मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के अंतर्गत कानूनी प्रावधान के अनुसार “प्रधानमंत्री – सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार (PM-RAHAT) योजना” को दिनांक 05.05.2025 की अधिसूचना S.O. 2015(E) के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। इसके अतिरिक्त, योजना के कार्यान्वयन के लिए प्रक्रिया प्रवाह, संबंधित हितधारकों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां तथा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश दिनांक 04.06.2025 की अधिसूचना S.O. 2489(E) के माध्यम से जारी किए गए हैं।
इस योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा 13.02.2026 को किया गया और इसे दिनांक 19.02.2026 की अधिसूचना S.O. 952(E) के माध्यम से प्रधानमंत्री – सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार (PM-RAHAT) योजना नाम दिया गया। योजना की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) किसी भी श्रेणी की सड़क पर होने वाली दुर्घटना में शामिल प्रत्येक पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से अधिकतम 7 दिनों तक, प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक के उपचार का प्रावधान किया जाएगा। यह उपचार सुविधा मोटर वाहन के उपयोग से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के सभी पीड़ितों के लिए उपलब्ध होगी।
(ii) प्रत्येक सड़क दुर्घटना पीड़ित को निर्धारित अस्पतालों में गैर-जीवन-घातक मामलों में 24 घंटे तक तथा जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार प्रदान किया जाएगा, जो पुलिस की प्रतिक्रिया पर निर्भर होगा।
(iii) यह वैधानिक योजना किसी भी अन्य केंद्रीय या राज्य स्तर की योजनाओं पर प्राथमिकता रखेगी।
(iv) इस योजना को दो मौजूदा प्लेटफॉर्म—पुलिस अधिकारियों द्वारा दुर्घटना रिपोर्टिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले eDAR (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट) और अस्पतालों द्वारा उपचार, दावा प्रस्तुत करने तथा भुगतान प्रक्रिया के लिए उपयोग किए जाने वाले नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) के TMS 2.0 (लेनदेन प्रबंधन प्रणाली)—के एकीकरण के माध्यम से सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
अस्पतालों को प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना निधि (MVAF) के माध्यम से की जा रही है। यह निधि उन मामलों में सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान से संचालित होती है, जहाँ दोषी मोटर वाहन बीमित होता है, तथा बिना बीमा वाले और हिट-एंड-रन मामलों में बजटीय सहायता के माध्यम से वित्तपोषित होती है।
112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) के साथ एकीकरण के माध्यम से पीड़ित या कोई भी गुड समैरिटन (RAH-VEER) निकटतम निर्धारित अस्पताल की जानकारी प्राप्त कर सकता है, एम्बुलेंस का अनुरोध कर सकता है या स्थिति की आवश्यकता के अनुसार दोनों सेवाएँ प्राप्त कर सकता है। जैसे ही पीड़ित को अस्पताल में भर्ती किया जाता है, NHA द्वारा विकसित हेल्थ बेनिफिट पैकेज के आधार पर उपचार प्रक्रिया शुरू करनी होती है।
उपचार शुरू करते समय समानांतर रूप से TMS प्लेटफॉर्म पर पुलिस द्वारा पीड़ित की प्रमाणीकरण प्रक्रिया भी शुरू की जाती है। अस्पताल TMS पर उपचार आईडी तैयार कर उन्हें eDAR के माध्यम से जिला पुलिस को भेजता है। eDAR पर पुलिस की प्रतिक्रिया के लिए समय सीमा सामान्य मामलों में 24 घंटे तथा जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक होगी, जैसा कि अस्पताल प्रशासक द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
इस योजना के अंतर्गत दुर्घटना की रिपोर्टिंग से लेकर पीड़ित के अस्पताल में भर्ती होने, उपचार, पुलिस प्रमाणीकरण, दावा प्रक्रिया और अंतिम भुगतान तक पूरी प्रक्रिया का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है, जो 112 ERSS प्लेटफॉर्म से शुरू होकर पूरी प्रणाली में उपलब्ध रहता है।
उपचार सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अतिरिक्त अस्पतालों को नामित और शामिल करने के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश दिनांक 20.05.2025 के कार्यालय ज्ञापन S-12018/81/2024 के माध्यम से जारी किए हैं। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दिनांक 04.06.2025 की अधिसूचना S.O. 2489(E) के तहत इस योजना में नामित अस्पताल—जिसमें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अंतर्गत पैनल में शामिल वे अस्पताल भी शामिल हैं जो NHA द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करते हैं—योजना के लिए नामित अस्पताल माने जाएंगे।
09.03.2026 तक आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत NHA के साथ सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या 36,112 है।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दुरुपयोग को रोकने के लिए योजना को TMS 2.0 और eDAR प्लेटफॉर्म के एकीकृत एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो के माध्यम से संचालित किया जाता है, जिससे प्रत्येक मामले में दुर्घटना के विवरण और उपचार रिकॉर्ड के बीच इलेक्ट्रॉनिक लिंक स्थापित होता है। साथ ही, योजना के अंतर्गत नकद रहित उपचार प्रदान करने वाले अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह प्रावधान किया गया है कि राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) द्वारा दावा स्वीकृत किए जाने की तिथि से 10 दिनों के भीतर जिला कलेक्टर या जनरल इंश्योरेंस (GI) काउंसिल द्वारा, जैसा भी लागू हो, भुगतान किया जाएगा।
योजना में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक संरचित शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र का भी प्रावधान किया गया है, ताकि प्रभावी क्रियान्वयन और समय पर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जा सके। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर समग्र निगरानी और समन्वय के लिए जिला सड़क सुरक्षा समितियां (DRSCs) जिम्मेदार हैं। योजना से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए DRSC द्वारा जिला स्तर पर एक समर्पित शिकायत निवारण अधिकारी (GRO) या संपर्क बिंदु नियुक्त किया जाना आवश्यक है।
यदि किसी शिकायत का समाधान जिला स्तर पर संतोषजनक ढंग से नहीं होता है, तो मामले को पहले जिला कलेक्टर के पास और उसके बाद राज्य सड़क सुरक्षा परिषद (SRSC) के पास भेजा जा सकता है, जो संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती है। राष्ट्रीय स्तर पर एक अंतर-मंत्रालयी संचालन समिति योजना के समग्र क्रियान्वयन और निगरानी की देखरेख करती है तथा इसके कार्यान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाले मुद्दों की समीक्षा करती है।
यह योजना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को, विशेष रूप से गोल्डन ऑवर के दौरान, समय पर और निर्बाध चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना है।
यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

