्नोलॉजी क्षेत्रों की एक व्यापक श्रेणी शामिल होगी। इस प्रकार का सहयोग अधिक शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, डुअल-डिग्री प्रोग्राम और डॉक्टरेट को-सुपरविज़न की व्यवस्था को सुगम बनाएगा तथा भारत और फ्रांस के बीच दीर्घकालिक प्रतिभा और ज्ञान साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
  • इसके अतिरिक्त, भारत और फ्रांस के कई संस्थानों ने उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान सहयोग के माध्यम से अकादमिक जुड़ाव को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने के लिए सहमति व्यक्त की है [समझौता ज्ञापनों की सूची अनुलग्नक में संलग्न है]।

III. उद्योग-अकादमिक संबंधों के माध्यम से तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार-संचालित विकास के लिए साझेदारी: दोनों देश इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकारों, उद्योगों, स्टार्टअप्स, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच निकट सहयोग, नवाचार-संचालित विकास को बढ़ावा देने तथा रणनीतिक क्षेत्रों में मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन निर्माण के लिए अनिवार्य होगा। इस संदर्भ में, दोनों पक्ष मानते हैं कि:

  • ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर द प्रमोशन ऑफ एडवांस्ड रिसर्च’ (CEFIPRA) की केंद्रीय भूमिका, जो द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग का एक प्रमुख माध्यम है, जिसमें नवाचार तथा रणनीतिक रूप से प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों के सह-विकास और विस्तार पर विशेष बल दिया गया है।
  • ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन नेटवर्क’ (IFIN) का महत्व, जो ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष’ की एक प्रमुख उपलब्धि है तथा दोनों देशों के इनोवेशन इकोसिस्टम को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम है। दोनों देश इसके लंबे समय तक सक्रिय रहने में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें IFIN के कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त भारत-फ्रांस स्टीयरिंग कमिटी का संभावित गठन भी शामिल है।
  • बायोमेडिकल साइंस और हेल्थ इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने वाले मौजूदा प्लेटफॉर्म के तौर पर ‘फ्रेंको-इंडियन कैंपस इन लाइफ साइंसेज फॉर हेल्थ’ (FIC-LSH) की अहमियत को पहचानना और हेल्थ सेक्टर में द्विपक्षीय रिसर्च, एकेडमिक सहयोग और इनोवेशन पार्टनरशिप में इसके योगदान को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा जारी रखने में रुचि व्यक्त करते हैं।
  • अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक पारस्परिक पहुंच, CEFIPRA, संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समिति, स्टेशन-एफ तथा FRIND-X में स्टार्टअप सहयोग और इंडिया-फ्रांस इनोवेशन नेटवर्क के शुभारंभ के माध्यम से, दोनों देश अपनी तकनीकी स्वायत्तता को सुरक्षित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि शोधकर्ताओं एवं उद्यमियों की अगली पीढ़ी वैश्विक चुनौतियों का स्वतंत्र रूप से समाधान कर सके।

 

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