अभिषेक जोशी ( मुख्य संपादक, क्रांति ओड़िशा) : १६ फरवरी शाम 7 बजे मेरी दादी हमें छोड़कर चली गईं, और अपने पीछे करुणा और आध्यात्मिकता की विरासत छोड़ गईं। उनका जीवन उनकी दयालुता का प्रमाण था, और मृत्यु के बाद भी उनकी उदारता जारी है।
उन्होंने अपने जीवनकाल में ही अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया था, और आज उनकी इच्छा पूरी हो गई। उनकी आंखें अब किसी के जीवन में रोशनी लाएँगी, यह वास्तव में निस्वार्थता का एक उल्लेखनीय कार्य है।
मैं उनकी असाधारण भावना को सलाम करता हूँ और भगवान श्री जगन्नाथ से प्रार्थना करता हूँ कि उनकी आत्मा को शाश्वत शांति और मोक्ष प्रदान करें। उनका प्रेरणादायक जीवन और विरासत हमारा मार्गदर्शन करती रहे।

