हिंदू जनजागृति समिति और राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति ने ली शंकराचार्य जी की भेंट

धर्मांतरण और लव जिहाद याने ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ जैसा भारत को कमजोर करने का षड्यंत्र  – जगद्गुरु शंकराचार्य

द्वारका शारदा पीठाधीश्वर श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने चेतावनी दी है कि ‘लव जिहाद’ और ‘धर्मांतरण’ की बढ़ती घटनाएँ भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और हिंदुस्तान को कमजोर करने के लिए रचा गया एक सुनियोजित षड्यंत्र है। इस संकट का ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ व्यापार के बहाने भारत आई और कपट से देश को गुलाम बनाकर 200 वर्षों तक शासन किया, आज वैसी ही परिस्थिति छद्म रूप में धर्मांतरण के माध्यम से खड़ी की जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि आज भारत का रक्षा मंत्रालय और सैन्य शक्ति इतनी सशक्त है कि कोई भी राष्ट्र हम पर प्रत्यक्ष आक्रमण करने का साहस नहीं कर सकता, इसीलिए अब विशिष्ट जनसंख्या बढ़ाकर देश को आंतरिक रूप से दुर्बल करने का प्रयास किया जा रहा है।

पुणे में वेदाचार्य घैसास गुरुजी वेदपाठशाला के वर्धापन दिवस समारोह के अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने भागवत कथा का रसमय निरूपण किया। इस उपलक्ष्य में ‘हिंदू जनजागृति समिति’ और ‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति’ के अधिवक्ताओं ने शंकराचार्य जी से भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने हिंदू जनजागृति समिति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समिति बहुत अच्छा कार्य कर रही है और उन्होंने अपने आशीर्वाद भी प्रदान किए।

जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज ने स्पष्ट किया कि लव जिहाद और धर्मांतरण केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व प्राप्त करने की एक दूरगामी योजना है। लोकतंत्र में बहुमत ही सत्ता का आधार होता है, अतः हिंदुओं की संख्या कम करना और अपनी संख्या बढ़ाना एक सोची-समझी रणनीति है, ताकि भविष्य में मताधिकार के बल पर शासन व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लिया जा सके। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ईसाई मिशनरियाँ ‘सेवा’ का माध्यम बनाकर और प्रलोभन देकर सामान्य हिंदुओं का धर्मांतरण कर रही हैं, उस पर अंकुश लगाना अनिवार्य है। इस षड्यंत्र को रोकने के लिए शंकराचार्य जी ने अन्य राज्यों की भांति महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार से ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध अत्यंत कठोर कानून बनाने की आग्रही मांग की है।

शिक्षा प्रणाली पर मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अल्पसंख्यकों को उनके मदरसों और चर्चों में धर्म की शिक्षा लेने की स्वतंत्रता है, उसी प्रकार शिक्षा मंत्रालय और मानव संसाधन मंत्रालय को सरकारी व निजी स्कूलों में हिंदू बच्चों के लिए ‘हिंदू धर्म शिक्षा’ अनिवार्य करनी चाहिए। यदि बच्चों को शालेय जीवन से ही अपने धर्म और संस्कारों का ज्ञान प्राप्त होगा, तो वे किसी भी प्रलोभन या षड्यंत्र का शिकार नहीं होंगे। अंत में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, मुख्यमंत्रियों और राष्ट्रप्रेमी संस्थाओं से इस विषय की गंभीरता को समझते हुए एकजुट होने का आह्वान किया।

 

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