शिवमहापुराण तपोभूमि मारवाड़ी क्लब में पहली बार आयोजित ७५ सालों में, भक्तों में भक्ति रस का प्रवाह तेज
नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर क्रांति ओडिशा मीडिया
१९ वीं कड़ी

आज डायमंड जुबली यानि हीरक जयंती समारोह में श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ विश्राम का दिवस है। पिछले ९-१० दिनों से राम दरबार ने अपने चरणों में भक्तों को बैठा रखा है। देखते-देखते १० दिन कैसे बीत गए, मालूम ही नहीं चला।कल सुबह दो घंटे हनुमान चालीसा पाठ, तत्पश्चात संध्या समय भजन संध्या। परसों भगवान का अन्नकूट प्रसाद, तत्पश्चात विसर्जन शोभायात्रा।
भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या से पवित्र ज्योति का आगमन,९ दिन व्यापी सामूहिक पाठ श्रीरामचरितमानस का।आज पाठ विश्राम दिवस।सारी घटनाएं आंखों के सामने घटी। परसों पश्चात लंबे समय तक यह श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ भक्तों को याद रहेगा।मन में तमन्ना थी राम दरबार की झांकी को कुछ दिन और निहारते , पूजा करते,आरती लेते इत्यादि।
अब मैं कल के महाशिवपुराण प्रवचन पर चंद बातें लिखूंगा। मैंने मेरी ज़िन्दगी में पहली बार शिवमहापुराण प्रवचन सुना है। बहुत -बहुत आनंद आया।दिल की पूरी गहराई तक परमानंद की प्राप्ति हुई ।इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
तब भी मैं कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूं।जीव और ब्रह्म एक ही हैं।
किसी को अगर हर पल भगवान की याद रहती है,तो जानो जगन्नाथ महाप्रभु की विशेष कृपा है। ईश्वर को समर्पण करना कभी नहीं भूलना चाहिए।
भगवान शंकर भस्म लगाते हैं। शिवपुराण साधना ग्रंथ है। चैतन्य महाप्रभु, मीरा,रैदास , तुलसी दास से पूछो मन कैसे लगता है।मन कैसे लगाया जाता है।मन को सत्कर्म में लगाना पड़ता है,जिसका मन,तन भगवान से लग गया,उसका जीवन सफल होगया।तन लगाना आपका काम है,मन लगाना भगवान का काम है।
महोब्बत आंखों से होती है, भगवान का प्रवेश भी आंखों से होता है।शिवजी को जब देखो समाधी में बैठे रहते हैं।किसी का न बना तो न बन, अपना तो बन।रोज थोडा थोडा सत्संग करते रहो , ज्ञान बढ़ता रहेगा, भक्ति बढ़ती रहेगी।
हरिहर भगवान की जय हो।जय बोलने से पाप निकल कर बाहर जाते हैं।शिव और विष्णु दोनों एक ही हैं।एक उमा पति हैं, दूसरे रमापति हैं। हरिहर भगवान का एकत्व रुप है। समुद्र का मंथन हुआ, कोई जहर पीने को तैयार नहीं हुआ। महादेव ने विश्व कल्याण हेतु जहर पीया। नीलकंठ बने। नीलकंठ महादेव की जय हो।
सत्यम शिवम् सुंदरम ।शिव ही सत्य है,सत्य ही शिव है,शिव ही सुन्दर है। क्रमशः

