दिल्ली में निट पर आप -कांग्रेस भिडे ओडिशा में निट पर बीजेपी -बीजेडी भिड़े

दिल्ली में निट पर आप -कांग्रेस भिडे
ओडिशा में निट पर बीजेपी -बीजेडी भिड़े

नन्द किशोर जोशी
एक्जिक्यूटिव एडिटर
क्रांति ओडिशा मीडिया

अदने से दिखाई देनेवाले कोक्रोचों की लड़ाई में अब बड़े शातिर खिलाड़ी खुल कर सामने आगये हैं।अब कोक्रोच स्टेडियम की गैलरी में बैठ कर मेच देख रहे हैं।मेच का आनंद ले रहे हैं। मैदान में असली खिलाड़ी हैं एक तरफ के आम आदमी पार्टी, उसके नेता अरविंद केजरीवाल, सांसद संजय सिंह, मनीष सिसोदिया,सौरव भारद्वाज इत्यादि।

स्टेडियम के मैदान में दूसरी तरफ के कांग्रेसी खिलाड़ी हैं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा,के सि बेनुगोपाल , मल्लिकार्जुन खड़गे इत्यादि। इनके अलावा यूपी सपा के अखिलेश यादव, डिंपल यादव,ये एक्सट्रा खिलाड़ी हैं।। इनके साथ लाइन मेन भूमिका में हैं कश्मीर के फारुख अब्दुल्लाह,ओमर अब्दुल्लाह।

इस तरह फिल्डिंग की पूरी सजावट का मैंने संक्षिप्त परिचय दिया।आम आदमी पार्टी आयोजित, अमेरिकी डीप स्टेट प्रायोजित कोक्रोचों के निट कप खेल में पिछले डेढ़ महीने से आम आदमी पार्टी ने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक को सुनियोजित ढंग से अनशन पर बैठाया।

जंतर-मंतर पर भीड़ जुटाने के लिए बंबइया फिल्म के घीसे ,पीटे , पुराने,छूटे हुए कारतुसों का इस्तेमाल किया गया आम आदमी पार्टी द्वारा। इनमें प्रमुख थे शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह, प्रकाश राज,स्वरा भास्कर, कुनाल काबरा इत्यादि। पिछले करीब पौने दो महीने से जंतर-मंतर पर नाटक बाजी,शो चलता रहा। कुछ कुछ नेता आते गए,जाते गए चेहरा दिखा कर।आम आदमी पार्टी का कोक्रोच शो चलता रहा, मीडिया की सुर्खियों में थोड़ा थोड़ा आता रहा। मतलब खेल के मैदान में एकतरफा खेल चलता रहा।
आप नेता सौरव भारद्वाज बोले कि हमने आंदोलन में दिल्ली के सारे खलिहरों , बेकारों को सड़कों पर उतार दिया है।

अचानक राहुल गांधी थकान मिटा कर,अपनी मासिक छुट्टी विदेश में बिता कर ,25 दिन मौज मस्ती भरी जिंदगी को छोड़कर दिल्ली में प्रगट हुए पिछले सप्ताह। राहुल को पता चला कि दिल्ली में केजरीवाल,कोक्रोच काफी सक्रिय होगये हैं।विपक्ष की सारी महफ़िल लूट कर आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में जलवा बिखेरेंगे।

पंजाब के कांग्रेसी सांसदों ने सोमवार को राहुल को लोकसभा में खबर दी कि साहब हम तो लूट गये, कोक्रोचों का आंदोलन दिल्ली की सड़कों पर सफलता के साथ चल रहा है। तुरंत राहुल ने हो-हल्ला कर संसद स्थगित करायी , तुरंत पहुंचे प्रियंका,सांसदों के कुनबे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी आवास के बाहर धरने पर।

मीडिया की व्यवस्था तुरंत आनन-फानन में होगयी। दिल्ली स्थित सारी मेन स्ट्रीम मीडिया के आकर्षण का केंद्र कांग्रेसी राहुल, प्रियंका,खड़गे इत्यादि ले लिए।सपा नेता अखिलेश ने जब टीवी पर समाचार देखा , तुरंत वे भी राहुल, प्रियंका संग दौड़ कर बस में सवार होकर अपना चेहरा मीडिया को दिखा दिये। कश्मीर के फारुख अब्दुल्ला,ओमर अब्दुल्ला बिचारे सड़क पर यानि स्टेडियम की लाइन में खड़े के खड़े रह गये तमाशबीन बन कर, केवल कश्मीर सरकार को पुलिस दे दो अपनी राग अलापते रहे।

अब सवाल यह उठता है कि आम आदमी आयोजित शो में राहुल, कांग्रेसी कैसे बाजी मार लिये।बात यह है कि कांग्रेस ने 1947 से लेकर आजतक भारत पर करीब 60 साल शासन किया। अनेकों राज्यों में आज भी कांग्रेस की सरकार चल रही है। मतलब आम आदमी पार्टी के दिल्ली में ढाई टर्म की सरकार,आज की पंजाब सरकार के एक टर्म की सरकार के भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस का भारत में 60 साल का भ्रष्टाचार भारी पड़ा। कांग्रेस ने मीडिया मेनेजमेंट आम आदमी पार्टी के मुकाबले अच्छा किया। जिसके पास जितनी बड़ी तिजोरी मीडिया के लिए,उसका उतना ही बड़ा काम। मतलब केजरीवाल की सजायी महफ़िल को राहुल ने आखिरी वक्त लूट ली और केजरीवाल हाथ मलते रह गए।

तभी तो आप सांसद संजय सिंह बोले कि हमने सारी मेहनत की ,कोक्रोचों पर मेहनत किया और राहुल गांधी मोदी से मेच फिक्सिंग कर मीडिया अटेंशन प्राप्त किए और हम फेल होगये‌।

अब मैं निट को लेकर ओडिशा की राजनीति पर लिख रहा हूं। ओडिशा बीजेपी के सारे सांसद दिल्ली में इकट्ठा हुए,एक सुर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को डिफेंड किये। बोले धर्मेंद्र प्रधान ने कोई ग़लत कार्य नहीं किया है। अतः इस्तीफा नहीं देंगे धर्मेंद्र प्रधान। सारे भाजपा सांसद बीजेडी पर जमकर बरसे।

भाजपा सांसद बोले कि बीजेडी को निट प्रश्न लिकेज पर बोलने का कोई हक नहीं है। नवीन के दो बार धर्मेंद्र की इस्तीफे की मांग को लेकर भाजपा सांसद बोले कि ओडिशा में नवीन शासन में अनेकों बार प्रश्न पत्र लिकेज हुए हैं,पहले नवीन उस पर जवाब दें, सफाई दें।

भाजपा भुवनेश्वर कार्यालय से राज्य भाजपा नेताओं ने एक विराट प्रदर्शन आयोजित किया कल। भाजपा बेनर पर लिखा था राहुल -नवीन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसतरह दिल्ली से लेकर भुवनेश्वर तक निट मुद्दा छाया रहा, राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा सड़कों पर।

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