वाराणसी: ऋषि सनातन संघ ने सनातन धर्म के प्रति अपनी अद्वितीय निष्ठा और अदम्य साहस के लिए जाने जाने वाले श्री आशीष तिवारी ‘सनातन’ को संगठन मंत्री के प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त किया है। पूज्यश्री रतन वशिष्ठ जी महाराज ने इस घोषणा के साथ ही श्री तिवारी को ‘सनातन भूषण’ पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान भी किया, जो सनातन धर्म की रक्षा हेतु उनके असाधारण योगदान को मान्यता देता है। इस अवसर पर श्री तिवारी ने संघ में समर्पित रहकर कार्य करने की शपथ भी ली।
आशीष तिवारी की शपथ और जिम्मेदारियां:
संगठन मंत्री के रूप में अपनी नियुक्ति पर, श्री आशीष तिवारी ‘सनातन’ ने पूरे ऋषि सनातन संघ के समक्ष यह शपथ ली: “मैं, आशीष तिवारी, यह प्रतिज्ञा करता हूं कि ऋषि सनातन संघ में संगठन मंत्री के रूप में अपनी सभी जिम्मेदारियों का पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ पालन करूंगा। मैं सनातन धर्म के सिद्धांतों, मूल्यों और आदर्शों की रक्षा के लिए सदैव कटिबद्ध रहूंगा। संघ के नियमों और मर्यादाओं का पालन करते हुए, मैं इसके विस्तार और संगठन हित के लिए निरंतर प्रयासरत रहूंगा। गोवंश की रक्षा, धर्म विरोधियों का प्रतिकार और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार ही मेरा जीवन लक्ष्य होगा। जब तक मेरे शरीर में प्राण है, मैं इस धर्म की सेवा में समर्पित रहूंगा।”
उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
* संघ का विस्तार: नए सदस्यों को जोड़कर और उन्हें सनातन धर्म के प्रति प्रेरित कर संघ की पहुंच बढ़ाना।
* धर्म रक्षा अभियान: सनातन धर्म पर होने वाले किसी भी आक्षेप या गलत टिप्पणी का त्वरित और प्रभावी ढंग से प्रतिकार करना।
* सामाजिक समरसता: सनातन मूल्यों के आधार पर समाज में एकता और सद्भाव स्थापित करने में योगदान देना।
* गोवंश संरक्षण: गोकशी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और जन जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाना।
* धार्मिक स्थलों की सुरक्षा: मंदिरों और अन्य पवित्र स्थलों से संबंधित विवादों में संघ का प्रतिनिधित्व करना और उनकी रक्षा सुनिश्चित करना।
आशीष तिवारी का धर्म के प्रति अदम्य समर्पण:
श्री तिवारी ने अपनी निडरता का परिचय देते हुए हाल ही में मिर्जापुर की सरोज सरगम और उनकी टीम के खिलाफ सफल कार्रवाई की। सरगम द्वारा मां विंध्यवासिनी और सनातन धर्म पर अश्लील टिप्पणियों के बाद, श्री तिवारी के प्रयासों से उन्हें जेल हुई और उनकी टीम को निष्क्रिय कर दिया गया। गोकशी के कई मामलों में सलोन कोतवाली में मुकदमे दर्ज कराकर दोषियों को जेल भेजने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो उनके गोवंश संरक्षण के संकल्प को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त, श्री तिवारी ने सन 2013 से 2025 तक चले झारखंडेश्वर मंदिर की जमीन के विवाद में अकेले दम पर लड़ाई लड़ी और मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक जीत दिलाई, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा। यह उनके बचपन से ही सनातन धर्म के प्रति गहरे लगाव और उसे जीवन के अंतिम क्षण तक निभाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
पूज्यश्री रतन वशिष्ठ जी महाराज ने श्री तिवारी के इन असाधारण कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे ही समर्पित सनातनियों की पहचान कर उन्हें सम्मानित करना और संघ में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करना ऋषि सनातन संघ का परम उद्देश्य है।
समस्त ऋषि सनातन संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने श्री आशीष तिवारी को उनकी नई भूमिका और सम्मान के लिए हार्दिक बधाई दी है। यह नियुक्ति और सम्मान उन सभी के लिए एक प्रबल प्रेरणा है जो सनातन धर्म के मूल्यों और सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऋषि सनातन संघ का मानना है कि श्री तिवारी के कुशल नेतृत्व और अदम्य साहस से संघ और भी मजबूती से सनातन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करेगा।

