राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन के संस्थापक सोहन गिरि जी ने नई दिल्ली स्थित नागालैंड हाउस में नागालैंड के माननीय राज्यपाल नंद किशोर यादव से सौहार्दपूर्ण भेंट की।
भेंट के दौरान सोहन गिरि जी ने मणिपुर के महान स्वतंत्रता सेनानी पाओना बृजबाशी के जीवन एवं बलिदान पर आधारित पुस्तिका तथा “जय श्री राम” अंकित अंगवस्त्र भेंट स्वरूप प्रदान किया। पाओना बृजबाशी जी को मणिपुर के वीर योद्धाओं में विशेष स्थान प्राप्त है।
उन्होंने वर्ष १८९१ के एंग्लो-मणिपुर युद्ध में मातृभूमि की रक्षा हेतु अद्वितीय साहस और वीरता का परिचय दिया तथा राष्ट्र एवं स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान अर्पित किया। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति जन-जन तक पहुँचना अत्यंत आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी उनके त्याग, साहस और देशप्रेम से प्रेरणा प्राप्त कर सके।

सोहन गिरि जी ने कहा कि वर्ष २०१४ से पूर्व देश में केवल सीमित क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को ही प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाता था, जबकि अनेक वीर योद्धाओं, जनजातीय नायकों तथा विभिन्न प्रांतों के स्वतंत्रता सेनानियों को इतिहास में उचित स्थान नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल कुछ नामों तक सीमित नहीं थी, बल्कि देश के प्रत्येक क्षेत्र के असंख्य वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान देकर राष्ट्र की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में भूले-बिसरे क्रांतिकारियों, जनजातीय वीरों और स्वतंत्रता सेनानियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में संग्रहालयों की स्थापना, भगवान बिरसा मुंडा जयंती को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाना, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों और वीरों को राष्ट्रीय पहचान देना तथा नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराने जैसे अनेक कार्य किए गए हैं।
सोहन गिरि जी ने कहा कि आज देश के विभिन्न प्रांतों के वीर क्रांतिकारियों की गाथाएँ जन-जन तक पहुँच रही हैं। यह केवल इतिहास का पुनर्स्मरण नहीं, बल्कि भारत की बलिदानी परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभावना का पुनर्जागरण है। ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रनिर्माण, देशभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरित करेंगे।
भेंट के दौरान सामाजिक, आध्यात्मिक एवं जनकल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। साथ ही राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक जागरूकता, समाजसेवा एवं जनहित से संबंधित अनेक योजनाओं और भावी पहलों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

