सरदार वल्लभभाई पटेल और ओडिशा: एकता का एक अविस्मरणीय अध्याय
अभिषेक जोशी
मुख्य संपादक, क्रांति ओड़िशा मीडिया
अध्यक्ष, पतितपावन जगन्नाथ सेवा फाउंडेशन और ओडिशा सुरक्षा सेना
सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के “लौह पुरुष” के रूप में जाने जाते हैं। स्वतंत्रता के बाद उनके दृढ़ नेतृत्व, कूटनीति और परिश्रम के कारण सैकड़ों देशी रियासतें भारत संघ में शामिल हुईं। इस राष्ट्रीय एकीकरण प्रक्रिया में ओडिशा की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी। तत्कालीन ओडिशा की 26 गड़जात रियासतों को नवगठित भारतीय संघ के साथ एकीकृत करने में पटेल, ओडिशा के प्रथम प्रधानमंत्री हरेकृष्ण महताब और केंद्रीय अधिकारी वी. पी. मेनन ने मिलकर कार्य किया।
31 अक्टूबर 1875 को जन्मे वल्लभभाई पटेल स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री थे। स्वतंत्रता के समय देश में लगभग 560 देशी रियासतें थीं, जिनमें से कई शासक भारत संघ में शामिल होने के लिए अनिच्छुक थे। इस जटिल परिस्थिति में पटेल ने धैर्य, कूटनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति से रियासतों को भारत संघ में मिलाने में सफलता पाई। इसीलिए उन्हें “लौह पुरुष” कहा गया और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
1947 में ओडिशा में 26 देशी रियासतें अर्थात् “गड़जात” राज्य थे। इन रियासतों के राजा प्रारंभ में भारत संघ में शामिल होने का विरोध कर रहे थे। इस समय पटेल, महताब और मेनन ने मिलकर इन रियासतों को ओडिशा के साथ मिलाने के लिए कार्य किया।
24 दिसंबर 1947 को कटक में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जहाँ पटेल ने गड़जात राजाओं को भारत संघ में शामिल होने के लिए मनाया। प्रारंभ में राजाओं ने विरोध किया, किंतु पटेल की धैर्य और कूटनीति के कारण अंततः वे शामिल होने को सहमत हो गए। केवल मयूरभंज के राजा ने पहले एक संवैधानिक सरकार बनाने की इच्छा व्यक्त की, जो बाद में ओडिशा के साथ मिल गई।
गड़जात रियासतों के विलय के बाद भी नीलगिरि राज्य बाहर रह गया था। महताब दिल्ली गए और पटेल से नीलगिरि को ओडिशा के साथ मिलाने की अनुमति मांगी। पटेल के प्रयासों से नीलगिरि के राजा अंततः ओडिशा के साथ विलय के लिए सहमत हो गए।
सरदार पटेल के नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ओडिशा की गड़जात रियासतें भारत संघ के साथ जुड़ गईं। इसने ओडिशा को एक सुसंगठित राज्य के रूप में गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरदार वल्लभभाई पटेल केवल भारत के राष्ट्रीय एकता के शिल्पी नहीं थे; उनके नेतृत्व से ओडिशा भी एक सुसंगठित राज्य के रूप में गढ़ा। उनके दृढ़ नेतृत्व, कूटनीति और परिश्रम से ओडिशा की गड़जात रियासतें भारत संघ में शामिल हुईं। यह अध्याय ओडिशा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

