महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल विवाह मुक्त भारत के लिए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान शुरू किया

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आज (4 दिसंबर 2025) विज्ञान भवननई दिल्ली में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की पहली वर्षगांठ के अवसर पर बाल विवाह मुक्त भारत के लिए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति में किया।

केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने एक ऐसा भारत बनाने के लिए सरकार के दृढ़ संकल्प को दोहराया जहाँ हर बेटी और हर बेटा सम्मानसुरक्षा और समान अधिकारों के साथ अपना भविष्य गढ़ सके।” उन्होंने कहा कि अभियान की पहली वर्षगांठ उपलब्धियों की समीक्षा और भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। बाल विवाह को कानूनी उल्लंघन और नैतिक अन्याय बताते हुएउन्होंने सरकार के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डालाजिससे जन्म के समय लिंगानुपात में सुधारशिक्षा में लड़कियों के नामांकन में वृद्धि और महिलाओं एवं लड़कियों का समग्र सशक्तिकरण हुआ है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि केंद्र सरकार ने बालिकाओं की शिक्षा में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए छात्रवृत्ति हेतु 1,827 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत की बेटियाँ विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और STEM कार्यबल में 43% हिस्सेदारी लड़कियों की हैजो दुनिया भर में सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी में से एक है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओंस्वयं सहायता समूहोंआशा कार्यकर्ताओंएएनएमशिक्षकोंपरामर्शदाताओंवन स्टॉप सेंटरों और नागरिक समाज संगठनों के योगदान की सराहना करते हुएउन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बाल विवाह की व्यापकता को कम करने की दिशा में काम करने का आग्रह कियाताकि यह लगभग न के बराबर हो जाए।

राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने अभियान की समुदाय आधारित और जमीनी स्तर पर केंद्रित प्रकृति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाल विवाह को समाप्त करना सामाजिक उत्तरदायित्व और सामूहिक सतर्कता पर आधारित एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण का मूल आधार है।

श्रीमती ठाकुर ने समय पर सूचना देने और रोकथाम में पंचायतोंधर्मगुरुओंयुवा समूहों और सामुदायिक नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने बेटी बचाओ– बेटी पढ़ाओप्रधानमंत्री मातृ वंदना योजनापोषण अभियान और वन स्टॉप सेंटर जैसी प्रमुख योजनाओं का भी ज़िक्र कियाजिन्होंने ज़मीनी स्तर पर लड़कियों की सुरक्षापोषणअधिकार और सहायता व्यवस्था को मज़बूत किया है। उन्होंने परिवारों और स्थानीय संस्थाओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि किसी भी बेटी की शादी कानूनी उम्र से पहले न होऔर इस बात पर ज़ोर दिया कि बाल विवाह मुक्त भारत अभियान एक सच्चा जन आंदोलन है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिवश्री अनिल मलिक ने उन्नत बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर महत्वपूर्ण अपडेट साझा किएजिससे अब देश भर के 38,000 से अधिक बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओके लिए निर्बाध पहुँच संभव हो गई है। उन्होंने बताया कि नागरिक जिलेवार प्रगति पर नज़र रख सकते हैंअब तक की गई कार्रवाइयों को देख सकते हैं और ऑनलाइन प्रतिज्ञा लेकर भाग ले सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि 26 लाख से अधिक नागरिक और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता पहले ही अभियान की गतिविधियों में प्रत्यक्ष रूप से भाग ले चुके हैंजो मज़बूत जनआंदोलन और बढ़ते सामुदायिक स्वामित्व को दर्शाता है।

 

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