नेहरू का हर समय यह कहना था की सुभाष चंद्र बोस ताइवान वायुयान दुर्घटना में मारे गए जब कि ताइवान वायु दुर्घटना हवाई अड्डे पर सुभाष बाबू के निजी चिकित्सक कर्नेल डॉ राम चंद्र राव उपस्थित थे।
डॉ राव को पहले अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर अगस्त में उन्हें मुल्तान में जेल भेज दिया और फिर वह जब भारत आए तो उन्हें नेहरू ने जेल भेज दिया ।उनके ऊपर चलाए गए मुकदमे का कोई भी रिकॉर्ड नहीं मिला और भुबनेश्वर की जेल में उनको रखा गया था उसका भी रिकॉर्ड गायब कर दिया गया । नेहरू सरकार के सम्मुख उनका दोष सिर्फ यह था की डॉ राव ने हवाई जहाज़ दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु की बात को झूठा साबित कर दिया ।
उनकी ये बात कहे जाने पर ही बीजू पटनायक और संजीव रेड्डी उनको नेहरू के पास ले गए थे।आगे की बात खोसला कमीशन के सामने बेड़ियों में जकड़े डॉ राव ने स्पष्ट कर दिया की पहले हवाई जहाज़ उड़ा था लेकिन कुछ समय बाद ही वह साइगन में जापान की दूसरी हवाई पट्टी पर उतरा । नेताजी विमान से उतर कर आए और उसके बाद वह विमान फिर से उड़ गया।
डॉ राव के अनुसार नेताजी ने जापानियों के द्वारा लाए गए आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से माना कर दिया था और विमान से उतरने के बाद नेताजी सैगन में चार दिन तक रहे ।

