पर्यावरणीय रूप से संधारणीय उत्पादन पद्धतियां

हरित प्रौद्योगिकी को अपनाने, पुनर्चक्रण और अपशिष्ट में कमी सहित पर्यावरण की दृष्टि से संधारणीय उत्पादन पद्धतियों के बढते वैश्विक महत्‍व को देखते हुए भारत सरकार ने कई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन पद्दतियों से वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने, बाजार को बेहतर करने, पर्यावरणीय एवं आर्थिक मजबूती में सुधार और निवेशकों के विश्वास को मजबूती मिलने की उम्‍मीद है।

  1. सरकार ने पर्यावरण, सामाजिक एवं शासन (ईएसजी) कार्यबल का गठन किया है, जो संधारणीय उत्पादन, प्रमाणन, निर्यात आदि से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। इस कार्यबल ने विभिन्न उद्योग-केंद्रित कार्यक्रमों को सुगम बनाया है, जो ‘सर्कुलर संवाद’ और ‘क्लस्टर एक्सचेंज मैकेनिज्म’ जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं और ज्ञान के आदान-प्रदान पर केंद्रित हैं।
  2. संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (एटीयूएफएस), जो 31.03.2022 तक प्रभावी थी, के तहत वस्त्र निर्माण में जल और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने हेतु 1,117 से अधिक ऊर्जा-बचत मशीनों को सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना (आईपीडीएस) के माध्यम से शून्य तरल निर्वहन (जेडएलडी) प्रौद्योगिकी से लैस 6 सामान्य अपशिष्ट शोधन संयंत्रों (सीईटीपी) को मंजूरी दी गई है।
  3. सरकार संधारणीय उत्पादन और उपभोग की वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और क्षमता निर्माण के लिए देश भर में कई पायलट परियोजनाओं को भी बढ़ावा दे रही है, जिसमें वस्त्र मूल्य श्रृंखला से खतरनाक रसायनों को खत्‍म करने, नई पीढ़ी के पर्यावरण-अनुकूल एवं जैविक वस्त्रों के उत्पादन, वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन और पुन: उपयोग, जीवन चक्र विश्लेषण, उत्पाद पर्यावरण एवं कार्बन फुटप्रिंट, प्राकृतिक रंगाई आदि जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

अ    ‘भारत में वस्‍त्र फैशन आपूर्ति श्रृंखला से खतरनाक रसायनों का उन्मूलन’ शीर्षक से एक पायलट परियोजना, जो आठ क्लस्टरों और चार फैशन हाउसों में 400 कारखानों में कार्यान्वित की जा रही है, को 1,47,000 टन कार्बन डाई-आक्‍साईड समतुल्य (टीसीओ2ईक्‍यू) उत्‍सर्जन में कमी लाने तथा 10,530 टन हानिकारक रसायनों के उपयोग में कमी करने के उद्देश्‍य से तैयार किया किया गया है।

  1. राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) के अंतर्गत भी पर्यावरणीय रूप से संधारणीय  प्रौद्योगिकियों और सामग्रियों पर केंद्रित अनेक अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) परियोजनाओं को स्‍वीकृति प्रदान की गई है।
  2. इसके अतिरिक्त, माननीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण 2026-27 में वस्त्र क्षेत्र के लिए एक एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा की, जिसमें अन्य बातों के साथ ‘टेक्‍स-इको पहल’ शामिल है, जिसका उद्देश्‍य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और संधारणीय वस्त्र एवं परिधान को बढ़ावा देना‍ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *