धूम्रपान का अदृश्य आध्यात्मिक प्रभाव: विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस पर एक जागरूकता संदेश

सिगरेट भले ही एक व्यक्ति के हाथ में हो, लेकिन उसका धुआं सिर्फ उसी तक सीमित नहीं रहता। वह आसपास की हवा में घुलकर परिवार, सहकर्मियों और अन्य लोगों को भी प्रभावित करता है। 26 सितंबर को मनाया जाने वाला ‘विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस’ हमें यह समझने का अवसर देता है कि ‘धूम्रपान केवल एक व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि अध्यात्मऔर पर्यावरण से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या भी है’।

 

गोवा स्थित महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय ने यह अध्ययन करने के लिए एक प्रयोग किया कि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के पास खड़े धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति पर सिगरेट के धुएं का क्या प्रभाव पड़ता है। प्रयोग में, धूम्रपान न करने वाला व्यक्ति सिगरेट पीने वाले व्यक्ति द्वारा आठ कश (Puffs) खींचने तक उससे लगभग 1 से 1.5 फीट की दूरी पर खड़ा रहा। इसके बाद ‘बायो-वेल’ (Bio-Well) उपकरण और ‘ऑरा और ऊर्जा मापक यंत्र’ का उपयोग करके प्रयोग से पहले और बाद में उसकेसात कुंडलिनी चक्रों और प्रभाामंडल (Aura) की रीडिंग ली गई।

निष्कर्षों के अनुसार, प्रयोग से पहले धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति के पांच चक्र—आज्ञा, विशुद्ध, मणिपुर, स्वाधिष्ठान और मूलाधार—मध्य रेखा (सुषुम्ना नाड़ी की प्रतीक) पर स्थित थे, जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से अनुकूल स्थिति माना जाता है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने के 10 मिनट बाद, शोधकर्ताओं के अनुसार, सिगरेट के धुएं की कष्टदायक ऊर्जा को ग्रहण करने के कारण सभी सात चक्रों का आकार बढ़ गया और वे मध्य रेखा से दूर खिसक गए। 20 और 35 मिनट बाद की रीडिंग में भी नकारात्मक परिवर्तन दर्ज किए गए।

 

‘ऑरा और ऊर्जा मापक यंत्र’ द्वारा किए गए मापन में भी सिगरेट के धुएं के संपर्क के बाद धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति के नकारात्मक ऊर्जा के प्रभामंडल में लगातार वृद्धि दिखाई दी। अध्ययन के अनुसार, ये दुष्प्रभाव केवल धूम्रपान करने वाले तक सीमित नहीं थे, बल्कि पास खड़े व्यक्ति में भी देखे गए, भले ही वह व्यक्ति कुछ मिनट बाद वहां से चला गया हो।

 

हम जिस हवा में सांस लेते हैं, उसे स्वच्छ रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पर्यावरण स्वास्थ्य का अर्थ केवल जंगलों, नदियों और बाहरी प्रदूषण की रक्षा करना नहीं है, बल्कि घर, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों की हवा की आध्यात्मिकगुणवत्ता भी इसमें शामिल है।

 

स्वच्छ हवा हमारी सबसे मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एन्वॉयर्नमेंटल हेल्थ’ (IFEH) भी तंबाकू नियंत्रण और घर और बाहर की हवा की गुणवत्ता की रक्षा को पर्यावरणीय स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण घटक मानता है।

 

*संदेश सरल है :* धूम्रपान छोड़ने से न केवल धूम्रपान करने वाले की, बल्कि उसके आसपास के लोगों की भी रक्षा होती है। हर न पी गई सिगरेट का मतलब है हवा में कम धुआँ और स्वच्छ, स्वस्थ वातावरण की ओर एक कदम।

 

इस 26 सितंबर को, सिगरेट के धुएं के बजाय स्वच्छ हवा को चुनें। हमारे द्वारा पीछे छोड़ी गई स्वच्छ हवा से एक निरोगी वातावरण की शुरुआत होती है।

 

– डॉ. (श्रीमती) नंदिनी सामंत, वरिष्ठ शोध दल सदस्य,महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय, गोवा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *