पीएम स्वनिधि योजना के तहत सुधार

पीएम स्वनिधि योजना शहरी स्ट्रीट वेंडरों को तीन किस्तों में कार्यशील पूंजी सावधि ऋण प्रदान करती है। पहली और दूसरी किस्त का सफलतापूर्वक भुगतान करने पर, स्ट्रीट वेंडर क्रमशः दूसरी और तीसरी किस्त का ऋण लेने के लिए योग्य हो जाता है। किस्तों में ऋण देने की यह संरचना अधिक ऋणग्रस्तता से बचाती है और लगातार भुगतान करने की आदत को बढ़ावा देती है। इसके अलावा, संशोधित पीएम स्वनिधि योजना में दूसरी किस्त का ऋण सफलतापूर्वक चुका देने वाले स्ट्रीट वेंडरों के लिए यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड पेश किए गए हैं, जिससे वे अपनी वित्तीय और व्यावसायिक जरूरतों को तुरंत पूरा कर सकें। जून, 2020 में इस योजना के शुरू होने से लेकर 20 जनवरी, 2026 तक, 71.57 लाख, 27.28 लाख और 6.61 लाख स्ट्रीट वेंडर लाभार्थियों ने क्रमशः पहली, दूसरी और तीसरी किस्त का ऋण लिया है।

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) द्वारा 2023 और 2025 में किए गए योजना प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन के नतीजों के अनुसार, स्वनिधि कर्जदारों की औसत वार्षिक व्यवसाय से होने वाली आय 2023 और 2025 के बीच लगभग 20 प्रतिशत बढ़ी। इसके अलावा, सभी चक्र में लगभग 30 प्रतिशत कर्जदारों ने बताया कि उनके पास औपचारिक ऋण हैं, जो उन वेंडरों  के लिए क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में इस योजना की भूमिका को दर्शाता है, जिन्हें पहले औपचारिक ऋण तक बहुत कम या बिल्कुल भी पहुंच नहीं थी।

दिनांक 02.02.2026 तक, पूरे देश में यूपीआई से जुड़े रूपे क्रेडिट कार्ड के लिए 15,184 आवेदन मिले हैं और स्ट्रीट वेंडरों को 2,479 क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं।

संशोधित पीएम स्वनिधि योजना के तहत, इस योजना में ऋण देने की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ा दी गई है और इस योजना के लाभ जनगणना वाले शहरों, शहरी इलाकों, आस-पास के शहरी इलाकों आदि तक धीरे-धीरे बढ़ा दिए गए हैं, जिससे आजीविक के अधिक अवसर सृजित होंगे।

राज्य/यूएलबी पात्र स्ट्रीट वेंडरों की पहचान करने और इस योजना के तहत नए आवेदनों को प्रेरित करने के लिए जिम्मेदार हैं। कवरेज बढ़ाने और स्ट्रीट वेंडर लाभार्थियों को अधिक से अधिक शामिल करने हेतु, मंत्रालय ने कई पहल की हैं। इन पहलों में रेडियो जिंगल्स, टेलीविजन और समाचार-पत्र के विज्ञापनों के जरिए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाना शामिल है। राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों को स्थानीय भाषाओं में जानकारी, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री भी नियमित रूप से दी जाती है ताकि स्ट्रीट वेंडरों के बीच इस योजना के लाभों की जानकारी पहुंचाई जा सके और उनका प्रचार-प्रसार किया जा सके। राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों/यूएलबी के साथ नियमित समीक्षा भी की जाती है।

इस योजना के तहत, एमओएचयूए ने स्ट्रीट वेंडरों तक पहुंच बढ़ाने के लिए कई अभियान और कार्यक्रम आयोजित किए हैं। 27 अगस्त 2025 को संशोधित पीएम स्वनिधि योजना को मंजूरी मिलने के बाद, 17 सितंबर 2025 से 15 अक्टूबर 2025 तक यूएलबी में लोक कल्याण मेलों का आयोजन किया गया। इन मेलों में इन योजनाओं की नई विशेषताओं को बढ़ावा दिया गया और वेंडर मोबिलाइज़ेशन, ऋण संबंधी आवेदन जमा करने, तेजी से ऋण बांटने और लाभार्थियों के डिजिटल ऑनबोर्डिंग में सहायता की गई। इसके अलावा, बैंक और यूएलबी दोनों स्तरों पर लंबित मामलों को निपटाने के लिए 3 नवंबर, 2025 से 2 दिसंबर, 2025 तक सभी राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों में मिशन मोड में ‘स्वनिधि संकल्प अभियान’ चलाया गया।

यूएलबी, डिजिटल पेमेंट एग्रीगेटर्स (डीपीए) के साथ मिलकर नियमित डिजिटल साक्षरता शिविर  भी चलाते हैं। डिजिटल ऑनबोर्डिंग को बेहतर बनाने और स्ट्रीट वेंडरों के बीच नकद रहित भुगतान को बढ़ावा देने हेतु, लाभार्थियों को कैशबैक प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं।

यह जानकारी आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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