जगन्नाथ मंदिरों का शहर है कटक
उत्सवों का शहर है कटक
नन्द किशोर जोशी
एक्जिक्यूटिव एडिटर
क्रांति ओडिशा मीडिया
भारत का तीसरा प्राचीन शहर है कटक। भारत का प्राचीनतम शहर है काशी ,भारत का दूसरा प्राचीन शहर है उज्जैन।कटक 1036 साल पुराना शहर है।कटक को बावन बजार , तिरेपन गली वाला शहर कहा जाता था,आज लेकिन सैंकड़ों बाजार हैं और अनगिनत गलियां हैं कटक में।

ओड़िआ भाषा में कटक नगर धबल टगर बोला जाता था और आज भी बोला जाता है। इसके अलावा कटक को इंग्लिश में मिलेनियम सिटी, सिल्वर सिटि भी बोला जाता है। मैंने कटक का नामकरण किया है मेरी भाषा में जगन्नाथ मंदिरों का शहर कटक, उत्सवों का शहर कटक।
अब मैं जगन्नाथ मंदिरों का शहर कटक पर कुछ बताना चाहता हूं।मेरे पास तथ्यों के मुताबिक कटक में 7 बड़े बड़े जगन्नाथ मंदिर हैं। सर्वप्रथम मैं आरंभ करुंगा बिडानासी से। यहां एक जगन्नाथ मंदिर है।बिडानासी में रिंगरोड से प्रवेश करते ही बायीं ओर जगन्नाथ मंदिर है। यहां पूजा पाठ इत्यादि पुरी जगन्नाथ मंदिर के हिसाब से ही होता है। मैंने इस मंदिर को सर्वप्रथम 48 साल पहले देखा था।

दूसरा जगन्नाथ मंदिर है चांदनी चौक में।इस मंदिर को मैंने बहुत छोटे रुप में आज से करीब 49 साल पहले देखा था। करीब 42 साल पहले जगन्नाथ भक्तों द्वारा मेहनत करके इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है और आज यह मंदिर पुरी की जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर 22 पाहाच मतलब 22 सीढ़ियों के साथ है।22 सीढ़ियों की महिमा काफी है। मेरी पुस्तक जगत के नाथ जगन्नाथ और जगन्नाथ मंदिर परिक्रमा पुस्तकों में इन सीढ़ियों का धार्मिक, पौराणिक दृष्टिकोण से विस्तार से वर्णन किया गया है। यहां हर दिन सैंकड़ों भक्तों के लिए अन्न प्रसाद की व्यवस्था सुलभ रेट में रहती है। यहां विशाल रुप में रथयात्रा का आयोजन होता है।

तीसरा जगन्नाथ मंदिर है कटक के केंद्र स्थल दोलमुंडी में। संभवतः कटक में सर्वप्रथम जगन्नाथ मंदिर में बड़े पैमाने पर प्रसाद की व्यवस्था यहीं से शुभारंभ हुई है। रोजाना सैंकड़ों भक्तों को अन्न प्रसाद यहां सुलभ रेट में प्राप्त होता है। यहां विशाल रथयात्रा का आयोजन कटक शहर में सर्वप्रथम आयोजन किया गया था।आज भी विशाल रुप से रथयात्रा आयोजन होता है।

चौथा जगन्नाथ मंदिर है कटक की पूरब दिशा में महानदी विहार में।यह मंदिर करीब 45 साल पुराना है। मंदिर के साथ बड़ा प्रांगण भी है यहां भक्तों के कार्यक्रमों के लिए।
पांचवां जगन्नाथ मंदिर है राणीहाट में। यहां भव्य रथयात्रा का आयोजन पिछले करीब 10-15 सालों से हो रहा है। यहां की एक खास बात यह है कि यहां रथयात्रा के दिन भगवान के रथों पर छेरा पंहरा हर साल कटक के कलेक्टर ही करते हैं। संपूर्ण रुप से भारतीय वेशभूषा में पगड़ी समेत।

छठा जगन्नाथ मंदिर है मोहम्मदिया बाजार में। यहां भी पहले छोटा मंदिर था। करीब 10 साल से 22 सीढ़ियों के साथ मंदिर नये स्वरूप में आगया है। बहुत छोटी जगह में बहुत भव्य , सुंदर जगन्नाथ मंदिर है।
सातवां जगन्नाथ मंदिर है बाखराबाद में।यह जगन्नाथ मंदिर बाखराबाद की भंडारी साही में है।यह मंदिर छोटा है। लेकिन इस जगन्नाथ मंदिर की मान्यता भी बहुत है भक्तों में।
उपर लिखित करीब करीब सारे जगन्नाथ मंदिरों में रथयात्रा के समय रथ में सवार होकर भगवान नगर भ्रमण करते हैं। किंवदंती है कि मौसी के घर भगवान बलभद्र,बहन देवी सुभद्रा और महाप्रभु जगन्नाथ रथों में सवार होकर जाते हैं।
चांदनी चौक,दोलमुंडी, राणीहाट,सिडिए में इस बार रथयात्रा के साथ साथ उत्सव के उपलक्ष्य में छोटा बड़ा बाजार भी लगा है।पूजा सामग्री के साथ साथ अन्य छोटी मोटी सामग्रियां बिक्री होती है। कहीं कहीं बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले भी लगे हैं। इसतरह पूरा उत्सव का माहौल कटक में लग रहा है। इसके साथ साथ कटक में अनेक मंदिर हैं जहां भगवान बलभद्र,बहन सुभद्रा,महाप्रभु जगन्नाथ विराजमान हैं।कटक शहर में रथयात्रा पर अनेक छोटे छोटे रथ भी निकाले जाते हैं बड़े भक्ती भाव से।
जय जगन्नाथ,जय जगदीश हरे
जगन्नाथ स्वामी नयन पथ गामी भवतु में


