मारवाड़ी युवा मंच कटक शाखा का गौरवशाली, स्वर्णिम इतिहास, दूसरी कड़ी
नन्द किशोर जोशी,पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच,सत्र 1991-94
1985 में अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच का प्रथम राष्ट्रीय अधवेशन गौहाटी में आयोजित हुआ था जनवरी में। उसके कुछ दिन पहले गौहाटी से एक टीम युवा मंच की शाखा विस्तार हेतु मुझे संपर्क की कटक आकर । मैंने इसके बारे में पिछली कड़ी में जिक्र किया था। चूंकि 1985 के जनवरी में कटक मारवाड़ी युवा मंच का गठन केवल एडहोक समिति के रुप में किया गया था, कोई कार्यकर्ता नहीं चयन किए गए थे । स्वर्गीय अर्जुन अग्रवाल एडवोकेट के बड़े बेटे बिनोद अग्रवाल का विवाह पश्चात मेघालय की राजधानी शिलोंग जाने का सपत्नीक कार्यक्रम था,गौहाटी अधिवेशन में शामिल होने का कार्यक्रम था, अतएव हमने सोचा कि उनके कटक वापसी पश्चात ही मारवाड़ी युवा मंच के बारे में आगे की रुपरेखा के बारे में विचार किया जायेगा। लेकिन उन्होंने कटक वापसी पश्चात भी मारवाड़ी युवा मंच के बारे में, अधिवेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।ऐसे में 1985 में गठित एडहोक समिति निष्क्रिय हो गयी।गौहाटी से हमारा कोई संपर्क नहीं रहा।
तत्पश्चात 1988 अप्रैल में अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच का दूसरा अधिवेशन दिल्ली में आयोजित था। उसके तीन महीने पहले जनवरी में गौहाटी से एक 3 सदस्यों की टीम कटक पधारी शाखा विस्तार हेतु।इन 3 सदस्यों की टीम ने कटक पहुंच कर
मुझसे संपर्क किया,6 जनवरी 1988 के दिन सुबह 10 बजे।वे लोग जांवलियापट्टी के अशोक भवन में ठहरे हुए थे।
उन्होंने मारवाड़ी युवा मंच के बारे में विस्तार से बताया।असम में मारवाडियों की ताज़ा तरीन स्थिति के बारे में संपूर्ण जानकारी दी। मुझसे युवा मंच के गठन में सहयोग मांगा।उनसे चर्चा पश्चात मैंने मन बना लिया कि इस नेक कार्य में मुझे पूरी मदद करनी चाहिए।मेरी उनसे भेंट कराने में मुख्य भूमिका रही स्वर्गीय चौथमल जी चोटिया के सुपुत्र बिनोद चोटिया की।
हमारी वार्ता में यह तय हुआ कि आज संध्या 8 बजे जांवलियापट्टी स्थित जैन धर्मशाला में मारवाड़ी युवा मंच गठन के लिए मीटिंग मैं बुलाऊंगा।दोपहर 12 बजे के आसपास मैं वहां से निकल कर काम में लग गया।उन दिनों भी भारत में मोबाइल फोन नहीं आया था। अतः सबसे पहले मैंने बड़े भाई जयराम जोशी एवं मास्टरजी श्याम सुंदर जी शर्मा से बात की ,उनको सारी बातें विस्तार से समझाया,वे राजी हुए 6 जनवरी,1988 की मीटिंग को सफल बनाने के लिए।
इसके पश्चात मैंने मेरे मारवाड़ी हाई स्कूल के 1973 मेट्रिक बैच के सहपाठियों से संपर्क किया। कुछ लोगों से फोन पर और कुछ लोगों के दुकान, कार्यालय में जाकर।सभी को असम में मारवाडियों के हालात पर विस्तार से जानकारी दी।सभी ने मुझे संध्या 8 बजे वाली मीटिंग में आने का भरोसा दिया। इनके अलावा मेरे कुछ अन्य दोस्तों से भी मैंने संपर्क किया, मीटिंग में आने का निमंत्रण दिया।
