चीन यूएनओ का ताकतवर सदस्य होने के बाद भी विश्व को समझा नहीं सका तिब्बत एक स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है- इंजीनियर श्याम सुंदर पोद्दार, महा मंत्री वीर सावरकर फाउंडेशन

तिब्बत गहरी वर्ष से एक स्वतंत्र राष्ट्र था तिब्बत की सुरक्षा का दायित्व ह भारत सरकार पर था तिब्बत में। हरात के तीन सैनिक आउट पोस्ट थे जो तिब्बत की बाहरी आक्रमणसे रक्षा करते थे यानी तिब्बत केकिग अपनी सुरक्षा के लिए। हॉर्स्ट और निर्भर। थे वहाँ की डाक तारब्यवस्था भी भारत सरकार संचालित कर दी। नेहरू ने भारत की सेना की तिब्बत की चीनी आक्रमण के समय शांत रहने कि का आदेश दिया तिब्बती की जनता के साथ बिश्वासघात किया नेहरू के मानने से क्या होता है आज तक दुनिया के किसी। ही देश को चीन समझा नहीं सका तिब्बत चिन का हिस्सा है। दुनिया आज भी कहती है। तिब्बत एक स्वतंत्र राष्ट्र है दलाइनलामा को नोबल पुस्कर देती है अपनी संसद मेंतिब्बत के समर्थन में प्रस्ताव पास करते है १४ अक्टूबर १९८७ से १३ मार्चट्टक यूरोप के विभिन्न राष्ट्रों ने तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए विभिन्न प्रस्ताव पास किए जर्मनी , स्विट्जरलैंड , इटली, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस आदि राष्ट्रों बम बी तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए प्रस्ताव पास किये तिब्बत की स्वतंत्रता मी लड़ाई जारी रखने के विश्व बिरादरी बी उन्हें। बेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया। चीन तिब्बत उसका एक अंग है इसके प्रमाण स्वरूप १९४९/५० में एक कहानी गढ़ी सातवी शताब्दी में तिब्बत के सम्राट सोंगटसेन की शादी चिन के टांग राज वंश किन
कन्या वेन चंग का बिबाह हुवा इसलिए तिब्बत चीन कयादिकोयी राज वंश किसी राजा के तहत अपनी कन्या देता है तो वहग्रहणयोग्य प्रमाण नहीं है प्रमाण नहीं है ।

यदि किसी रजा की कन्या का ब्याह किसी राजपरिवार मे हुवा तो वह तो वह राज्य उसका तो इस आधार पर। नेपाल का पहले हक होता है। टिबटनपसर चीन का नहीं क्योंकि दुर्बल राजा ही शक्ति शाली रा को अपनी कन्या देकर अपने राज्यकोको सुरक्षित करता था। सन ८२१ में चूँकि राजधानी चंग -अन में ८२२ में तिब्बत की राजधानी लासा में तिब्बत चीन दोनों राष्ट्रोंकी संधि बीवी जिसमें चीन व तिब्बत की सीमा रेखा तय हुवी। Tibbet and China shall guard the present border and the territory over which they each hold sway .All to the east of the present boundary is the domain of great chain.All to west is totally the domain of great Tibet ….Tibetans shall be happy in the land of Tibet, Chinese shall be happy in the land of चिन आज भी लासा म इस संधि का स्तंभ लगा हुवा है जब चीन के इस बचकाने प्रमाण को बिस्वा कन्नड़ ने नकार दिया और सन /८२२ क में बीवी संधि स्वरूप तिब्बत कोयल स्वतंत्र रास्ता के रूप में स्वीकार किया अब छीनने नई कहानी बना कर लाया ७०० वर्ष पूर्व चंगेज ख़ान नेवर तिब्बत को उपहार स्वरूप पदवी प्रदान की थी इस लिए तिब्बत चीन काअंग है तिब्बत की निर्वासित सरकार काविश्व सेकहना है इस तरह की पदवी तो चंगेज ख़ान ने कोरिया वियतनाम बर्मा जापान को दी थी यह एक स्वतंत्र राष्ट्र के साथ मधुर संबंध बनाने कि लिएसम्मान। का आदान प्रदान था। तिब्बत हज़ारो वर्ष से एक स्वतंत्र राष्ट्र था। नेहर बी रूस को ख़ुश करने के लिए साम्यवादी रूस के साम्यवादी छोटे भाई को तिब्बत के साथ बिश्वास घात करकेदे दिया.

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