केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से कहा, अपनी महत्वाकांक्षाओं को पुनर्परिभाषित करें, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और हरित ऊर्जा को अपनाएं ताकि प्रौद्योगिकी क्षेत्र को 2035 तक एक ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंचाया जा सके

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र से अपनी महत्वाकांक्षाओं को पुनर्परिभाषित करने और 2035 तक एक ट्रिलियन डॉलर के अवसर पैदा करने का लक्ष्य निर्धारित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा केंद्रों और स्वच्छ ऊर्जा द्वारा परिभाषित युग में आगे रहने के लिए उद्योगों को नए नवाचारों को अपनाना होगा।

वे आज नई दिल्ली में नीति फ्रंटियर टेक हब की प्रमुख रिपोर्ट ‘रीइमैजिनेशन अहेड’ के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत को 2030 तक कम से कम 10 गीगावॉट क्षमता वाला डेटा सेंटर बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए और खुद को एआई-सक्षम प्रौद्योगिकी सेवाओं के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की प्रगति व्यावहारिक एआई, बड़े पैमाने पर कौशल विकास, घरेलू मूल्य सृजन और देश की प्रतिभा को बनाए रखने पर निर्भर करती है।

श्री गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत में लगभग एक अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जो दुनिया में प्रति व्यक्ति डेटा खपत के मामले में सबसे अधिक में से एक है और देश तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी को अपना रहा है। इस स्थिति ने विस्तार के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। किफायती डेटा, 5जी की शुरुआत और आगामी 6जी क्षमताओं ने भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है, जिससे 250-300 अरब डॉलर के प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत बुनियादी ढांचा में हुए सुधारों ने इस वृद्धि को गति प्रदान की है। प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 1999 की नई दूरसंचार नीति का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि किफायती कनेक्टिविटी ने डिजिटल परिवर्तन की नींव रखी। उन्होंने 2014 के बाद भारत के एकीकृत राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के सुदृढ़ीकरण का भी उल्लेख किया, जिसकी अब स्थापित क्षमता 500 गीगावॉट है, जिसमें 250 गीगावॉट स्वच्छ ऊर्जा शामिल है।

पारदर्शी रिवर्स बिडिंग के समर्थन से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेजी से विस्तार हुआ है। इससे सौर ऊर्जा की दरें घटकर लगभग 2.31 रुपये–2.41 रुपये प्रति यूनिट और पवन ऊर्जा की दरें लगभग 2.5 रुपये प्रति यूनिट हो गई हैं। भारत अब 6 रुपये प्रति किलोवॉट घंटे से कम की दर पर 24 घंटे स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करता है और इसका लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।

मंत्री ने कहा कि हाल ही में बजट में की गई घोषणाओं के तहत कुछ निवेशों पर 2047 तक आयकर छूट देने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विदेशी मुद्रा प्रवाह और रोजगार सृजन को और बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र, विशेष रूप से डेटा केंद्रों से संबंधित, को एक बड़ा बढ़ावा मिलेगा। स्वच्छ ऊर्जा का एकीकरण, परमाणु ऊर्जा का विस्तार, पंप स्टोरेज, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया जैसी पहलें भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करेंगी।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर श्री गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवीय क्षमताओं को बढ़ाएगी, लेकिन साथ ही साथ, साइबर सुरक्षा, मानवीय सत्यापन और डेटा भंडारण में निष्पक्षता महत्वपूर्ण बनी रहेगी। उन्होंने एआई को प्रभावी ढंग से अपनाने को सुनिश्चित करने के लिए उद्योग जगत के लीडर्स, नीति निर्माताओं और निर्णयकर्ताओं के बीच एआई शिक्षा के व्यापक प्रसार का भी आह्वान किया।

सरकार को सूत्रधार के रूप में शामिल करते हुए उद्योग-नेतृत्व वाले दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उन्होंने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, डीपीआईआईटी, इन्वेस्ट इंडिया, नीति आयोग, शिक्षा मंत्रालय, कौशल विकास मंत्रालय और नैसकॉम जैसे उद्योग निकायों को शामिल करते हुए संरचित, निरंतर जुड़ाव का प्रस्ताव रखा। उन्होंने उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए हर महीने में एक शनिवार को बेहतर संवाद करने के लिए समर्पित करने का सुझाव दिया।

उन्होंने उच्च तीव्रता वाले एआई और डेटा सेंटर संचालन के लिए आवश्यक सिंगल विंडो क्लियरेंस (मंजूरी), भूमि मंजूरी, बिजली पहुंच और वितरण उन्नयन को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्यों के साथ समन्वित कार्रवाई के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने इन सभी प्रक्रियाओं में केंद्र सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। श्री गोयल ने कहा कि सरकार उद्योग जगत के साथ मिशन मोड में साझेदारी करने के लिए तैयार है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत प्रौद्योगिकी सेवाओं और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में वैश्विक लीडर के रूप में उभरे।

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