27 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व पर्यटन दिवस हमेंयाद दिलाता है कि यात्रा केवल नई जगहों को देखनानहीं, बल्कि उन्हें गहराई से अनुभव करना भी है!ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या सभी प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सूक्ष्म स्तर पर हमारे लिए लाभदायकहैं?
अक्सर हम छुट्टियों की योजना बनाते समय शानदार वास्तुकला, ऐतिहासिक या सांस्कृतिकमहत्व, याप्राकृतिक सुंदरता देखते हैं।लेकिन एक और पहलू है जिस पर ध्यान नहीं जाता- ‘किसी स्थान के सूक्ष्म स्पंदन’।
महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय(MAV) के शोध के अनुसार, प्रत्येक स्थान के अपने सूक्ष्म स्पंदन होते हैं, जो वहां आने वाले लोगों को प्रभावित करते हैं। नकारात्मक स्पंदनों वाले स्थानों पर जाने से पर्यटकों में थकान, भारीपन, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने पर्यटकों का सर्वेक्षण और ‘ऑरा एंड एनर्जी स्कैनर’ का उपयोग करके दुनिया के पांच प्रसिद्ध स्थानों के आभामंडल (ऑरा) को मापाऔर पाया कि किसी में भी सकारात्मक ऊर्जा नहीं थी।उदाहरण के लिएस्टोनहेंज नामक प्रसिद्ध ब्रिटिश स्मारक (कब्रिस्तान से जुड़ाव) और पीसा की झुकी मीनार (झुकी हुई संरचना और पास में स्थित कब्रिस्तान) में नकारात्मक ऊर्जा दर्ज की गई। कोलोसियम (रक्तपात और हिंसा का इतिहास) जैसे स्थानों में भारी नकारात्मक ऊर्जा दर्ज की गई। भारत के कुछ बहुत लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर भी विभिन्न कारणों से नकारात्मक ऊर्जा के आभामंडल दर्ज किए गए।

इसके विपरीत, आध्यात्मिक स्थानों के परिणाम बेहद सकारात्मक थे। दक्षिण भारत के एक प्रसिद्ध मंदिर में 271 मीटर का सकारात्मक आभामंडल दिखाई दिया। भारत की आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे स्थलों की बहुतायत है।आध्यात्मिक शोध के अनुसार, गंगा और यमुना नदियां अपने आसपास के नकारात्मक प्रभावों के बावजूद अपनी सकारात्मकता बनाए रखती हैं। 2019 का कुंभ मेला इसका एक विशेष उदाहरण है: शोधकर्ताओं ने दर्ज किया कि जब त्रिवेणी संगम पर शाही स्नान में लाखों लोगों ने भाग लिया, तो नदी की सकारात्मकता आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गई थी, मानो वह भक्तों को आध्यात्मिक लाभ प्रदान करने के लिए ही हो।इसके विपरीत, दुनिया भर के जिन जल स्रोतों को पवित्र नहीं माना जाता है, उनमें नकारात्मक ऊर्जा का आभामंडल पाया गया।
यह शोध पर्यटन को देखने का एक अलग दृष्टिकोण प्रदान करता है – यात्रा को केवल हमारा मनोरंजन ही नहीं, बल्कि हमारा आध्यात्मिक पोषण भी करना चाहिए। पर्यटक अपनी यात्रा की योजना में आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक स्थानों को शामिल कर सकते हैं – जैसे कि मंदिर, पवित्र नदियां और कुंभ मेले जैसे आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण आयोजन। नई चीजों की खोज करने के साथ-साथ यह आंतरिक नवीनीकरण का भी एक अवसर बन सकता है।
इस शोध का संदेश इतिहास या संस्कृति को नकारना नहीं है, बल्कि अधिक जागरूकता के साथ यात्रा करना है। अंततः, सबसे अच्छी यात्रा वही है जो हमें न केवल तस्वीरें और स्मृतियां दे, बल्कि आंतरिक शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक स्वास्थ्य भी प्रदान करे।
-श्री. शॉन क्लार्क, शोध प्रमुख, महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय, गोवा

