सोनिया गांधी ने बाजपेयी को पटका—इंजीनियर श्याम सुंदर पोद्दार एमबीए,भूतपूर्व महा मंत्री जादवपुर विश्वविद्यालय स्टूडेंट्स यूनियन
सोनिया गांधी ने जब कांग्रेस में प्रवेश किया, तो कांग्रेसी लोग कांग्रेस छोड़ भाग रहे थे। उनके राजनीति में उतरने पर ज्योति बसु ने तीखा व्यंग किया था कि सोनिया गांधी एक गृह वधू है। वह क्या कर लेगी। तब ऑस्कर फर्नांडीज़ ने ज्योति बसु को जवाब दिया कि वह लाल क़िले पर तिरंगा फहरायेगी। वह कामयाब हुई।
अटल बिहारी बाजपेयी जैसे राजनीतिके खिलाड़ी को पटका ही। उनके विदेशी सोनिया गेम को पलट कर विवेका नंद की भगिनी निवेदिता बाजपेयी से सत्ता छीन ली। कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बना दी। फिर आडवाणी को हराया व दूसरी बार सरकार बना ली। २०१४ में कांग्रेस पराजित ही नहीं धरासायी हो गयी। कांग्रेस २०६ से ४० पर आ गयी। यह इसलिए हुआ की कॉमनवेल्थ गेम से लेकर टेलीकॉम स्कैम कॉल ब्लॉक स्कैम के विरुद्ध अनिल केजरीवाल ने ऐसा आंदोलन खड़ा किया कि लोग कांग्रेस मुक्त भारत चाहने लगे।

केजरीवाल के आंदोलन का उसे फायदा मिला। वह दिल्ली का राजा बन गया। सारे भारत में उसका संगठन नहीं था। केजरीवाल कांग्रेस बिरोधी आंदोलन का लाभ मुख्य बिपक्षी दल बीजेपी ले गई व पूर्ण बहुमत के साथ-साथ एनडीए की सरकार बनायी। २०१९ के चुनाव में भी कांग्रेस ४० के पास रह क्योंकि जनता कांग्रेसमुक्त भारत के प्रभाव से उभरी नहीं थी। २०२४ me जब लोग कांग्रेस मुक्त भाव से उभरे तो कांग्रेस ४० से १०० पर पहुँच गई। सोनिया गाँधी की महत्वपूर्ण सफलता है इंडी गठबंधनों के झंडे तले सभी विरोधी दल को एकत्रित करना। उसमे वह कामयाब रही। सभी दलों ने राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार कर लिया। उत्तर प्रदेश में काँग्रेस इतनी कमजोर हो गई थी। अमेठी भी हार गई। पिछले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र २ सीट मिली।
उत्तर प्रदेश से कांग्रेस साफ़ हो गयी। किंतु लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी ने अपनी राय बरेली सीट छोड़ दी। राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश में फिर प्रतिष्ठित किया। खोई हुई अमेठी में कांग्रेस के लिए फिर जीती। आज उत्तर प्रदेश से पूरी तरह उखड़ चुकी है। कांग्रेस के ६ सांसद है। मल्लिकार्जुन खड़गे का यह कहना मैं सोनिया गांधी की कृपा से अध्यक्ष बना हूँ। इसका मतलब यह है कांग्रेस की इतनी पराजयों के बाद भी सोनिया गांधी का कांग्रेस पर शत प्रतिशत नियंत्रण है। २०१४ की तुलना में भाजपा २०२४ में बहुत कमजोर हो गयी है। उत्तर प्रदेश का चुनाव बीजेपी बिहार की तरह जीत सकती है। लालू राज की तरह अखिलेश राज की वापसी का लोगो को भय है। पर २०२९ का चुनाव जीतने के लिए मोदीजी को हिमाचल राजस्थान मध्यप्रदेश कर्नाटक सब के सब चुनाव जीतने होंगे क्योकि २०४० से १०० सीट कम हो गई तो सता में बने रहना कठिन होगा।

