माटी की सौन्धी महक बसी जीवन में
सुधियों के सुमन खिले मन मधुवन में
मेंहन्दी रचाऊँ मैं भोले-से अरमान की !
शीश नवाऊँ,गाथा गाऊँ
बेटी मैं राजस्थान की !!
प्रताप शौर्य , मीरा भक्ति विख्यात है
पन्ना का बलिदान सूर्य-सा उदात्त है
शिलालेख इतिहास के गढ़ साक्षात् है
आज सुनाऊँ मैं बातें मान सम्मान की !
शीश नवाऊँ, गाथा गाऊँ
बेटी मैं राजस्थान की !!
लोक देवी-देवताओं के पावन धाम हैं
हवेलियों में भिन्न-भिन्न दृश्य चितराम हैं
आभूषण और वेशभूषा नयनाभिराम हैं
चूड़ी खनकाऊँ मैं सौभाग्य-निशान की !
शीश नवाऊँ, गाथा गाऊँ
बेटी मैं राजस्थान की !!
पर्व त्योहारों की छटा नित नयी निराली है
सुर लहरी आरती की , घर में खुशहाली है
परम्परा और संस्कृति की करें रखवाली है
मंगल बधाऊँ मैं बाँचू पाती आसमान की !
शीश नवाऊँ, गाथा गाऊँ
बेटी मैं राजस्थान की !!
आन-बान और शान की !
शीश नवाऊँ, गाथा गाऊँ
बेटी मैं राजस्थान की !!