कटक म्युनिसिपाल कोर्पोरेशन के 150 साल
आजकल सेवा खस्ता हाल, सड़कें बदहाल
नन्द किशोर जोशी
पूर्व कांउसिलर,पूर्व नेता प्रतिपक्ष,1979 काउंसिल
प्राचीन, ऐतिहासिक नगरी कटक की म्युनिसिपल काउंसिल गठन के 150 साल पूरे हुए हैं। वर्तमान कांउसिल की तरफ से कल शहीद भवन में इस उपलक्ष्य में एक शानदार कार्यक्रम आयोजित किया गया था।मेयर के नेतृत्व में उपरोक्त कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर ओडिशा के नगर विकास मंत्री शामिल हुए थे।
हम सब का प्रिय नगर कटक 1040 साल पुराना है। इसके 1000 साल पूरे होने के उत्सव में भारत के उस समय के राष्ट्रपति आर वेंकटरमण पधारे थे।बाराबाटी स्टेडियम में मुख्य समारोह आयोजित किया गया था।उस समय कटक को कहा गया था मिलेनियम सिटी।

भारत में सिर्फ काशी और उज्जैन नगर ही कटक से ज्यादा पुराने हैं।आज के भारत के अधिकांश बड़े बड़े शहर अंग्रेजों द्वारा बनाए गए थे और ज्यादा से ज्यादा 300 साल पुराने हैं।
कटक म्युनिसिपाल कोर्पोरेशन ओडिशा में सबसे पुरानी म्युनिसिपैलिटी है। मैंने 1979 में यहां चुनाव लडा और 11 नंबर वार्ड से बहुत ज्यादा वोटों से जीता।उस समय मेरी उम्र केवल 22 साल थी।
ओडिशा का सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ओड़िआ अखबार समाज में मेरी फोटो बेक पेज में छपी थी। मैंने एक मित्र संग दैनिक समाज के संपादक डोक्टर राधानाथ रथ से शिष्टाचार के नाते मुलाकात की थी। मैं उस समय के जीते हुए सारे कांउसिलरों में सबसे कम उम्र का कांउसिलर था और मधुसूदन लो कोलेज के द्वितीय वर्ष में पढ़ता भी था।उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया। तत्पश्चात उन्होंने मेरे बारे में लिखा कि सर्वकनिष्ठ कांउसिलर सर्वाधिक वोट रे विजयी।

हमारी 1979 काउंसिल की कुछ खास बातें अब मैं बता रहा हूं। हमारे समय चेयरमैन थे त्रिलोचन कानुनगो।वे डायरेक्ट चुनाव पूरे कटक वासियों से जीत कर आये थे। डायरेक्ट चेयरमेन चुनाव ओडिशा में सर्वप्रथम ही आरंभ हुआ था।
हमारी काउंसिल के समय पूरे कटक शहर से मच्छरों को मार भगाया गया था।इसका श्रेय चेयरमेन त्रिलोचन कानुनगो लेगये थे। जबकि उसमें पूरी काउंसिल का योगदान था।सभी ने टीम वर्क के हिसाब से प्रयास किया था। इसके अलावा भी अनेक विकास कार्य कटक में किये गये थे।
उसी 1979 काउंसिल में मैंने एक प्रस्ताव दिया था,जो सर्वसम्मति से पारित हुआ था।वह प्रस्ताव यह था कि कटक श्मशान घाट में विद्युत शवदाह गृह की व्यवस्था होनी चाहिए। विद्युत शवदाह गृह की व्यवस्था मैंने कोलकाता के नीमतला घाट में देखी थी 1979 में ही। मैं एक दिन वहां गया था हमारे एक रिश्तेदार की मौत के समय।उस विद्युत शवदाह का उद्घाटन किये थे उस समय के बंगाल के मंत्री सुब्रत मुखर्जी।उनका नेम प्लेट वहां लगा हुआ था।उसी वक्त मैंने ठान लिया था कि कटक काउंसिल में प्रस्ताव दूंगा, प्रस्ताव पारित हुआ सर्वसम्मति से।
उसी विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार हुआ सम्माननीय इला पंडा का।इला पंडा भुवनेश्वर में रहती थी और भुवनेश्वर में विद्युत शवदाह गृह की व्यवस्था पहले नहीं थी।इला पंडा ओडिशा के प्रसिद्ध उद्योगपति बंशीधर पंडा की पत्नी और केन्द्रापड़ा सांसद बैजयंत पंडा की माताजी थीं। इन्हीं की बहू प्रसिद्ध ओड़िआ न्यूज चैनल ओटिवि की मालकिन हैं।

हमारे समय अर्थात 1979 काउंसिल की मासिक काउंसिल बैठक में सभी बिंदुओं पर चर्चा खूब होती थी। प्रायः चर्चा सार्थक हुआ करती थी।कभी कभी गर्मागर्म बहस और नोंक झोंक भी हुआ करती थी।
लेकिन आजकल की जो काउंसिल है उसमें मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चर्चा कम होती है। मासिक बैठकों में बात बात पर हो-हल्ला,नारे बाजी,शोर शराबा इत्यादि ज्यादा होते हैं।यह गणतंत्र के लिए शोभायमान नहीं है।
प्राचीन कटक महानगर की साफ-सफाई का हाल खस्ताहाल है। मच्छरों की भरमार है। ज्यादातर सड़कें टूटी फूटी हैं, बदहाल हैं। सिवरेज सिस्टम भी खस्ताहाल में है।आज की कांउसिल और मेयर से अनुरोध है कि कटक की इन ज्वलंत समस्याओं पर जल्द से जल्द ध्यान दें।ऐसा करने पर कटकियों की सेवा होगी और आशीर्वाद भी मिलेगा।


