तपोभूमि मारवाड़ी क्लब में रामायण आयोजन के ७५ साल रहे शानदार, जानदार,भव्य रहा डायमंड जुबली साल १९५०-२०२५
नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर क्रांति ओडिशा मीडिया
२१ वीं कड़ी
कल सुबह तपोभूमि में सुबह दो घंटे हनुमान चालीसा का पाठ, पूर्णाहुति हवन हुआ। संध्या समय राम दरबार में भव्यभजन संध्या हुआ। इसमें कोलकाता से भजन गायिका पधारीं।अपनी मधुर वाणी से भक्तों को खूब रिझाया। सर्वप्रथम स्थानीय विशिष्ट भजन कलाकारों ने भगवान के अच्छे -अच्छे भजन गाये , भक्तों में भक्ति रस का संचार किया।ये गायक कलाकार हैं दिनेश जोशी,कमल वशिष्ठ,सुनिल सांगानेरिया ,सोनु शर्मा।
तपोभूमि मारवाड़ी क्लब में श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ सामूहिक आयोजन के ७५ कामयाब साल पूरे हुए हैं।आज दिन में हजारों श्रद्धालुओं के लिए अन्नकूट प्रसाद का भव्य आयोजन है।विगत ११ दिनों तक सारे राम भक्तों ने श्रीराम दरबार में अपनी हाजिरी लगाई।
आज प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद रुपी प्रसाद अन्नकूट हजारों श्रद्धालुओं ने बड़े ही प्रेम से पाया है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के दरबार की विसर्जन शोभायात्रा में शामिल अनगिनत लोग हो रहे हैं।सभी भक्तगण अपने आराध्य श्रीराम को भावपूर्ण विदाई बड़ी नम आंखों से कर रहे हैं।
पिछली कड़ियों में कुछ खास -खास बातें छूट गयी थी , मैं लिख नहीं पाया था।आज लिख रहा हूं।एक परिवार की दो पीढ़ी को राम दरबार में चंवर डुलाते हुए मैंने देखा है।मंच पर तथा भूदेवों के बीच में चंवर डुलाते हुए मैंने देखा है।चंवर डुलाते समय यह परिवार श्रीरामचरितमानस का पाठ भी लगातार करता था।
यह परिवार है बाखराबाद का जाजोदिया परिवार। सीताराम जी जाजोदिया को चंवर डुलाते हुए मैंने देखा है वर्षों।उनके पश्चात उनके सुपुत्र तथा मेरे सहपाठी श्याम सुंदर जाजोदिया को भी मैंने चंवर डुलाते हुए देखा है।इसी कड़ी में श्याम जाजोदिया के छोटे भाई पवन जाजोदिया को राम दरबार में श्रद्धापूर्वक चंवर डुलाते हुए मैंने देखा है।
इस बार के राम दरबार में यही चंवर डुलाने की सेवा विद्वान पंडित देवचन्द्र झा ने की है। पंडित देवचन्द्र झा के अलावा चंवर डुलाने की सेवा समाजसेवी जोगिंदर अग्रवाल ने भी बड़ी श्रद्धापूर्वक की है।
तपोभूमि मारवाड़ी क्लब का प्रांगण गोपीनाथ भगवान मंदिर का प्रांगण है । यहां श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ पश्चात १९८६ से लगातार अन्नकूट प्रसाद सभी भक्तों के लिए, उनके परिवार के लिए किया जाता रहा है।आज भी यह भक्ति भाव से भरी परंपरा कायम है।
व्यासपीठ पर उल्लेख करते समय कुछ महत्वपूर्ण जानकारी छूट गयी थी।वह मैं अभी दे रहा हूं।प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त,प्रभु श्रीराम के उपासक भाई रामजीलाल शर्मा जी ने चार बार राम दरबार में व्यासपीठ पर बैठ कर प्रभु श्रीराम की अनन्य सेवा की है।अपनी मधुर वाणी से भगवान को तथा भक्तों को उन्होंने रिझाया है।
इनके अलावा प्रथम व्यासपीठ पर विराजे काशी के विद्वान पंडित शिवनारायण व्यास जी के सुपुत्र ने भी एक साल सच्चे दरबार में व्यासपीठ पर विराजमान होकर प्रभु श्रीराम की अनन्य सेवा की है। क्रमशः

