सुंदरकांड सफलता के सूत्र पर कथा व्यास दूसरे दिन विजय शंकर मेहता जी बोले –

कटक,दूसरा दिन : सुंदर कांड के हनुमानजी

सफलता के सूत्र हैं श्रम, संयम व समर्पण –

जीवन में सफलता के लिए, सफलता मिल जाने पर और सफलता के बाद क्या किया जाए, जिसने ये सूत्र सीख लिए उसका जन्म सार्थक हो जाता है। परिश्रम के बिना कामयाबी मिलती नहीं, संयम के बिना टिकती नहीं और सरलता व समर्पण के बिना उसका फल, सुख या आनंद प्राप्त नहीं हो सकता। इसलिए जमकर मेहनत करें, संयम रखें और जो भी करें, पूरे समर्पण व परोपकार की भावना के साथ करें। ये सूत्र सिखाते हैं सुंदर कांड के हनुमानजी।

स्थानीय चौधरी बाजार, कटक शहीद भवन पर चल रही हनुमत कथा के दूसरे दिन जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजयशंकर मेहता ने सुंदर कांड के हनुमानजी के माध्यम से सफलता के सूत्रों की व्याख्या की। कहा, जब हम सफलता की यात्रा पर निकलते हैं तो मार्ग में कई प्रकार की बाधाएं आती हैं, लेकिन अपना धैर्य व आत्मविश्वास नहीं खोते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। उद्देश्य स्पष्ट, नीयत साफ तथा भावनाएं समर्पण की हों तो सफलता स्वयं चलकर आ जाती है।

सीताजी की खोज में लंका की यात्रा में हनुमानजी के सामने मैनाक, सुरसा, सिंहिका, लंकिनी आदि के रूप में कई बाधाएं आईं। उनका रास्ता रोकने का प्रयास किया गया, परंतु किसके साथ कैसा व्यवहार करते हुए सतत लक्ष्य की ओर बढ़ते जाएं, हनुमानजी इस कला में बहुत माहिर हैं। इसीलिए विफलता से उनका कभी सामना नहीं हुआ। जिसके जीवन से हनुमानजी जुड़े हों, उसे सफलता तो मिलेगी ही, साथ में शांति और प्रसन्नता भी लेकर आएगी।

आयोजक संस्था के श्री सोंथालिया परिवार… ने बताया कि कथा के अंतिम दिन पं. मेहता हनुमान चालीसा की व्याख्या के माध्यम से जीवन प्रबंधन के सूत्रों की व्याख्या करेंगे।

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