केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को आगे बढ़ाने वाले पांच स्तंभों पर प्रकाश डाला

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने आज एक बदलते और आत्मनिर्भर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए भारत सरकार के केंद्रित प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को संचालित करने वाली पांच प्रमुख प्राथमिकताओं– मजबूत बिजली खरीद समझौते (पीपीए), मजबूत ग्रिड और भंडारण प्रणालीघरेलू विनिर्माणभूमि उपयोग अनुकूलन और वित्त तक बेहतर पहुंच को रेखांकित किया।

नई दिल्ली में मेरकॉम इंडिया रिन्यूएबल्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुएकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह रणनीतिक सुधार भारत को 2030 तक 500 गीगावाट गैरजीवाश्म क्षमता के लक्ष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं। जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा हैबल्कि उन्हें गति भी दे रहा है।

 

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि भारत अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैरजीवाश्म स्रोतों से प्राप्त कर चुका हैजो राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसीकी समयसीमा से पाँच वर्ष पहले ही प्राप्त हो चुका है। वर्तमान में स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 245 गीगावाट से अधिक हैजिसमें 116 गीगावाट सौर ऊर्जा और 52 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। जोशी ने अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनएके नवीनतम अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि 2024 में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार से देश को जीवाश्म ईंधन के आयात और प्रदूषण संबंधी लागतों से बचकर लगभग 4 लाख करोड़ की बचत करने में मदद मिली है। इसमें 14.9 अरब डॉलर की जीवाश्म ईंधन बचत410.9 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी और 31.7 अरब डॉलर के स्वास्थ्य एवं वायु प्रदूषण लाभ शामिल हैं।

सरकारप्रधानमंत्री सूर्य घरमुफ़्त बिजली योजना जैसी ऐतिहासिक पहलों के माध्यम से इस विकास को सुगम बना रही हैजिसके लिए 58.7 लाख से ज़्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं और इसके परिणामस्वरूप 17.2 लाख रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। इस क्षेत्र में वित्त पोषण और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए30 गीगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएसके लिए 5,400 करोड़ की व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफयोजना शुरू की गई हैजिससे 33,000 करोड़ का निवेश आने की उम्मीद है।

विद्युत मंत्रालयसीईएसीटीयू और पावरग्रिड के समन्वय से 2030 तक 500 ीगावाट गैरजीवाश्म क्षमता की निकासी हेतु एक व्यापक पारेषण योजना तैयार की गई है। केंद्रीय मंत्री ने मॉडलों और निर्माताओं की अनुमोदित सूची (एएलएमएमके विस्तार और जून 2026 से सौर पीवी सेल के लिए सूचीII के आगामी कार्यान्वयन की भी घोषणा की। 24,000 करोड़ की उत्पादनआधारित प्रोत्साहन (पीएलआईयोजना भारत को सौर और पवन ऊर्जा विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने में सक्षम बना रही है।

नवाचार और उत्तरदायी भूमि उपयोग को बढ़ावा देने के लिएमंत्रालय आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में फ्लोटिंग सोलरकैनालटॉप सोलरएग्रीवोल्टिक्स और परियोजनाओं का समर्थन कर रहा है। एमएसएमई और स्टार्टअप्स को भी बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए सशक्त बनाया जा रहा है। इसके अलावाराष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन तेज़ी से आगे बढ़ रहा हैजिसमें 19,744 करोड़ का परिव्यय3,000 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता का आवंटन और 8.6 लाख टन प्रति वर्ष से अधिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन की स्वीकृति शामिल है।

मेरकॉम रिन्यूएबल शिखर सम्मेलन के बारे में

मेरकॉम इंडिया रिन्यूएबल्स शिखर सम्मेलन एक विशेष आयोजन है जो नवीकरण क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाता है। यह आयोजन भारतीय सौर ऊर्जा निगमहरित ऊर्जा नौकरियों के लिए कौशल परिषदभारत में ऊर्जा भंडारण गठबंधनभारतीय रिन्यूएबल ऊर्जा सोसायटीडिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता संघ और भारतीय सौर निर्माता संघ के सहयोग से आयोजित किया गया समर्थन है।

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