केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज नई दिल्ली के उद्योग भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में “मैपिंग ऑफ टेक्सटाइल वेस्ट वैल्यू चेन इन इंडिया“ शीर्षक वाली रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट टेक्सटाइल वेस्ट के उत्पादन, रिकवरी के तरीकों, रीसाइक्लिंग तकनीकों और भारत की टेक्सटाइल वैल्यू चेन में सर्कुलैरिटी को मजबूत करने के अवसरों का एक व्यापक मूल्यांकन प्रदान करती है।
इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक भारत के कपड़ा क्षेत्र में टिकाऊ और चक्रीय उत्पादन प्रणालियों की ओर वैश्विक बदलाव का नेतृत्व करने की महत्वपूर्ण क्षमता है।
गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत का कपड़ा उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और यह महत्वपूर्ण है कि यह विकास स्थिरता के लक्ष्यों के अनुरूप हो। उन्होंने उल्लेख किया कि यह रिपोर्ट टेक्सटाइल वेस्ट को एक मूल्यवान आर्थिक संसाधन में बदलने के लिए डेटा–आधारित ब्लूप्रिंट प्रदान करती है और रीसाइक्लिंग, अपसाइकिलिंग तथा संसाधन रिकवरी के व्यावहारिक रास्तों पर प्रकाश डालती है।
यह अध्ययन प्री–कंज्यूमर और पोस्ट–कंज्यूमर दोनों तरह के टेक्सटाइल वेस्ट के प्रवाह को मैप करता है, विभिन्न क्लस्टरों में रीसाइक्लिंग प्रथाओं की पहचान करता है, उभरती प्रौद्योगिकियों का दस्तावेजीकरण करता है और भारत के सर्कुलर टेक्सटाइल इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए नीतिगत सिफारिशों को रेखांकित करता है।
रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत सालाना लगभग 70.73 लाख टन टेक्सटाइल वेस्ट उत्पन्न करता है। इसमें से 42 प्रतिशत प्री–कंज्यूमर स्रोतों जैसे विनिर्माण कचरे से आता है, जबकि 58 प्रतिशत पोस्ट–कंज्यूमर निपटान से उत्पन्न होता है। कुल टेक्सटाइल वेस्ट का 70 प्रतिशत से अधिक वर्तमान में रिकवर किया जाता है और रीसाइक्लिंग, अपसाइकिलिंग, डाउनसाइकिलिंग या पुन: उपयोग की धाराओं में भेज दिया जाता है। निष्कर्ष आगे बताते हैं कि लगभग 95 प्रतिशत प्री–कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट रिकवर कर लिया जाता है, जो मूल्य श्रृंखला में रिकवरी नेटवर्क की मजबूती को दर्शाता है।
रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि कताई क्षेत्र ने क्लोज्ड–लूप ऑपरेशंस के लिए एक मानक स्थापित किया है, जिसमें कताई के लगभग 100 प्रतिशत वेस्ट को उत्पादन में इन–सीटू पुन: एकीकृत किया जाता है। कताई के दौरान उत्पन्न होने वाले सॉफ्ट वेस्ट को सजातीय कचरा प्रवाह, उत्पादन और प्रसंस्करण के बीच निकटता और रीसाइकिल इनपुट के लिए स्थापित गुणवत्ता मानकों के कारण तुरंत उसी प्रक्रिया के भीतर पुन: उपयोग किया जाता है।
विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि भारत के पोस्ट–कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट का लगभग 55 प्रतिशत लैंडफिल में जाने से बचाया जाता है, जिसका मुख्य कारण एक व्यापक अनौपचारिक संग्रह और छंटाई नेटवर्क है। यह इकोसिस्टम लगभग 40-45 लाख आजीविकाओं का समर्थन करता है, जिनमें मुख्य रूप से हाशिए के समुदायों की महिलाएं शामिल हैं जो पुराने कपड़ों के संग्रह, छंटाई और पुनर्वितरण में लगी हुई हैं।
क्लस्टर विश्लेषण से पता चलता है कि पानीपत मैकेनिकल टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहाँ कई टेक्सटाइल क्लस्टरों से वेस्ट प्रसंस्करण के लिए पहुँचाया जाता है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि टेक्सटाइल हब्स में क्लस्टर स्तर पर रीसाइक्लिंग बुनियादी ढांचे को विकसित करने से दक्षता में काफी सुधार हो सकता है और वेस्ट उत्पन्न होने वाले स्रोत के करीब रीसाइक्लिंग को सक्षम बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट आगे अनुमान लगाती है कि भारत का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग बाजार 2030 तक 3.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है, जिसमें लगभग एक लाख नए ग्रीन जॉब्स पैदा करने की क्षमता है। मैकेनिकल रीसाइक्लिंग वर्तमान में टेक्सटाइल रिसाइक्लिंग के लिए सबसे स्थापित मार्ग है, जबकि रासायनिक रीसाइक्लिंग प्रौद्योगिकियां आणविक स्तर पर फाइबर को रिकवर करने और टेक्सटाइल-टू-टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग का समर्थन करने की अपनी क्षमता के लिए लोकप्रियता हासिल कर रही हैं।
कपड़ा मंत्रालय ने टिकाऊ विनिर्माण प्रथाओं, चक्रीय संसाधन उपयोग और रीसाइक्लिंग प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। रिपोर्ट के निष्कर्षों से नीति निर्माण, उद्योग सहयोग और निवेश को समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिसका उद्देश्य सर्कुलर और टिकाऊ कपड़ों के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।

