जब यह मालूम हो गया सुभाष बोस जीवित थे ताइवान में मरे नहीं इसके बाद कहा गए ?एटली के मुख से सुनिए- इंजीनियर श्याम सुंदर पोद्दार , महामंत्री, वीर सावरकर फाउंडेशन

देश भक्त मेल के जनवरी १९९५ संस्करण में धर्मेन्द्र गौड़ ने एटली की१२ अक्टूबर १९५७ में उत्तर प्रदेश केवमुख्य मंत्री गोविंद बल्लभ पंत के अतिथि के रूप में तीन सप्ताह केप्रवास में ललखनऊ में थे इस प्रश्न नेताजी का आता पता क्या है उन्होंने स्पस्ट कहा “ वे रूस में है” इस बात को आगे बढ़ाते हुवे उन्होनेवकहा “ १४ अगस्त्य, १९४५ सुभाष ने अपने सीनियर आफिसर्स को डिनर पर बु लाया सिंगापुर में सिंगापुर में बुलाया वे क्रीम रंग का सूट व लाल रंग की टाई पहन रखे थे वे लगातार सिगरे त पी रहे थे पर शांत थे १७ अगस्त की वे “ जीरो बॉम्बर में बैठेइसमें पायलट व सुभाष थे डैरेन में नेताजी का सारा सामान सोना व आभूषण एक जीप में लोड कर द्दिया गया अनके तीन अंग रक्षक एक हिंदू एकसीखें एक मुस्लिम व जापानी जनरल शेडी वे रूस की सीमा में गए सुभाष ने ज़ब रूस की सीमा में प्रवेश कर गया सभी पाच ३घंटे बाद वापस आगये वी जीरो बॉम्बर के पायलट को खबर दी इसके बाद बीमन। टोक्यो की तरफ़ उड़ गया नेहरू एक तरफ़ तो ख़बर पर ख़बर प्रचारित करता रहा सुभाष बोस मारे गए वही साम्यवादी रूस से कहता था आओ सुभाष बोस को क़ैद में रखो भारत आने मत दो तुमंजो माँगोगे मैंडूंगर पहले नेहरू ने रूस के साम्यवादी भाई।

चीन को भारत मिला अधिकार छिन्नकोंडे दिया हजारोन्वसृष से तिब्बत एक स्वतंत्र देश था उसकी सुरक्षा की जज़िम्मेवारी भारत सरकार की थी तिब्बत में भारत केक्टीन मिलिट्री पोस्ट थे उपप्रधानमंत्री सरदार पटेल बोलते ही रह गए तिब्बत के लोग भारत मी तरफ़ देख रहे है भारत की अपना कर्तव्य पालन करना चाहिए नेहरू ने भारत का तिब्बत कर्तव्य पालन नहीं करके तिब्बत को रूस के छोटे। भाई चीन को फी दिया। की सुरक्षा का सारा सामान रूस से वर्षों तक ख़रीदा जाता रहा नेहरू ने कम्युनिस्ट पार्टी को आगे बढ़ाया।

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