“गुरु-शिष्य परंपरा का आदर्श लेकर राष्ट्र और धर्म के लिए सक्रिय होना ही सच्ची गुरुदक्षिणा है!”—श्रीमती बबीता गांगुली, हिन्दू जनजागृति समिति
कोलकाता – आज संपूर्ण विश्व पर तृतीय विश्वयुद्ध की तलवार लटक रही है। देश के भीतर भी पहलगाम जैसे हालात, दंगे, फेक नैरेटिव्स, लव जिहाद, लैंड जिहाद आदि के माध्यम से हिन्दुओं को लक्ष्य बनाया जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में हिन्दू समाज में भ्रम की स्थिति है। महाभारत के समय अर्जुन भी इसी भ्रम में था, तब श्रीकृष्ण ने कहा था । “अधर्म के विरुद्ध संघर्ष करना ही धर्म है।” आज भी गुरु तत्त्व की यही अपेक्षा है कि हिन्दू साधना करके आत्मिक बल बढ़ाएं और अधर्म के विरुद्ध सक्रिय हों। यही हमारी गुरु-शिष्य परंपरा का आदर्श है और उसी मार्ग पर चलना ही सच्ची गुरुदक्षिणा है, ऐसा प्रतिपादन हिंदू जनजागृति समिति की ओर से श्रीमती बबीता गांगुली ने किया। वे बागुईहाटी, कोलकाता में आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव में बोल रही थीं।
हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा कोलकाता सहित संपूर्ण देश में कुल ४५ स्थानों पर गुरुपूर्णिमा महोत्सव उत्साह व आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।
कोलकाता में हुए महोत्सव में मार्गदर्शन करते हुए श्री सूरज कुमार सिंह, संस्थापक अध्यक्ष, श्रीराम स्वाभिमान परिषद ने आह्वान किया कि ‘राष्ट्र और धर्म की रक्षा जीवन का संकल्प बनाएं’। श्री सूरज कुमार सिंह ने पश्चिम-बंगाल के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भूमि अपनी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और क्रांतिकारी विरासत के लिए प्रसिद्ध है। स्वामी विवेकानंद, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, खुदीराम बोस जैसे महापुरुषों की इस भूमि ने भारत और विश्व को दिशा दी है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे राष्ट्रनायकों ने बंगाल को विभाजन से बचाया और हिंदुओं की रक्षा की। यह भूमि साधु-संतों, ऋषियों और मातृशक्ति की परंपरा से पूजित है।
श्री सिंह ने सचेत किया कि आज राष्ट्र, धर्म और संस्कृति पर आघात हो रहे हैं, जिसके परिणाम स्वरुप देश, समाज और हमारा जीवन भी असुरक्षित हो गया है और इसे सुरक्षित करना आवश्यक है। अतः उन्होने आवाह्न किया कि इस गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर सभी सनातनी संकल्प लें कि ‘हम सनातन संस्कृति की रक्षा करेंगे, युवाओं को लव जिहाद और वामपंथी षड्यंत्रों के प्रति जागरूक करेंगे तथा धर्म-राष्ट्र रक्षा की सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाएंगें।’
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री व्यास पूजा, परमपूज्य भक्तराज महाराज के प्रतिमापूजन तथा रामराज्य की स्थापना हेतु सामूहिक नामजप से हुआ। संतों के संदेश का वाचन, कार्यकर्ताओं के अनुभव कथन और लघु चलचित्रों द्वारा जनजागृति की गई। ‘स्वरक्षा प्रदर्शन’ भी दिखाए गए।
इस अवसर पर विविध आध्यात्मिक, राष्ट्र एवं धर्म विषयक ग्रंथ प्रदर्शनी तथा राष्ट्र-धर्म से संबंधित पोस्टर प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिससे अनेक धर्मप्रेमी लाभान्वित हुए।
‘ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ : देश-विदेश के श्रद्धालुओं को गुरुपूर्णिमा का लाभ मिल सके, इसके लिए समिति द्वारा अंग्रेज़ी, कन्नड़, तेलुगु व बंगाली भाषाओं में ‘ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ भी संपन्न हुआ, जिसमें अनेक देशों के दर्शकों ने सहभाग लिया।

