संसदीय प्रश्न: अंतरिक्ष डॉकिंग प्रौद्योगिकी

इसरो दो कक्षीय डॉकिंग प्रयोगों का अध्ययन कर रहा है, जिनमें से एक है स्पेडेक्स-2, जो चंद्रयान-4 (चंद्रमा से नमूने वापस लाने) मिशन के अनुसार अत्यधिक दीर्घवृत्ताकार कक्षा में डॉकिंग की नकल करता है, और दूसरा है स्पेडेक्स-3, जो भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन में डॉकिंग के लिए एक पूर्ववर्ती मिशन के रूप में वृत्ताकार कक्षा में डॉकिंग की नकल करता है।

अध्ययन में आने वाले आगामी डॉकिंग मिशन के प्रस्तावित उद्देश्य इस प्रकार है:

अत्यधिक दीर्घवृत्ताकार कक्षा में दो अंतरिक्ष यानों का जुड़ना और अलग होना और दो मॉड्यूल के बीच नमूनों का स्थानांतरण; और

भारतीय डॉकिंग सिस्टम (बीडीएस) का इस्तेमाल कर दो दबावयुक्त मॉड्यूल के बीच वृत्ताकार कक्षा में दो अंतरिक्ष यानों का डॉकिंग और अनडॉकिंग।

स्पेडेक्स मिशन, मिलन और डॉकिंग से जुड़ी जटिल तकनीकों का प्रदर्शन करता है, जो चालक दल स्थानांतरण, प्रोपेलेंट/ फ्लुइड/ विद्युत स्थानांतरण आदि जैसे मानवयुक्त मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है। कक्षा में ऐसी तकनीकों का सत्यापन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) जैसे अंतरिक्ष स्टेशनों से गगनयान मॉड्यूल की डॉकिंग, नियमित चालक दल स्थानांतरण आदि जैसे जटिल काम को करने का रास्ता तैयार करता है।

शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के लिए पेलोड निर्माण, एल्गोरिदम तैयार करना, पौधों के प्रयोग संबंधी प्रौद्योगिकियों आदि जैसी इन प्रौद्योगिकियों को तैयार करने की संभावनाएं मौजूद हैं।

सामान्य तौर पर, शैक्षणिक संस्थान अंतरिक्ष अभियानों में विभाग की मदद से वित्त पोषित विशिष्ट अनुसंधान प्रस्तावों के माध्यम से हिस्सा लेते हैं। इसके साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों/ राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं ने पेलोड निर्माण के माध्यम से आदित्य-एल1 जैसे अभियानों में भी योगदान दिया है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों को सहयोग देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों की व्यापक भागीदारी की संभावना है।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

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