दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लोकतांत्रिक देश भारत मे 1952 से लेकर 2026 तक कोई साधारण चुनाव स्थगित नहीं हुआ, लेकिन भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी प्रेसिडेंट का चुनाव स्थगित हुआ क्यों?
विशिष्ट संवाददाता
आज भुवनेश्वर में भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी प्रेसिडेंट के पद का चुनाव होना था, नहीं हुआ, आखिर क्यों नहीं हुआ? इसके पीछे कुछ मठाधीशों की मनमानी, मनमर्जी काम आयी।वे चाहते थे और चाहते रहे हैं कि भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी प्रेसिडेंट उनकी मनमर्जी का हो,उनकी आज्ञानुसार चले,कभी स्वाधीन विचार नहीं रखे। दूसरे शब्दों में कहें तो उनकी अंगुली पकड़कर चले और उनकी गुलामी हमेशा करता रहे।
लेकिन कमल अग्रवाल के प्रेसिडेंट पद पर खड़े हो जाने पर तथाकथित मठाधीशों में खलबली मच गई।वे समझ गए कि अब अपनी मठाधीशी गई समझो । युवा समाजसेवी,उद्यमी ,साफ सुथरी छवि वाले कमल अग्रवाल के खड़े होने भर से मठाधीशों में खौफ इतना व्यापक हुआ कि वे समझ गए कि अब हमारी जमींदारी,दुकानदारी बंद होने का समय आगया है।अतएव एनकेनप्रकारेण मठाधीशों ने चुनाव समिति पर व्यापक असर डाल कर चुनाव को बाधित कराया, स्थगित कराया।

भारत में आजादी पश्चात प्रथम लोकतांत्रिक साधारण चुनाव 1952 में शुरु हुए संविधान के तहत नियम कानून के अंतर्गत।1952 से लेकर आजतक यानि 2026 तक भारत में अनेक लोकसभा चुनाव हुए, विभिन्न विधानसभा के चुनाव हुए। लेकिन आजतक कोई साधारण चुनाव कभी भी स्थगित नहीं हुआ।
यहां तक कि 1999 के भारत पाकिस्तान कारगील युद्ध के दौरान भी घोषित साधारण चुनाव यानि लोकसभा चुनाव स्थगित नहीं हुआ। भारत के इलेक्शन कमीशन ने लोकसभा भंग के निर्धारित समय 4 महीने के अंदर लोकसभा चुनाव करवाए।एक बार फिर से वाजपेई जी भारत के प्रधानमंत्री बने ।
दूसरी घटना का जिक्र करना चाहूंगा कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में कोरोना काल का उच्चतम समय रहा ।भारत समेत पूरे विश्व में कोरोना महामारी फैली हुई थी। हजारों लोग भारत में कोरोना काल में मारे गए।पूरे विश्व में लाखों लोग मारे गए।
लेकिन भारत के चुनाव आयोग ने बंगाल विधानसभा चुनाव को स्थगित नहीं किया और निर्धारित समय पर वहां चुनाव कराया गया।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी के प्रेसिडेंट का चुनाव क्या भारत के लोकसभा चुनाव और बंगाल के विधानसभा चुनाव से भी बड़ा चुनाव है ,जो यहां स्थगित करना पड़ा,वो भी बेवजह से।
सवाल यह भी उठता है कि भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी के मठाधीश भारत के चुने हुए प्रतिनिधियों से भी बड़े हैं या चुनाव समिति भारत की इलेक्शन कमीशन से भी बड़ी है। अतः जनमत की आवाज समझकर जितना जल्दी हो सके लोकतांत्रिक तरीके से प्रेसिडेंट बीएमएस का चुनाव करायें,इसी में सभी की भलाई है।

