केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) की सोसाइटी की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर की सोसाइटी की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और आयुष मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और सोसाइटी के गणमान्य सदस्य उपस्थित थे।

इस अवसर पर मंत्री महोदय ने कहा, “हमारा लक्ष्य राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करना है जो उन्नत अनुसंधान, नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जन स्वास्थ्य नेतृत्व का प्रतीक हो। इस संस्थान को न केवल उत्कृष्टता प्राप्त करनी चाहिए, बल्कि देश और दुनिया भर के अन्य आयुर्वेदिक संस्थानों को भी प्रेरित करना चाहिए।”

श्री प्रतापराव जाधव ने इस बात पर बल दिया कि यह बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के वैश्विक उदय के साथ संस्थान की भविष्य की दिशा तय करने का मंच है।

मंत्री महोदय ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आयुष क्षेत्र ने ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र की स्थापना, भारतीय ज्ञान प्रणालियों की वैश्विक मान्यता का प्रतीक है, जिसे दुनिया भर में आशा और विश्वास के साथ अपनाया गया है।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईएकी उपलब्धियाँ:

  • भारत में आयुष क्षेत्र का पहला मानद विश्वविद्यालय।
  • प्रतिवर्ष 4 लाख से अधिक ओपीडी रोगियों और 25,000 से अधिक आईपीडी रोगियों का उपचार किया जाता है।
  • एससी, एसपी और एसटीपी योजनाओं के तहत 12 जिलों में निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा शिविर।
  • जीएमपी-प्रमाणित फार्मेसी 100 से अधिक आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन करती है।
  • एनएएसी ‘ए’ ग्रेड, एनएबीएच और एनएबीएल पुरस्कार प्राप्त।
  • 15 देशों के विद्यार्थी एनआईए में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
  • हाल ही में एनसीआईएसएम द्वारा भारत का सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक संस्थान घोषित किया गया।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की उपलब्धियाँ, इसकी वैश्विक छवि को और निखारती हैं।

प्रतापराव जाधव ने शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं में एनआईए के प्रदर्शन की सराहना करते हुए, विश्व स्तर पर मानकीकृत अनुसंधान, संकाय विकास, आधुनिक पाठ्यक्रम, मजबूत बुनियादी ढाँचे और व्यापक सामुदायिक पहुँच की आवश्यकता पर बल दिया।

सरकार के सहयोग की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय इस संस्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद का गौरव बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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