स्वातंत्र्य वीर सावरकर यदि नहीं होते तो अंग्रेजों की दासता से भारत को मुक्ति नहीं मिलती उस वीर सावरकर को अंग्रेजों के दलाल जवाहर लाल नेहरू ने जान से मारने का प्रयास किया उसमे असफल होने पर उनको गांधी हत्या कांड में फँसाया पर नेहरू का मकसद पूरा नहीं हो सका। न्याय मूर्ति आत्मा चरण ने।
उन्हें निर्दोष ही घोषित नहीं किया बल्कि यह भी कहा सावरकर ने देश के लिए बहुत भुगता है इस बात की जाच की जानी चाहिए उनका नाम इस मामले घसीटा गया नेहरू सरकार ने उच्च न्याया लाय में इस निर्णय को चुनौती देने कासाहस नहीं किया पाकिस्तान बनने से बर्बाद मदन लाल पाहवा ने गांधी कोबंटवारे का जिम्मेवार कहते हुए उस पर बम से हमला किया पर गांधी बच गए मदन लाल पाहवा ने अपने सभी साथियों का नाम बता दिया नेहरू ने गांधी को मरवाने के लिए किसी को गिरफ्तार नहीं किया उर अप ना राजनैतिक खेल खेला हिंदू महासभात पर गांधी
हत्याका दोष मढा वीर सावरकरसरकार को शिकायत पत्र लिखना क्या माफ़ी पत्र है कै दी यदि सरकार को पत्र लिखाया है उसको क़ानून की भासा में माफ़ी पत्र कहा जा ता है आज तक राहुल गांधी यह प्रमाणित नहीं कर पाए मी किसी।
भीपत्र में उन्होंने माफ़ीमाँगी राहुल गांधी झूटो का सरदार है कहीं उन्हें। न्यायालय से सजा न दिलवा दे इसलिए लोकसभा का सहारा लेकर झूट बोलते है मेरी दादी ने कहा सावर कर माफ़ी माँग कर जेल से छूटे ऐसा झूट। ऑल कर अपनी दादी को अपमानित कार्य रहा है जिसने सावरकर के बारे में क्या कहा। उनपर पोस्टल स्टाम्प निकाली ऐसी परिस्थिति में। मोदी जी
ने बहुत साहस का काम कर। वीर सावरकर के जन्म दिन पर। नए संसद। का उद्घाटन पहला क़दम है इस कदम के लिए हम यही कह सकते हप्रधान मंत्री हिंदुस्तान कि मुक्ति सूर्य है ।