इसतरह 6 जनवरी,1988 की संध्या समय जैन धर्मशाला में मारवाड़ी युवा मंच की शाखा गठन हेतु मीटिंग हुई। जैन धर्मशाला के होल में मीटिंग हुई।पूरा होल युवाओं से खचाखच भरा हुआ था।गौहाटी से पधारे पवन सीकरीया , विनोद मोर, राजेश शर्मा ने मीटिंग को संबोधित किया।
उपस्थित सभी युवाओं को असम में मारवाड़ी विरोधी,भारत विरोधी गतिविधियों की जानकारी पूरी-पूरी मिली।सभी ने स्थिति की नजाकत को समझते हुए मारवाड़ी युवा मंच के गठन पर दिलचस्पी दिखाई। मैंने भी सभा को संबोधित किया।गौहाटी से पधारे युवाओं ने अपने संबोधन में कहा कि असम से लेकर बंगाल, ओडिशा के कटक तक ,आज की युवाओं की सभा सबसे ज्यादा शानदार, लाजवाब रही संख्या बल से भी , गुणात्मक दृष्टिकोण से भी। मतलब वे सारे कटक शाखा की प्रथम मीटिंग देखकर गदगद हुए।
गौहाटी से पधारे युवा नेतृत्व के आग्रह पर मारवाड़ी युवा मंच कटक शाखा का विधिवत गठन किया गया। प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी, कोषाध्यक्ष, कार्यकारिणी समिति में सदस्यों को चयन किया गया। मैंने सहपाठी पुरुषोत्तम अग्रवाल का नाम प्रथम सभापति के रुप में प्रस्ताव दिया, सेक्रेटरी के रुप में दूसरे सहपाठी कैलाश प्रसाद सांगानेरिया का नाम प्रस्तावित किया और कोषाध्यक्ष के रुप में सहपाठी दीन दयाल क्याल के नाम का प्रस्ताव दिया। उपरोक्त तीनों ही नाम सर्वसम्मति से चयनित किए गए। पुरुषोत्तम अग्रवाल ने सभापति के तौर पर सभा को संबोधित किया।
कार्यकारिणी समिति में मेरे सहपाठी बिमल सिंघानिया, श्याम सुंदर सीकरीया, श्याम सुंदर जाजोदिया रहे।इनके अलावा कार्यकारिणी सदस्य के रुप में चयनित किए गए रमण बगड़िया,श्याम सुंदर शर्मा ,तेलंगा बाजार, जयराम जोशी, सज्जन अग्रवाल, एडवोकेट,गुलझारी लाल लढानिया, गिरधारी लाल शर्मा, बिनोद कुमार चोटिया, नन्द किशोर जोशी इत्यादि। श्याम सुंदर शर्मा मास्टरजी एवं अन्य 4 लोग सलाहकार रहे।
मारवाड़ी युवा मंच गठन के तुरंत पश्चात हमने वार्षिक सदस्यता शुल्क पर विचार विमर्श किया। सदस्यता शुल्क सालाना रखा गया 120 रुपए।शाखा गठन पश्चात गौहाटी से पधारे साथियों ने आगामी मारवाड़ी युवा मंच के दूसरे अखिल भारतीय अधिवेशन में आने के लिए उपस्थित सभी सदस्यों को निमंत्रण दिया। सभागार में उपस्थित अधिकांश लोगों ने दिल्ली अधिवेशन में शामिल होने की इच्छा जाहिर की।

7 जनवरी,1988 को सुबह जलपान पर मित्र श्याम सुंदर सीकरीया के निमंत्रण पर गौहाटी से पधारे युवा उनके घर पर शामिल हुए। कुछ दोस्तों के साथ मैं भी उस जलपान बैठक में शामिल हुआ। तत्पश्चात वे भुवनेश्वर की मायुमं बैठक में शामिल होने के लिए प्रस्थान किये।
भुवनेश्वर मायुमं बैठक का आयोजन वहां के राम मंदिर में हुआ था। मैंने भी इसके लिए प्रयास किया था। वहां बैठक में 10-15 उत्साही सदस्य शामिल हुए। सुरेन्द्र लाठ भुवनेश्वर मारवाड़ी युवा मंच के प्रथम सभापति बने।आगे जाकर सुरेंद्र लाठ भाजपा की तरफ से राज्यसभा के सांसद भी बने और आजकल संबलपुर में अपने आवास पर रहते हैं। क्रमशः


