बंगाल में तीनों दलों के बड़े नेता देश द्रोही, विकास विरोधी, ओडिशा में तीनों दलों के बड़े नेता देश प्रेमी, विकास वादी 

बंगाल में तीनों दलों के बड़े नेता देश द्रोही, विकास विरोधी, ओडिशा में तीनों दलों के बड़े नेता देश प्रेमी, विकास वादी

नन्द किशोर जोशी

एक्जिक्यूटिव एडिटर

क्रांति ओडिशा मीडिया

 

भारत में 1952 में प्रथम बार गणतांत्रिक तरीके से चुनाव प्रक्रिया आरंभ हुई।तब से लेकर आजतक बंगाल में तीनों दलों के बड़े नेताओं ने सेकुलर वाद, प्रगति विरोधी,देश द्रोही भूमिका निभाई।

1971 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आई बंगाल में। मुख्यमंत्री बने सिद्धार्थ शंकर राय।उनका चुनाव क्षेत्र था बंग्लादेश सीमा के पास मुस्लिम बहुल क्षेत्र। मतलब मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति। घुसपैठियों को बढ़ावा।

सिपिएम के ज्योति बसु बने मुख्यमंत्री 1977 में। चुनाव क्षेत्र था बारासात। मतलब बंग्लादेशी घुसपैठियों की भरमार। मतलब मुस्लिम तुष्टिकरण।ये महाशय तो वैसे भी चीन को आदर्श मानते थे।उनकी दल चीन के चरणों में बिछी रहती थी। चीन के इशारे पर बंगाल में भारत के विकास को रोकना, भारत की प्रगति में बाधक बनना ही इनका मुख्य कार्य था।

आये दिन बंगाल में सत्ता के बाहर और सत्ता में रहते हुए श्रमिक आंदोलन, मेनेजमेंट की घेराबंदी, मेनेजमेंट को गाली गलौज, कारखानों में हड़ताल कर तालाबंदी, बारंबार कोलकाता, बंगाल बंद करना,ये ही इनका मुख्य एजेंडा था। मतलब विकास कार्यों के खिलाफ कार्रवाई करना।

इनके हिंदू नेता खुलेआम धर्मतल्ला में, घोषणा करके बीफ पार्टी आयोजित करते थे। सनातन विरोधी कार्यों में लिप्त रहते थे। बंगाल, भारत की प्रगति, विकास में हरसंभव रोडा अटकाये।

ममता आयी सत्ता में 2011 में,वह भी कम्युनिस्टों के पदचिन्हों पर चलकर कम्युनिस्टों से भी बड़ी जिहादन बनी। विकास विरोधी, सनातन विरोधी कार्यों को बढ़ावा दीं।

भारत की फौज जब 2021 में चीनी घुसपैठियों के मुकाबले के लिए बंगाल की बैरकों से निकल कर गलवान जारहे थे , ममता बोली कि भारत की फौज ने बंगाल पर आक्रमण किया। कुछ दिनों बाद बोली कि बंगाल को भारत से अच्छे संबंध चाहिए। मतलब बंगाल अलग और भारत अलग।

अब मैं ओडिशा के बड़े नेताओं की बात कर रहा हूं।बिजु पटनायक ने पायलट के तौर पर श्रीनगर से पहली उड़ान भरी भारत के फौजियों को लेकर 1948 में दिल्ली से श्रीनगर।बिजु पटनायक भारत के सफल , कुशल पायलोट थे। उन्होंने श्रीनगर हवाई अड्डे पर पाकिस्तानी गोलीबारी की परवाह नहीं कर भारत के फौजियों को कई बार दिल्ली से श्रीनगर उतारा। नतीजा कश्मीर का बड़ा हिस्सा भारत के पास रह गया।

1995 की बात है ओडिशा में कांग्रेसी मुख्यमंत्री जानकी पटनायक थे।बिजु पटनायक विरोधी दल के नेता थे विधानसभा में। बालेश्वर के चांदीपुर में भारत की सुरक्षा के लिए, डिफेंस को चाहिए थी जमीन, हथियारों की टेस्टिंग के लिए।

ओडिशा में हथियारों की टेस्टिंग विरोधी माहौल था। ओडिशा में डिफेंस विरोधी माहौल बन रखा था। ओडिशा विधानसभा में विपक्षियों द्वारा गर्मागर्म बहस होनी थी।शासक कांग्रेस बैकफुट पर थी।

ऐसे में चतुर जानकी पटनायक ने विरोधी नेता बिजु पटनायक को अपने दफ्तर में चाय पर आमंत्रित किया।जानकी पटनायक जानते थे कि बिजु पटनायक बहुत बड़े देशभक्त हैं। दोनों नेताओं में चाय पर चर्चा हुई।बिजु पटनायक देश हित में भारत सरकार, ओडिशा सरकार के निर्णय को समर्थन दिये। भारत के वृहत्तर स्वार्थ के लिए।

इसके लिए उनके शिष्य विधायक गण थोड़े नाराज भी हुए अपने गुरु बिजु पटनायक से।अंत में गुरु की आज्ञा पालन करते हुए विधानसभा में सरकार के चांदीपुर में डिफेंस प्रोजेक्ट को समर्थन किये,देश प्रेम का आदर्श उदाहरण पेश किए।

नतीजतन आज जितनी भी अग्नि मिसाइल, पृथ्वी मिसाइल इत्यादि चांदीपुर में टेस्टिंग हो रही है, उसमें विरोधी दल के नेताओं का सहयोग, समर्थन था।

नवीन पटनायक ने महान रक्षा वैज्ञानिक , मिसाइलों के जनक अब्दुल कलाम के निधन पश्चात, उनके सम्मान में भद्रक के पास डिफेंस के काम आने वाले द्विप का नाम कलाम द्विप रखा।देश प्रेम का आदर्श उदाहरण पेश किया।

आज की मोहन सरकार आजकल जोरदार तरीके से गौतस्करों को पकड़ रही है,उनकी प्रोपर्टी जब्त कर रही है। सनातन की भावनाओं को बढ़ावा दे रही है। इस तरह दोनों राज्यों के तीनों दलों के चंद नेताओं के बारे में मैंने संक्षिप्त ब्यौरा आपके समक्ष रखा।

डिफेंस प्रोजेक्ट को समर्थन देने के कारण सैंकड़ों करोड़ों के सरकारी,गैर सरकारी इन्वेस्टमेंट भी ओडिशा को प्राप्त हुए। ओडिशा में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिले। मतलब आम के आम और गुठली के भी दाम।

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