तपोभूमि मारवाड़ी क्लब में रामायण
१९५० -२०२५ डायमंड जुबली साल
भक्तों का जमावड़ा सुबह से बड़ी संख्या में

नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर क्रांति ओडिशा मीडिया
१४ वीं कड़ी
मैं आजकल श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ मारवाड़ी क्लब के बारे में रोज लिख रहा हूं।रोज दो कड़ी लिख रहा हूं। पहले दिन की रिपोर्टिंग कड़ी के हिसाब से मैंने नहीं की है।
मारवाड़ी क्लब में आयोजित पारायण संबंधित खबरें मैंने शुभारंभ होने से बहुत पहले से लिखना शुरू किया था। लेकिन कड़ी दर कड़ी शुभारंभ के दूसरे दिन से कर रहा हूं।कल मैंने मुख्यतः जजमानों के बारे में लिखा था।आज मैं शुभारंभ से लेकर अभी तक जितने भी पंडित, व्यासपीठ पर विराजमान हुए थे और हैं उनके बारे में लिख रहा हूं।
सभी दिवंगत,गोलोक धाम में पधारे व्यासजी लोगों को नमन करता हूं। जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से व्यासपीठ की शोभा बढ़ाई , भक्तों में भक्ति रस संचार कराने में महती भूमिका निभाई।
कटक, ओडिशा में सर्वप्रथम सामूहिक श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ का शुभारंभ हुआ था १९५० में मारवाड़ी क्लब में। प्रथम व्यासपीठ पर विराजमान थे काशी के विद्वान पंडित शिवनारायण व्यास।

१९५० में तो मेरा जन्म भी नहीं हुआ था। अतः उस समय का मैं साक्षी नहीं हूं। लेकिन १९७० के दशक में मैंने उनका इसी रामायण दरबार में संध्या समय प्रवचन सुना हूं। विलक्षण प्रतिभा के धनी थे काशी वासी विद्वान पंडित शिवनारायण व्यास जी।
पूरी श्रीरामचरितमानस उनको कंठस्थ थी।उनको श्रीरामचरितमानस पाठ पर पूरे भारत में महारथ हासिल थी।वे अपने प्रवचन में बोला करते थे श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ के इस पृष्ठ पर इस दोहे में यह बात लिखी है।सारे दोहों को कंठस्थ रखना,मुखस्थ रखना बड़ी टेढ़ी खीर है आज के जमाने के हिसाब से। असंभव सा दिख रहा है।
पंडित शिवनारायण व्यास जी द्वारा श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ का जो वृक्षारोपण मारवाड़ी क्लब में १९५० में किया गया था,आज वह वटवृक्ष की भूमिका में पूरी ओडिशा में फ़ैल गया है। करोड़ों रामभक्त उससे लाभान्वित हो रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे।
मैं अब दूसरे व्यासपीठ पर विराजमान परम भक्त की बात बता रहा हूं।इनका नाम है प्रहलाद जी व्यास।पूरे कटक शहर में ये काफी लोकप्रिय थे।इनको लोग आदर से व्यासजी के नाम से ही जानते थे, संबोधित करते थे।इनकी बेटी,इनकी दोयती इनके पुराने फिरिंगि बाजार वाले मकान पर आज भी रहते हैं।इनकी बेटी सभी हम उम्र को भाई के हिसाब से संबोधित करती हैं।
प्रहलाद जी व्यास की आवाज में मधुरता भरी हुई थी।इनकी मीठी आवाज के राम भक्त दीवाने थे।दूर से ही लोग पहचान लेते थे व्यासजी कुछ गा रहे हैं,बोल रहे हैं। रामायण में कहां आवाज को उठाना है, कहां धीमा करना है , शुद्धता के साथ,सारी विद्याएं इनको मालूम थीं।इनको भी मैं नमन करता हूं हृदय की गहराई से।
अब मैं तीसरे व्यासपीठ पर विराजमान विद्वान पंडित जी की बात कर रहा हूं।इनका नाम है पंडित जगदीश उपाध्याय।ये २०१८ में आयोजित श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ में व्यासपीठ पर विराजमान हुए थे। जगदीश जी तेलेंगा बाजार के निवासी हैं।अभी इस साल भी जगदीश जी पाठ में बैठे हुए हैं।
अब मैं चौथे और वर्तमान व्यासपीठ पर विराजमान व्यासजी के बारे में लिख रहा हूं।इनका नाम है परम पूज्य श्रीरामजी महाराज।ये राजस्थान की राजधानी जयपुर में पिछले ५० सालों से रह रहे हैं। श्रीरामचरितमानस पूरे भारत में गा गा कर जनकल्याण कर रहे हैं।ये पहले भी इसी राम दरबार में व्यासपीठ पर दो-तीन बार विराजमान हुए हैं।
इनकी विशेषता यह है कि ये संगीतमय श्रीरामचरितमानस का पाठ करते हैं। क्रमशः

