इंदिरा गांधी पुण्यतिथि और ओडिशा से उनका गहरा संबंध
अभिषेक जोशी
मुख्य संपादक, क्रांति ओड़िशा मीडिया
अध्यक्ष, पतितपावन जगन्नाथ सेवा फाउंडेशन और ओडिशा सुरक्षा सेना
31 अक्टूबर को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि है। वे 31 अक्टूबर 1984 को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर अपने ही दो अंगरक्षकों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थीं; उन्हें एम्स ले जाया गया, जहाँ उसी दिन उनकी मृत्यु हो गई। इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने 1966–1977 तथा 1980–1984 के बीच देश का नेतृत्व किया।
इंदिरा गांधी का राजनीतिक व्यक्तित्व
इंदिरा गांधी को भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली और निर्णायक नेताओं में गिना जाता है। 1971 के युद्ध, बांग्लादेश के निर्माण, बैंकों का राष्ट्रीयकरण और 1974 में पोखरण परीक्षण जैसे निर्णयों ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक दृढ़ नेता के रूप में स्थापित किया। उनका राजनीतिक जीवन कठिनाइयों से भरा था। आपातकाल (1975–77) के बाद वे सत्ता से बाहर हुईं, किंतु 1980 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस (आई) के नेतृत्व में प्रधानमंत्री पद पर पुनः लौटीं। उनकी हत्या की पृष्ठभूमि में जून 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार था, जिसके बाद उनके दो सिख अंगरक्षकों ने उन पर हमला किया।
ओडिशा से पहला परिचय
इंदिरा गांधी का ओडिशा से संबंध उनके पिता पंडित जवाहरलाल नेहरू की यात्राओं से जुड़ा है। 8 मई 1955 को नेहरू जी के बरहमपुर यात्रा के समय इंदिरा गांधी उनके साथ थीं। 5 जनवरी 1964 को नेहरू और इंदिरा गांधी ने अंगुल जिले के टिकरपाड़ा में एक बहुउद्देश्यीय बांध का शिलान्यास किया और फिर हेलीकॉप्टर से भुवनेश्वर पहुँचे। यह नेहरू जी की ओडिशा की अंतिम यात्रा थी, और इस अवसर पर इंदिरा गांधी भी उनके साथ थीं।
भुवनेश्वर और इंदिरा गांधी
भुवनेश्वर में परेड ग्राउंड—जिसे आज इंदिरा गांधी पार्क या आईजी पार्क के नाम से जाना जाता है—उनकी स्मृति से विशेष रूप से जुड़ा है। यहीं उन्होंने एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था, जिसे कुछ स्मृतिचारों में उनकी भुवनेश्वर की अंतिम सार्वजनिक सभा बताया गया है।
एक दुखद संयोग यह भी है कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी दोनों ने अपनी हत्या से एक दिन पहले भुवनेश्वर का दौरा किया था। यह तथ्य ओडिशा को उनके राजनीतिक जीवन के अंतिम चरण से जोड़ता है।
कांग्रेस और ओडिशा की राजनीति
इंदिरा युग में ओडिशा की कांग्रेस राजनीति का केंद्र बिंदु नंदिनी सतपथी और जे. बी. पटनायक जैसे नेता बने। नंदिनी सतपथी को इंदिरा गांधी के करीबी माना जाता था, और वे राज्य की कांग्रेस राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति थीं।
इस काल में ओडिशा की राजनीति में कांग्रेस का प्रभाव बढ़ा, जबकि बीजू पटनायक और उनके समर्थकों ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को चुनौती दी। यही प्रतिस्पर्धा आगे चलकर ओडिशा की राजनीतिक पहचान को आकार देने में सहायक रही।
स्मरण और विरासत
इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। दिल्ली के शक्ति स्थल पर उनके परिवार और कांग्रेस नेता नियमित रूप से श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
ओडिशा के लिए इंदिरा गांधी केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री नहीं थीं; वे नेहरू परिवार की वह कड़ी थीं, जिन्होंने राज्य की विकास यात्रा, कांग्रेस राजनीति और बीजू पटनायक के नेतृत्व वाले विपक्षी राजनीतिक प्रयोग—दोनों को प्रभावित किया। उनकी पुण्यतिथि इसलिए ओडिशा में भी एक राजनीतिक और ऐतिहासिक स्मरण का दिन बनी हुई है।

