बंगाल की दुर्गति 1967 से आरंभ  ओडिशा की प्रगति 1977 से आरंभ 

बंगाल की दुर्गति 1967 से आरंभ

ओडिशा की प्रगति 1977 से आरंभ

नन्द किशोर जोशी

एक्जिक्यूटिव एडिटर

क्रांति ओडिशा मीडिया

प्रथम कड़ी 

1967 तक भारत में लोकसभा और विधानसभाओं दोनों के चुनाव एक साथ ही हुआ करते थे।1967 का चुनाव आजाद भारत का पहला अनोखा चुनाव हुआ। इस बार भारत के 9 राज्यों में प्रथम बार कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई और विपक्षी सत्ता में काबिज हुए।

बंगाल में विपक्षी गठबंधन सरकार में आयी। कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई। क्षेत्रीय पार्टी बंग्ला कांग्रेस के नेता अजय मुखर्जी बंगाल के मुख्यमंत्री बने।सीपिएम के ज्योति बसु उपमुख्यमंत्री बने।ज्योति बसु के पास गृहमंत्रालय था, अर्थात पुलिस थी ज्योति बसु के पास।

सीपिएम चीन की दलाल रही है शुरु से।1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया था,तब कम्यूनिस्टों ने कोलकाता में ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किया था।वे बोले कि हमारे चीनी सैनिकों को खून की जरूरत है, इसलिए हम ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित कर ,ब्लड चीनी सैनिकों को भेजेंगे।

कम्युनिस्टों ने उस समय भारत में विदेशों से आयातित हथियारों को कोलकाता बंदरगाह पर अनलोडिंग करने के लिए मना किया। कम्युनिस्टों की लेबर यूनियन कोलकाता पोर्ट पर कार्यरत थी। इसके फलस्वरुप विदेशी हथियारों की कोलकाता पोर्ट पर अनलोडिंग नहीं हुई, भारत चीन से युद्ध में हार गया। इसमें नेहरू की भी गलती ज्यादा थी।

कांग्रेस की नाकामी, भ्रष्टाचार से भारत के लोग तंग आगये थे , फलस्वरुप 9 राज्यों में विपक्षी सरकार बनी। लेकिन किसी भी राज्य में आपसी खिंचतान, अहंकार के चलते कोई भी सरकार पूरे पांच साल कार्य नहीं कर सकी। कांग्रेस ने भी विपक्षियों में सेंधमारी की।

फलस्वरूप बंगाल समेत सभी विपक्षी शासित राज्यों में सरकार टूटी, विधानसभा मध्यावधि चुनाव हुए, राष्ट्रपति शासन लगा। कहीं विधानसभा चुनाव आगे हुआ , कहीं बाद में हुआ। अनेकों जगह कांग्रेस फिर से सत्ता में आई।

वहीं से भारत में लोकसभा, विधानसभा चुनाव अलग-अलग हुए,जो आजतक हो रहे हैं, अधिकांश राज्यों में।

1967 में उत्तर बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र में नक्सलियों का जन्म हुआ, जिन्हें माओवादी भी कहते हैं।इन माओवादियों के पीछे चीन की योजना ,सहयोग, समर्थन, फंडिंग सभी कार्य कर रहे थे।

कानु सान्याल,चारु मजुमदार 1967 में चीन जाकर हथियारों के चलाने की ट्रेनिंग लिए, हथियार और फंड लेकर बंगाल वापस आये। यहां ज्योति बसु उपमुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री भी थे। हिंदी कहावत के अनुसार सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का।

कम्युनिस्टों के शासन में 1967 से बंगाल में कारखाने बंद होने आरंभ हुए। चारों तरफ बंगाल में हड़ताल, घेराबंदी, कारखानों में तालाबंदी, स्ट्राइक, जुलूस, कोलकाता बंद, बंगाल बंद आरंभ होगया। अराजकता का माहौल कम्युनिस्टों ने बंगाल में कर दिया।

इन सबके पीछे चीन का हाथ था, चीन की फंडिंग थी सीपिएम तो चीन के हाथों कठपुतली थी।जैसा चीन चाहता था, वैसा ही कम्युनिस्ट यहां करते थे। चीन का एकमात्र लक्ष्य था,कैसे भी हो भारत की उन्नति को , प्रगति को, विकास को रोको। उसमे कम्युनिस्ट, नक्सलियों ने चीन का साथ दिया।उस समय बंगाल विकास के मामले में,जिडिपि में भारत का एक नंबर राज्य था, कोलकाता भारत का एक नंबर शहर था।

1968 में कोलकाता के रविन्द्र सरोवर में बोलिउड के सितारों का जमावड़ा हुआ। अशोक कुमार नाइट मनायी गई। कोलकाता के बड़े बड़े धनाढ्य व्यक्ति शो देखने परिवार समेत रविन्द्र सरोवर पहुंचे।

वहां शो के बीच अचानक बिजली गुल हुई। सैंकड़ों हुड़दंगी, नक्सलियों ने रविन्द्र सरोवर पर आक्रमण किया। महिलाओं की इज्जत लूटे , आभूषण लूटे, भयंकर मारपीट किये।

पुलिस मूकदर्शक बनी रही।यहां तक कि आदित्य विक्रम बिड़ला के कपड़े फाड़े गये। उन्होंने तुरंत निर्णय लेकर कोलकाता को अलविदा कहा। अपने सारे प्रशासनिक कार्यालय मुंबई लेगये। अनेक कारखाने धीरे-धीरे महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों में ट्रांसफर हुए।

फैक्ट्रियों का ट्रांसफर सिलसिला आजतक जारी है। यहीं से लक्ष्मी जी बंगाल से रुठ गई,जो आजतक जारी है।

अभी फिलहाल बंगाल विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भाजपा की चुनावी सभा में बोले कि पिछले कुछ सालों में 8000 से ज्यादा छोटी बड़ी फैक्ट्री बंगाल से निकल कर महाराष्ट्र में लग गयी हैं।

1971 के बंगाल विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई। कारण 1967 की अजय मुखर्जी, ज्योति बसु सरकार आपसी झगड़े की वजह से टूट गई। कांग्रेस की सहज वापसी हुई।

भारत के प्रसिद्ध बेरिस्टर सिद्धार्थ शंकर राय बंगाल के 1971 में मुख्यमंत्री बने। अच्छा कार्य किए। नक्सलियों का करीब करीब सफाया कर दिए।उनकी लोकप्रियता बंगाल में तथा भारत में बढी । इंदिरा गांधी को सिद्धार्थ शंकर राय की लोकप्रियता मंजूर नहीं हुई। बारंबार इंदिरा गांधी, संजय गांधी उनको हैरान, परेशान करने लगे।1975 में भारत में इमरजेंसी लगी। कांग्रेस केंद्र से सत्ता से बाहर हुई, इंदिरा चुनाव हारी,1977 लोकसभा चुनाव में।

1977 के बंगाल विधानसभा चुनाव में वामपंथी जीतकर आए। कारखाने बंदी का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।पावर कट आरंभ हुआ, लोड शेडिंग हुई। हड़ताल, मेनेजमेंट की घेराबंदी, जुलूस, उद्योगपतियों के खिलाफ नारेबाजी तेज होती गई, बंगाल पिछड़ता चला गया, लोगों में हताशा बढ़ती चली गई।

2011 में कम्युनिस्टों के विरुद्ध आंदोलन कर ममता सत्ता में आई।बाद में कम्युनिस्टों को, उनके कैडर को अपने दल में शामिल की।उनके विकास विरोधी पदचिन्ह पर चलने लगी। नतीजा इस चुनाव में आने वाला है। क्रमशः

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