भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी हिंदू माँ की श्रेष्ठ संतान थे, जो ब्रिटिश शासन में हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिये लड़ते रहे। ब्रिटिश शासन में ही हरिद्वार में गंगा नदी को बचाया। बनारस में बनारस हिंदू बिश्वविद्यालय की स्थापना की।
१९१२ में मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली ने भारत के विभाजन की मांग की। उत्तर भारत मुसलमानों का व दक्षिण भारत हिन्दुवो का। हिंदू समाज संगठित नहीं था। मुस्लिम लीग की ग़लत माँग के सामने हिन्दू समाज को संगठित करने के लिये १९१५ में हिन्दू महासभा का गठन किया। कालांतर में इसी हिंदू महासभा में गरम दल के नेता तिलक के शिष्य वीर सावरकर ने हिंदू महासभा के झंडे ब्टेल हिन्दुवो का सैनिकीकरण अभियान चलाया। ब्रिटिश भारत की सेना में ६ लाख हिंदू सैनिकों को प्रवेश कराया। ब्रिटिश सेना में मुसलमान सैनिक ६६ प्रतिशत थे। हिंदू सिर्फ़ ३२ प्रतिशत थे। मुसलमान हिन्दुओं को हमेसा डराते थे कि सेना में हमरा बहुमत है, हम तुम्हें मार देंगे।
वीर सावरकर के हिन्दुओं के सैनिकी करण अभियान के चलते ब्रिटिश सेना में हिन्दुओं का बहुमत हो गया। हिंदू ३२ प्रतिशत से बढ़ कर ६६ प्रतिशत हो गए। जापान हिंदू महासभा के अध्यक्ष क्रांतिकारी रास विहारी बोस ने भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया। जिसका बाद में सुभाष चंद्र बोस ने नेतृत्व कियव देश को स्वतंत्र किया भगत सिंह को फाँसी की सजा हुयी, तब मालवीय जी भगत सिंह को फाँसी न हों, इसके लिए वे वायसराय से मिले। वायसराय ने गांधी जी का पत्र लाने को कहा। गांधीने मालवीय जी को निराश किया। भगत सिंह को बचाने का पत्र नहीं दिया। भगत सिंह को फांसी हो ही गयी।
लेखक – इंजीनियर श्याम सुंदर पोद्दार
महामंत्री, वीर सावरकर फाउंडेशन

