श्री राम वंदना
कोटि सूर्य सम बदन प्रभा
मरकत सम श्री अंग
पंकज सम सुकोमलता
सोहे कँध निषंग।।
मकराकृत कुँडल झलकत
मृगमद तिलक सुभाल
रत्नजड़ित मस्तक किरीट
या छबि मधुर ललाम ।।
सिंघ कंध आजानुभुज
उर सोहत बनमाल
मधुर मनोहर छबि लखूँ
मनभावनी अभिराम।।
बाम अंग श्री जानकी
दक्षिण लक्ष्मण भ्रात
चरणों में हनुमानजी
धरो ध्यान नित प्रात।।
रामनवमी की शुभ कामनाएँ
Purusottam Agrawal
Cuttack

